
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : August 4, 2025 4:08 PM IST
Medically Verified By: डॉ. प्रताप चौहान
If you ever notice an unexplained swelling in your legs and feet, take it as an indicator that your kidneys are in danger. When the kidneys are unable to properly filter fluids, excess fluid builds up in the body, leading to swelling, particularly around the legs and feet.
Venous Insufficiency Symptoms : आजकल खड़े होकर काम करने वाले लोग, जैसे कि शिक्षक, सुरक्षाकर्मी, किचन स्टाफ और यहां तक कि लंबे समय तक कंप्यूटर पर बैठे रहने वाले प्रोफेशनल्स, अकसर पैरों में सूजन, भारीपन और दर्द जैसी परेशानियों से जूझते हैं। ये लक्षण “वेनस इन्सफिशिएंसी” यानी शिराओं की कमजोरी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इससे समय रहते न निपटा गया तो आगे चलकर वैरिकोज़ वेन्स और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
डॉ. प्रताप चौहान, जानी-मानी आयुर्वेदिक संस्था जीवा आयुर्वेद के निदेशक, बताते हैं कि आयुर्वेद में शिराओं की इस कार्यक्षमता की गड़बड़ी को रक्तवह स्रोतस और वात दोष से जोड़कर देखा जाता है। जब वात का असंतुलन होता है, तो रक्त का प्रवाह बाधित होता है और शिराओं में रक्त इकट्ठा होने लगता है। यह स्थिति समय के साथ नसों को कमजोर कर देती है।
थोड़ा ध्यान देने पर आप देखेंगे कि जिन लोगों की पाचन शक्ति कमज़ोर रहती है या जो लगातार कब्ज़ की समस्या से जूझते हैं, उनमें यह स्थिति ज़्यादा देखने को मिलती है। इसका कारण यह है कि मलावरोध और पाचन संबंधी दोष भी रक्त प्रवाह को प्रभावित करते हैं।
अगर आप या आपके किसी अपने को अभी-अभी पैरों में भारीपन, रात को ऐंठन या हल्की-फुल्की नसें उभरती दिखने लगी हैं, तो यह सही समय है आयुर्वेदिक देखभाल शुरू करने का। डॉ. चौहान बताते हैं कि आयुर्वेद “रोग के कारण की जड़” को पहचानकर शरीर का संतुलन पुनः स्थापित करता है।
इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने से नसों में जमी हुई रक्त की रुकावट दूर हो सकती है और नसें अपनी कार्यक्षमता फिर से हासिल कर सकती हैं।
डॉ. चौहान स्पष्ट करते हैं कि अगर शुरुआती अवस्था में रोग को पहचाना जाए और जीवनशैली में सुधार किया जाए, तो आयुर्वेद के ज़रिये नसों की कमज़ोरी को न सिर्फ रोका जा सकता है, बल्कि काफी हद तक ठीक भी किया जा सकता है। हालांकि, अगर नसें बहुत ज़्यादा फूल चुकी हों या दर्द बहुत बढ़ चुका हो, तो उस अवस्था में रोग को नियंत्रित करना ही प्राथमिकता होती है।
आपका शरीर हर दिन आपको संकेत देता है। पैरों में लगातार भारीपन, सूजन या नींद के दौरान ऐंठन को हल्के में लेना भविष्य की बड़ी परेशानियों को न्यौता दे सकता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से समय रहते शुरू की गई देखभाल शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित कर सकती है। ऐसे में समय रहते एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।