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ठंड और वायु प्रदूषण से बार-बार पड़ रहे बीमार तो इन आयुर्वेदिक औषधियों पर दें ध्यान, जानें इनसे होने वाले फायदे

Ayurveda for winter health: विशेषज्ञों ने ठंड के समय होने वाली बीमारियों और प्रदूषण से होने वाली श्वसन संबंधित समस्याओं से निपटने व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद अपनाने पर जोर दिया

ठंड और वायु प्रदूषण से बार-बार पड़ रहे बीमार तो इन आयुर्वेदिक औषधियों पर दें ध्यान, जानें इनसे होने वाले फायदे

Written by Mukesh Sharma |Updated : December 21, 2024 10:21 AM IST

Winter and pollution problems: जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, लोगों में जुकाम, खांसी और श्वसन संबंधित समस्याएं सामान्य तौर पर देखी जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण भी यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। इस समय एलर्जी के कारण भी संक्रमण और तेजी से फैलता है जिस कारण श्वसन संबंधित स्वास्थ्य व रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। इस मौसम में काली खांसी, निमोनिया, रेस्पिरेटरी सिन्सिटियल वायरस (RSV), फ्लू और प्रदूषण से होने वाली एलर्जी बढ़ रही हैं। ऐसे में आयुर्वेद के विशेषज्ञ इस मौसम में स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से बचाव के लिए सबसे पहले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के महत्व पर जोर देते हैं।

सर्दियों में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा

प्रवेक कल्प के एक प्रमुख आयुर्वेद विशेषज्ञ और कंसल्टेंट, डॉ. जीएस तोमर ने कहा कि, "हमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले उपायों और दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है, क्योंकि वे लंबे समय तक आपको स्वस्थ रखते हैं। सर्दियों के दौरान संक्रमण और प्रदूषण के कारण लोगों में श्वसन संबंधित समस्या तो बढ़ती ही है साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।

डॉ. तोमर ने आयुर्वेद के कारण आपके शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया, जिसके कारण न सिर्फ आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है बल्कि प्रदूषण और मौसम में परिवर्तन के कारण जो श्वसन संबंधित समस्याएं आती हैं उसमें भी मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि, "खांसी और जुकाम जैसी बीमारियों के खिलाफ हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली रक्षा करना ही प्रथम उद्देश्य है।

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वायु प्रदूषण के कारण कई बीमारियों का खतरा

आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से जोड़ते हैं, जिस कारण मौसम और प्रदूषण के चलते श्वसन संबंधित समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है।‌ आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, शाकाहारी सिल्वर वरक, शुद्ध केसर, मुक्ता पंचामृत और शुद्ध शहद जैसी आयुर्वेदिक दवाइयां आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है, साथ ही यह श्वसन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं।

डॉ. तोमर ने कहा कि, "सिल्वर वरक अपने कायाकल्प गुणों के लिए जाना जाता है, जबकि शुद्ध केसर जीवन शक्ति को बढ़ाता है। मुक्ता पंचामृत श्वसन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, और शुद्ध शहद ऊर्जा को बढ़ाता है और एक प्राकृतिक प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले के रूप में कार्य करता है।" खांसी और जुकाम के लिए कफकल्प या प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए रजतप्राश जैसे आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन का दैनिक सेवन कई लाभ प्रदान करता है। वे मौसमी संक्रमणों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं, फेफड़ों को स्वास्थ्य बनाते हैं और खांसी, जुकाम और अन्य श्वसन समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, वे प्रदूषण से होने वाली एलर्जी से ज़रूरी राहत प्रदान करते हैं, जो शहरी क्षेत्रों में चिंता का विषय बना हुआ है।

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आयुर्वेदिक उपायों पर दिया जा रहा जोर

विशेषज्ञ सर्दियों की बीमारियों को देखते हुए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए इन आयुर्वेदिक उपायों को नियमित स्वास्थ्य दिनचर्या में शामिल करने पर ज़ोर देते हैं। यह न सिर्फ प्राकृतिक तौर पर आपको लाभ पहुंचाते हैं बल्कि लंबे समय तक श्वसन और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं। इसलिए इस ठंड में आप संक्रमण और प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधित समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए इन प्राकृतिक उपायों को अपना सकते हैं।