वे कौन से आयुर्वेदिक तरीके हैं, जिनकी मदद से लिवर की समस्याओं को दूर किया जा सकता है?
वे कौन से आयुर्वेदिक तरीके हैं, जिनकी मदद से लिवर की समस्याओं को दूर किया जा सकता है?
लिवर के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करने आयुर्वेद में कई अलग-अलग तरह को औषधियों व जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। इस लेख में हम आयुर्वेद के चिकित्सक से हम इसी बारे में कुछ जानकारियां लेंगे।
Written By:
Mukesh Sharma
| Published : May 31, 2026 12:37 PM IST
आयुर्वेद में हर अंग के स्वास्थ्य के पीछे एक अलग विज्ञान होता है और अगर लिवर की बात करें तो लिवर को आयुर्वेद में यकृत कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार लिवर शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है, जो रक्त को साफ करने वाले तंत्र की तरह काम करता है। आयुर्वेद के अनुसार, यकृत मुख्य रूप से पित्त दोष का स्थान है। जब हमारे गलत खान-पान या तनाव के कारण शरीर में पित्त असंतुलित हो जाता है, तो लिवर से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं और इनमें प्रमुख रूप से फैटी लिवर और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। इस लेख में हम आयुर्वेद व पंचकर्म विशेषज्ञ डॉक्टर हिमांशु सिंह से जानेंगे कि वे कौन सी खास आयुर्वेदिक औषधियां हैं, जिनकी मदद से खराब लिवर को ठीक किया जा सकता है।
लिवर के लिए खास आयुर्वेदिक चिकित्सा
लिवर को पूरी तरह स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेद एक समग्र दृष्टिकोण (Holistic Approach) अपनाने की सलाह देता है, जिसमें आहार, जीवनशैली, जड़ी-बूटियां और शोधन चिकित्सा शामिल हैं।
1. लिवर के लिए आयुर्वेदिक औषधियां
लिवर को ठीक करने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में तिक्त (कड़वे) और दीपनीय-पाचनीय (पाचन अग्नि को बढ़ाने वाले) द्रव्यों का उपयोग किया जाता है:
भूम्यामलकी: यह लिवर की कोशिकाओं (Hepatocytes) को दोबारा जीवित करने के लिए सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है। यह हेपेटाइटिस और फैटी लिवर में अत्यधिक प्रभावी है।
कटुकी: जिसे कुटकी भी कहा जाता है यह एक शक्तिशाली लिवर टॉनिक है जो बढ़े हुए लिवर एंजाइम्स (SGOT/SGPT) को नियंत्रित करती है और पित्त के प्रवाह को सुचारू बनाती है।
कालमेघ: इसे 'लिवर का रक्षक' कहा जाता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स (आमदोष) को बाहर निकालता है और लिवर की सूजन को कम करता है।
पुनर्नवा: जैसा कि नाम से स्पष्ट है (पुनः + नव), यह लिवर के टिश्यू को नया जीवन देती है। यदि लिवर की खराबी के कारण शरीर में सूजन (Edema) आ रही हो, तो यह अचूक है।
प्रमुख शास्त्रीय योग: चिकित्सा के तौर पर आरोग्यवर्धिनी वटी, पुनर्नवादि मंडूर, कुमार्यासव, और लिव-52 जैसी औषधियों का प्रयोग चिकित्सक की सलाह पर किया जाता है।
2. आहार चिकित्सा: लिवर अनुकूल भोजन (Dietary Guidelines)
लिवर को ठीक करने के लिए पाचन अग्नि (जठराग्नि) को संतुलित करना सबसे पहला कदम है और इसलिए लिए आयुर्वेद खानपान में कुछ खास बदलाव करने की सलाह देता है, जो इस प्रकार है -
क्या खाना चाहिए -
हल्का और सुपाच्य भोजन: पुरानी कनक (गेहूं), साठी चावल, मूंग की दाल और दलिया।
सब्जियां: लौकी, तोरई, परवल, कद्दू, और करेला (कड़वे रस वाली सब्जियां पित्त का शमन करती हैं और लिवर को साफ करती हैं)।
गौ-घृत का सीमित उपयोग: आयुर्वेद में औषधीय रूप से सिद्ध घी को लिवर के लिए अच्छा माना गया है, क्योंकि यह पित्त को शांत करता है, लेकिन इसका उपयोग अग्नि के बल के अनुसार ही होना चाहिए।
मट्ठा (छाछ): भुने जीरे और सेंधा नमक के साथ ताजा मट्ठा लिवर के लिए अमृत समान है।
क्या नहीं खाना चाहिए -
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अत्यधिक तीखा, खट्टा, नमकीन, और तला-भुना भोजन
बासी खाना, मैदा, पैकेट बंद फूड्स और जंक फूड
मद्यपान (Alcohol) और धूम्रपान
3. जीवनशैली चिकित्सा: जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Modifications)
हमारी दिनचर्या कैसी है उसका सीधा असर आपके लिवर के स्वास्थ्य पर पड़ता है और इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है -
समय पर भोजन: पित्त काल (दोपहर 11 से 1 बजे के बीच) में दोपहर का भोजन कर लें। रात का भोजन हल्का और सूर्यास्त के आसपास होना चाहिए।
वेगों को न रोकना: मलमूत्र या भूख-प्यास के प्राकृतिक वेगों को कभी न रोकें।
तनाव प्रबंधन: अत्यधिक क्रोध और मानसिक तनाव सीधे तौर पर पित्त को बढ़ाते हैं, जिससे लिवर पर बुरा असर पड़ता है। आयुर्वेद की मदद से मानसिक समस्याओं का इलाज भी किया जा सकता है।
योगासन और व्यायाम: नियमित रूप से मंडूकासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, और भुजंगासन करने से पेट के अंगों की मालिश होती है और लिवर सक्रिय होता है।
प्राणायाम: कपालभाति (धीमी गति से) और अनुलोम-विलोम शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाते हैं और लिवर को डिटॉक्स करते हैं।
4. पंचकर्म चिकित्सा: विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना (Detoxification)
जब शरीर में टॉक्सिन्स (Amadosha) बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो केवल दवाओं से काम नहीं चलता। ऐसे में पंचकर्म द्वारा शरीर का शोधन किया जाता है:
विरेचन कर्म (Virechana): यह लिवर की समस्याओं के लिए सर्वश्रेष्ठ पंचकर्म चिकित्सा है। इसमें औषधियों के माध्यम से नियंत्रित दस्त कराए जाते हैं, जिससे यकृत और पित्ताशय में जमा अतिरिक्त पित्त और टॉक्सिन्स मल मार्ग से बाहर निकल जाते हैं। फैटी लिवर और पीलिया में यह अत्यंत लाभकारी है।
वमन कर्म (Vamana): यदि कफ के अवरोध के कारण लिवर की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही हो, तो औषधीय उल्टी (वमन) कराई जाती है।
बस्ती (Basti): वात-पित्त के असंतुलन को ठीक करने और लिवर को पोषण देने के लिए औषधीय तेलों या काढ़े की एनिमा (Enema) दी जाती है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल आयुर्वेद के से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
FAQs
लिवर को हेल्दी रखने के लिए क्या पिएं?
लिवर हेल्थ के लिए नींबू पानी पीना बेहद फायदेमंद होता है।
लिवर को हेल्दी कैसे रखें?
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल फॉलो करना बहुत जरूरी है।
लिवर क्या काम करता है?
यह अंग शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन का काम करता है।
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