आयुर्वेदिक दवाओं से ठीक हो सकती है थायरॉइड की समस्‍या, डॉक्‍टर से जानिए थायरॉइड का आयुर्वेदिक उपचार, लक्षण और कारण

बीमारी को किसी उम्र की जरुरत नही होती है। वह किसी भी उम्र में कभी भी हो सकती है। आयुर्वेद के अनुसार किसी भी बीमारी की मुख्य वजह मनुष्य का खानपान होता है। आज का इंसान इतना ज्यादा व्यस्त हो चुका है कि उसके पास खुद के लिए टाइम ही नही बचा है। इस व्यस्त जीवन के चलते हमारा शरीर कई बीमारियों का घर बन जाता है। इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी है थायरॉइड की जिसके बारें में आज विस्तार से जानेंगे।

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Written By: Atul Modi | Updated : December 31, 2020 2:34 PM IST

थायरॉइड की बीमारी से दुनिया भर के लोग प्रभावित है। भारत भी इस बीमारी से अछूता नही है। थायरॉइड रोग पर हुए विभिन्न अध्ययनों एवं सर्वे से पता चलता है कि भारत में लगभग 42 मिलियन लोग थायरॉइड रोगों से पीड़ित हैं। मीडिया रिपोर्ट की माने तो भारत में हर 10 में से 1 आदमी थायरॉइड की चपेट में है। Indian Journal Of Endocrinology & Metabolism की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011 में थायरॉइड की बीमारी से केवल भारत में 4 करोड़ 20 लाख लोग पीड़ित थे। इसमें सबसे चौका देने वाला यह खुलासा हुआ कि अधिकांश लोगों को यह जानकारी ही नही थी कि उन्हें थायरॉइड जैसी कोई बीमारी है।

थायरॉइड क्या है (Thyroid kya hai)

थायरॉइड मानव शरीर की एक ग्रंथी है। जब इस थायरॉइड की ग्रंथी में कुछ परेशानी आ जाती है तो यह ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है। जिससे थायरॉइड की बीमारी उत्पन्न होती है। आयुर्वेद में इस बीमारी को गले की सूजन के अंतर्गत रखा गया है। आचार्य सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता में थायरॉइड की बीमारी का उल्लेख गलगंड रोग के नाम से उल्लेख किया है।

ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में थायरॉइड के उपचार के लिए स्टीरॉइड्स (Steroids) का प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है, जोकि हमारे स्वास्थ्य का बहुत ज्यादा हानि पहुंचाता है। इसलिए थायरॉइड से छुटाकार पाने के लिए इसको जड़ से खत्म करना बहुत ही जरुरी होता है। आयुर्वेद चिकित्सा थायरॉइड के उपचार के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।

थायरॉइड के प्रकार (Thyroid ke prakar)

थायरॉइड दो प्रकार के होते हैं।

1. हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)

हाइपरथायरायडिज्म (ओवरएक्टिव थायरॉयड) तब होता है। जब आपकी थायरॉयड ग्रंथि अधिक मात्रा में थायरोक्सिन हार्मोन (thyroxine Hormone) का निर्माण करने लगती है। हाइपरथायरायडिज्म आपके शरीर के चयापचय (Metabolism) को तेज कर सकता है, जिससे आपका वजन अनियंत्रित हो सकता है। इसके कारण अचानक से दिल की धड़कन बढ़ सकती है।

2. हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)

हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब आपका शरीर पर्याप्त मात्रा थायरॉइड हार्मोन बनना बंद कर देता है। थायरॉइड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है जो गर्दन में होती है। यह आपके शरीर की ऊर्जा को नियंत्रित करके उसे जरुरत के हिसाब से खर्च करने का कार्य करती है। हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी अधिक उम्र की महिलाओं में अधिकांश देखने को मिलती है।

थायरॉइड के लक्षण (Thyroid ke Lakshan)

  • शरीर के वजन में अचानक से वृद्धि होने लगती है तथा शरीर में सूजन भी आने लगती है।
  • शरीर का तापमान (Temperature) कम होने लगता है।
  • बहुत ज्यादा थकावट महसूस होने लगती है।
  • स्मरण शक्ति तथा सोचने की क्षमता में कमी आने लगती है।
  • शरीर में तामपान सहने की समर्थता बिल्कुल भी नही रह जाती है।
  • आँखों में जलन होना तथा आँख से संबंधित अन्य समस्याएं होने लगती है।
  • कुछ लोगों के हाथ तथा पैरों की अंगुलियों में कंपन की समस्या भी देखने को मिलती है।
  • चिड़चिड़ाहट होने की भी समस्या आ सकती है।

थायरॉइड के कारण (Thyroid ke karan)

थायरॉइड होने के बहुत सारे कारण हो सकते है जिसके कारण थायरॉइड जैसे रोगों की उत्पत्ति होती है:

  • भोजन में नमक (salt-आयोडीन) की अधिक या फिर बहुत ही कम मात्रा के कारण थायरॉइड की बीमारी हो सकती है।
  • तनाव को अधिकांश बीमारियों की जड़ मानी जाती है उसी प्रकार थायरॉइड की बीमारी भी तनावपूर्ण जीवन जीने से होती है।
  • थायरॉइड में अनुवांशिक कारणों (Genetic) की बहुत बड़ी भूमिका होती है। यदि परिवार में माता-पिता को थायरॉइड की बीमारी है तो बच्चों में भी होने संभावना हो सकती है।
  • गर्भवती महिलाओं में जब हार्मोन परिवर्तन होता है तो उस समय भी थायरॉइड की बीमारी होने की संभावना बन सकती है।
  • यदि आप अपनी डाइट में अधिक मात्रा में सोया से निर्मित अधिक खाद्य पदार्थो का सेवन करते है तो यह भी थायरॉइड का कारण बन सकता है।

थायरॉइड का आयुर्वेदिक उपचार (Thyroid ka aayurvedik upachar)

आयुर्वेदिक चिकित्सा में थायरॉइड का सबसे अच्छा उपचार उपलब्ध है। आयुर्वेद के अनुसार थायरॉइड रोग की उत्पत्ति वात,पित्त तथा कफ दोष के असंतुलन के कारण होती है। आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा त्रिदोष (वात दोष, पित्त दोष तथा कफ दोष) का निवारण करके थायरॉइड की बीमारी से छुटकारा दिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी की मदद से शरीर का शुद्धिकरण करके शीघ्र ही थायरॉइड की बीमारी का निदान किया जाता है।

पंचकर्म की वमन थेरेपी उपचार से पेट की सफाई करके शरीर के विशाक्त पदार्थ निकाल दिए जाते है जिससे कफ और पित्त का निवारण हो जाता है और थायरॉइड की बीमारी में आराम मिल जाता है। इसके अलावा पंचकर्म में विरेचन थेरेपी भी उपलब्ध है जिससे शरीर में जमे बलगम, पित्तरस तथा फैट से निजात मिल जाती है। इस सभी थेरेपी के अलावा स्वेदन, रसायन, लेप जैसी आयुर्वेदिक चिकित्सा है जो थायरॉइड को जड़ से पूरी तरह खत्म करने में सक्षम है।

डॉ चंचल शर्मा ने बताया कि, “39 वर्षीय एक महिला हमारे पास निःसंतानता के इलाज के लिए आई थी, उनको अंडे नही बन रहे थे। वह थायरॉइड की बीमारी से भी ग्रसित थी। जिसके बाद आयुर्वेदिक तरीके से उनके थायरॉइड का उपचार किया। महिला को थायरॉइड की बीमारी से छुटकारा तो मिला ही साथ में उनके अंडे भी बनने लगे। जिससे उनकी निःसंतानता की समस्या दूर हो गई और उन्होंने गर्भधारण भी किया। आज वह एक हस्ते खेलते बच्चे की माँ है।”

थायरॉइड की आयुर्वेदिक दवा (Ayurvedic Medicine to control Thyroid)

थायरॉइड की जांच एवं लक्षणों के आधार पर आयुर्वेद में कुछ ऐसी हर्बल जड़ी बुटिया एवं औषधियां है जिनका सेवन यदि आप किसी अच्छे आयर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में करते है तो अवश्य ही आपको लाभ होगा। आयुर्वेद में ऐसे बहुत सारे काढ़े (क्वाथ) है जिनके द्वारा बीमारी को बहुत ही जल्दी नियंत्रित किया जाता है।

  • अश्वगंधा
  • निर्गुंडी
  • वच
  • कंचनार गुग्गल
  • दशमूल काढ़ा
  • चित्रकादिवटी इत्यादि

थायरॉइड होने पर क्या करें और क्या न करें (Thyroid hone par kya karen aur kya na karen)

  • अपने भोजन में मोटा अनाज (बाजरा,गेहू,जौ,मूंग दाल को शामिल करें।
  • नियमति रुप से योग एवं व्यायाम करें।
  • कोशिश करें की दिन में नीद न लेना पड़े अर्थात दिन में सोने से बचें।
  • समुद्री नमक में पर्याप्त मात्रा में गुण पायें जाते है इसलिए अपने भोजन में समुद्री नमक को जगह दें।
  • हरी सब्जियां, छाछ तथा ऐसे खाद्य पदार्थो को अपने भोजन में लायें जो कम कफ बनाते हो।
  • तैलीय भोजन को कम कर दें।
  • रिफांइड से निर्मित खाद्य पदार्थ, चना, मटर,आलू का ज्यादा सेवन न करें।
  • बेकरी खाद्य पदार्थो को सेवन ज्यादा न करें।
  • एक ही स्थान पर बहुत अधिक समय तक बैठन से बचे।
  • अधिक ठंडा और अधिक गर्म लेने से बचें।

थायरॉइड की बीमारी से जल्द राहत पाने के लिए आपको एक अच्छे पंचकर्मा केन्द्र से वमन पंचकर्म करवाना चाहिए और साथ ही आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से आयुर्वेदिक दवाएं लेनी चाहिए। उपरोक्त बताई गई सभी आयुर्वेदिक दवाएं एवं पंचकर्म थेरेपी किसी अच्छे पंचकर्म चिकित्सक की देखरेख में ही ले।