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आयुर्वेदिक दवाओं से ठीक हो सकती है थायरॉइड की समस्या, डॉक्टर से जानिए थायरॉइड का आयुर्वेदिक उपचार, लक्षण और कारण
थायरॉइड की बीमारी से दुनिया भर के लोग प्रभावित है। भारत भी इस बीमारी से अछूता नही है। थायरॉइड रोग पर हुए विभिन्न अध्ययनों एवं सर्वे से पता चलता है कि भारत में लगभग 42 मिलियन लोग थायरॉइड रोगों से पीड़ित हैं। मीडिया रिपोर्ट की माने तो भारत में हर 10 में से 1 आदमी थायरॉइड की चपेट में है। Indian Journal Of Endocrinology & Metabolism की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011 में थायरॉइड की बीमारी से केवल भारत में 4 करोड़ 20 लाख लोग पीड़ित थे। इसमें सबसे चौका देने वाला यह खुलासा हुआ कि अधिकांश लोगों को यह जानकारी ही नही थी कि उन्हें थायरॉइड जैसी कोई बीमारी है।
थायरॉइड मानव शरीर की एक ग्रंथी है। जब इस थायरॉइड की ग्रंथी में कुछ परेशानी आ जाती है तो यह ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है। जिससे थायरॉइड की बीमारी उत्पन्न होती है। आयुर्वेद में इस बीमारी को गले की सूजन के अंतर्गत रखा गया है। आचार्य सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता में थायरॉइड की बीमारी का उल्लेख गलगंड रोग के नाम से उल्लेख किया है।
ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में थायरॉइड के उपचार के लिए स्टीरॉइड्स (Steroids) का प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है, जोकि हमारे स्वास्थ्य का बहुत ज्यादा हानि पहुंचाता है। इसलिए थायरॉइड से छुटाकार पाने के लिए इसको जड़ से खत्म करना बहुत ही जरुरी होता है। आयुर्वेद चिकित्सा थायरॉइड के उपचार के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।
थायरॉइड दो प्रकार के होते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म (ओवरएक्टिव थायरॉयड) तब होता है। जब आपकी थायरॉयड ग्रंथि अधिक मात्रा में थायरोक्सिन हार्मोन (thyroxine Hormone) का निर्माण करने लगती है। हाइपरथायरायडिज्म आपके शरीर के चयापचय (Metabolism) को तेज कर सकता है, जिससे आपका वजन अनियंत्रित हो सकता है। इसके कारण अचानक से दिल की धड़कन बढ़ सकती है।
हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब आपका शरीर पर्याप्त मात्रा थायरॉइड हार्मोन बनना बंद कर देता है। थायरॉइड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है जो गर्दन में होती है। यह आपके शरीर की ऊर्जा को नियंत्रित करके उसे जरुरत के हिसाब से खर्च करने का कार्य करती है। हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी अधिक उम्र की महिलाओं में अधिकांश देखने को मिलती है।
थायरॉइड होने के बहुत सारे कारण हो सकते है जिसके कारण थायरॉइड जैसे रोगों की उत्पत्ति होती है:
आयुर्वेदिक चिकित्सा में थायरॉइड का सबसे अच्छा उपचार उपलब्ध है। आयुर्वेद के अनुसार थायरॉइड रोग की उत्पत्ति वात,पित्त तथा कफ दोष के असंतुलन के कारण होती है। आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा त्रिदोष (वात दोष, पित्त दोष तथा कफ दोष) का निवारण करके थायरॉइड की बीमारी से छुटकारा दिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी की मदद से शरीर का शुद्धिकरण करके शीघ्र ही थायरॉइड की बीमारी का निदान किया जाता है।
पंचकर्म की वमन थेरेपी उपचार से पेट की सफाई करके शरीर के विशाक्त पदार्थ निकाल दिए जाते है जिससे कफ और पित्त का निवारण हो जाता है और थायरॉइड की बीमारी में आराम मिल जाता है। इसके अलावा पंचकर्म में विरेचन थेरेपी भी उपलब्ध है जिससे शरीर में जमे बलगम, पित्तरस तथा फैट से निजात मिल जाती है। इस सभी थेरेपी के अलावा स्वेदन, रसायन, लेप जैसी आयुर्वेदिक चिकित्सा है जो थायरॉइड को जड़ से पूरी तरह खत्म करने में सक्षम है।
डॉ चंचल शर्मा ने बताया कि, “39 वर्षीय एक महिला हमारे पास निःसंतानता के इलाज के लिए आई थी, उनको अंडे नही बन रहे थे। वह थायरॉइड की बीमारी से भी ग्रसित थी। जिसके बाद आयुर्वेदिक तरीके से उनके थायरॉइड का उपचार किया। महिला को थायरॉइड की बीमारी से छुटकारा तो मिला ही साथ में उनके अंडे भी बनने लगे। जिससे उनकी निःसंतानता की समस्या दूर हो गई और उन्होंने गर्भधारण भी किया। आज वह एक हस्ते खेलते बच्चे की माँ है।”
थायरॉइड की जांच एवं लक्षणों के आधार पर आयुर्वेद में कुछ ऐसी हर्बल जड़ी बुटिया एवं औषधियां है जिनका सेवन यदि आप किसी अच्छे आयर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में करते है तो अवश्य ही आपको लाभ होगा। आयुर्वेद में ऐसे बहुत सारे काढ़े (क्वाथ) है जिनके द्वारा बीमारी को बहुत ही जल्दी नियंत्रित किया जाता है।
थायरॉइड की बीमारी से जल्द राहत पाने के लिए आपको एक अच्छे पंचकर्मा केन्द्र से वमन पंचकर्म करवाना चाहिए और साथ ही आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से आयुर्वेदिक दवाएं लेनी चाहिए। उपरोक्त बताई गई सभी आयुर्वेदिक दवाएं एवं पंचकर्म थेरेपी किसी अच्छे पंचकर्म चिकित्सक की देखरेख में ही ले।