
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : January 21, 2026 8:11 AM IST
Medically Verified By: Dr Shrey Sharma
Ayurvedic Treatment of Uric Acid: यूरिक एसिड शरीर में मौजूद प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थ है, जो प्यूरिन नामक रसायन के टूटने से बनता है। प्यूरिन कुछ कोशिकाओं में होता है और कुछ खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है। जब इन चीजों का सेवन किया जाता है, तो शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ सकती है। जब यूरिक एसिड पेशाब के साथ नहीं निकल पाता है, तो यह क्रिस्टल के रूप में जोड़ों और किडनी में जमा हो जाता है। इससे गठिया का दर्द उठ सकता है या किडनी में पथरी भी हो सकती है। इसलिए यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी होता है। आपको बता दें कि यूरिक एसिड को आयुर्वेद में वात रक्त कहा जाता है। वात रक्त यानी वायु और पित्त दोषों की वृद्धि होना। इसमें आम (Toxins) जमा हो जाते हैं, जो जोड़ों में जमा हो सकते हैं। इससे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द शुरू होने लगता है। यूरिक एसिड का आयुर्वेद में भी इलाज किया जा सकता है। आइए, रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल, सिरसा के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं-
जी हां, आयुर्वेद में यूरिक एसिड का इलाज संभव है। अगर आपको यूरिक एसिड की समस्या है, तो आप आयुर्वेद में इसका इलाज करवा सकते हैं। आयुर्वेद में हाई यूरिक एसिड का इलाज इस प्रकार है-
आयुर्वेद में यूरिक एसिड का इलाज करने के लिए आप स्नेहन स्वेदन थेरेपी ले सकते हैं। इसमें तेल से मालिश की जाती है और इसके बाद शरीर को गर्माहट दी जाती है, जिससे पसीना आए और सारे टॉक्सिंस बाहर निकल जाए। इससे यूरिक एसिड की वजह से होने वाले दर्द में आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधारहोता है। यह सर्दी-जुकाम और मांसपेशियों की जकड़न को भी कम करने में मदद करता है।
विरेचन आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा का एक हिस्सा है। इसमें औषधियों का प्रयोग करके शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को मल मार्ग से बाहर निकाला जाता है। विरेचन से लिवर, छोटी आंत और पाचन-तंत्र की शुद्धि होती है। इससे गठिया और त्वचा रोगों में आराम मिलता है और यूरिक एसिड भी कंट्रोलहोता है।
जब स्नेहन स्वेदन और विरेचन से आराम नहीं मिलता है, तो वस्ति का सहारा लिया जाता है। यह भी पंचकर्म चिकित्सा का एक हिस्सा है। इसमें औषधीय तरल पदार्थों को गुदा या मूत्रमार्म से शरीर में डालकर शुद्धिकरण किया जाता है। इससे वात और पित्त दोष शांत होते हैं।
आयुर्वेद में यूरिक एसिड का इलाज करने के लिए कुछ जड़ी-बूटियों का उपयोग भी किया जाता है। इसमें त्रिफला, कुटकी, पटोलपत्र आदि शामिल हैं। आयुर्वेद में इन जड़ी-बूटियों का चूर्ण खिलाया जाता है। इनसे बॉडी को डिटॉक्स किया जाता है और जोड़ों में जमा विषाक्त पदार्थ और क्रिस्टल को बाहर निकाला जाता है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।