मुंबई के बाद नागपुर में भी बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, ये हैं Swine Flu के इलाज के आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेदिक दवाइयों की मदद से बीमारियों का इलाज कराने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आयुर्वेदिक उपचार के साइड-इफेक्टस कम होते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 31, 2022 7:04 AM IST

Ayurvedic Treatment for Swine Flu: स्वाइन फ्लू  एक वायरल बीमारी है जो बीते कुछ वर्षों से हर साल बरसात और ठंड के मौसम में आसानी से फैलता बढ़ जाता है। स्वाइन फ्लू में जुकाम की तरह की समस्याएं दिखायी देती हैं। इस साल की बरसात के साथ ही महाराष्ट्र और देश के कुछ अन्य हिस्सों से स्वाइन फ्लू के मामले (swine flu cases in Maharashtra) पाए जाने की खबरें आ रही हैं। स्वास्थ्य इकाइयों द्वारा लोगों से जहां सावधान रहने की अपील की गयी है वहीं,प्रशासन द्वारा भी इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षणों की बाद की जाए तो उसमें सर्दी-खांसी, गले में खिचखिच, कमजोरी, मसल्स पेन, डायरिया, उल्टी, थकान (fatigue) और बहती नाक जैसे लक्षण (Symptoms of Swine Flu) दिखायी देते हैं। स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए एलोपैथी में कई प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं वहीं, आयुर्वेद में भी स्वाइन फ्लू के लक्षणों राहत दिलाने वाले कई तरीके मौजूद हैं। आयुर्वेदिक दवाइयों की मदद से बीमारियों का इलाज कराने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आयुर्वेदिक उपचार के साइड-इफेक्टस कम होते हैं। यहां पढ़ें स्वाइन फ्लू के कुछ आसान घरेलू उपायों के बारे में। (Ayurvedic Treatment for Swine Flu in Hindi.)

स्वाइन फ्लू के आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic Remedies For Swine Flu)

  • एक गिलास पानी में जीरा और धनिया के बीज उबालकर उसे ठंडा करें और पीएं।
  • पानी में त्रिफला पाउडर मिलाएं और उसे अच्छी तरह उबालें और इसका सेवन करें।
  • तुलसी के कुछ पत्ते और अदरक के टुकड़े एक साथ लेकर उसे पीस लें। फिर, इसे निचोड़कर जूस निकालें और पीएं।
  • सितोपलादी चूर्ण और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में 2 बार खाएं।

स्वाइन फ्लू से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां भी (Swine Flu Precautions)

  • स्वाइन फ्लू के लक्षण (Symptoms of swine flu) दिखने पर खुद को आइसोलेट कर लें।
  • किसी भी संक्रमित व्यक्ति से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें।
  • घर से बाहर निकलने से पहले  मास्क पहने ताकि, संक्रमण से बचने में मदद होती है।
  • खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल से कवर करें।
  • भीड़भरी जगहों जैसे मॉल, मार्केट और पार्क वगैरह में जाने से बचें।
  • बासी खाना (stale food) ना खाएं। कई दिनों से रखे हुए या खराब हो चुके फल और सब्जियों के सेवन से बचें।
  • सुपाच्य, हल्का और घर का बना सादा खाना खाएं।
  • अपने घर में नीम की पत्तियों (Neem Leaves), गुग्गुल और अपराजिता धूप को एकसाथ जलाएं और अपने घर के हर कोने में इसके धुएं को फैलाएं।