
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 28, 2022 2:31 PM IST
मौसम बदलने के साथ हमारे स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार बरसात के मौसम में शरीर की प्रकृति भी प्रभावित होती है और प्रकृति दोष में भी बदलाव आते हैं।जानकारों के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर का वात दोष बढ़ जाता है और शरीर में पित्त जमा होने लगता है। इस मौसम में वात और पित्त दोष बढ़ने से बॉडी सिस्टम कमजोर होने लगता है। पित्त दोष बढ़ जाने पर इसका सीधा असर डाइजेस्टिव सिस्टम पर पड़ता है। परिणामस्वरूप पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और पेट से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में शरीर में पित्त दोष को संतुलित करने और पित्त की वजह से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए आयुर्वेद में ऋतुचर्या (Ayurvedic ritucharya) जैसे कुछ नियम बताए गए हैं। उन्हीं नियमों के बारे में आप पढ़ सकते हैं इस लेख में। साथ ही जानें कि मानसून में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मौसम बदलने के साथ खान-पान और जीवनशैली में बदलाव आवश्यक हैं और आयुर्वेद में हर मौसम को लिए ऋतुचर्या का उल्लेख है। इन नियमों के अनुसार आवश्यक बदलाव करने से शरीर को बदलते मौसम के साथ बीमार होने से बचाने में सहायता होती है। बरसात के मौसम के लिए जिस प्रकार की ऋतुचर्या की सलाह दी गयी है उसके अनुसार पित्त दोष से बचने के लिए किस प्रकार के नियमों का पालन करना चाहिए, उससे ही जुड़े कुछ नियम ये हैं-
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई बीमारी और उसके उपचार के नुस्खों से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)