
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
बदलते मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार की समस्या होना आम बात है।
पूरे देश में इन दिनों मौसम करवट ले रहा है। मौसम बदलते ही सबसे पहले असर हमारी इम्यूनिटी पर पड़ता है। कभी तेज धूप, कभी बारिश और कभी ठंडी हवा का असर शरीर को संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देता है। यही वजह है कि इस दौरान बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश और वायरल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। बदलते मौसम में जब बुखार, खांसी और जुकाम की परेशानी की बात आती है तो भारतीय घरों में आज भी सबसे पहले आयुर्वेदिक उपायों को अपनाने की बात कही जाती है।
दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और आयुर्वेदिक डॉ. चंचल शर्मा का कहना है कि आयुर्वेद इस बात को मानता है कि बदलते मौसम में रोजमर्रा की जीवनशैली में छोटे- छोटे बदलाव किए जाए तो बुखार, खांसी और जुकाम जैसी कई बीमारियां कम होती हैं। तो चलिए देर किस बात की है आइए जानते हैं बदलते मौसम में कौन- कौन से आयुर्वेदिक उपाय अपनाने चाहिए ताकि बदलते मौसम में बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।
डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि बुखार, सर्दी और खांसी से बचाव करने के लिए सुबह खाली पेट गुनगुना पानी जरूरी है। गुनगुना पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन क्रिया को एक्टिव करने में मदद करता है। खाली पेट गुनगुना पानी पीने से इम्यूनिटी को भी सपोर्ट मिलती है।
आयुर्वेदिक काढ़ा पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है।
तुलसी, अदरक और काली मिर्च लंबे समय से घरेलू उपायों का हिस्सा रहे हैं। तुलसी, अदरक और काली मिर्च से तैयार हल्का काढ़ा गले को आराम पहुंचाने और शरीर को गर्म रखने में मदद कर सकता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर कहती हैं कि तुलसी, अदरक और काली मिर्च का काढ़ा स्वाद में थोड़ा सा कड़वा होता है इसलिए आप इस काढ़े में शहद भी मिला सकते हैं। शहद को सबसे आखिरी में मिलाना चाहिए।
मौसम बदलने पर तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना खाने से भी बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं। आयुर्वेद कहता है कि बदलते मौसम में हल्का खाना ही खाना चाहिए। इस दौरान मूंग की खिचड़ी, दाल, सूप, हरी सब्जियां, ताजे फलों को डाइट में शामिल करें। हल्का खाना तेजी से पचता भी है और बीमारियों को भी दूर करने में मददगार होता है।
बदलते मौसम में बुखार, सर्दी और जुकाम की समस्या को दूर रखने में हल्दी वाला दूध बहुत फायदेमंद होता है। हल्दी में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन कम करने में मददगार होते हैं। रात में सोने से पहले हल्दी वाला गुनगुना दूध पीने से गले की खराश कम होती है। हल्दी के पोषक तत्व बदलते मौसम में इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा कम करने में मदद मिलती है।
कम नींद लेने से भी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। बदलते मौसम में बुखार, सर्दी, खांसी को दूर रखने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी लें। नींद शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
गंदे हाथ भी बदलते मौसम में बीमारियों की वजह बनता है।
खांसी-जुकाम फैलाने वाले वायरस अक्सर हाथों के जरिए भी फैलते हैं। बाहर से आने के बाद साबुन से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।
बारिश या ठंडी हवा में भीगने के बाद जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनें। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
आयुर्वेदिक डॉक्टर का कहना है कि बदलते मौसम में सही खानपान, लाइफस्टाइल को सही करने से बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
Disclaimer: बदलते मौसम में बुखार, सर्दी- खांसी होने की परेशानी होना आम बात है। ऐसे में कुछ आयुर्वेदिक अपनाने से इससे राहत बेशक से मिल सकती है। लेकिन लंबे समय तक बुखार, सर्दी- खांसी की परेशानी होती है तो इसे नजरअंदाज न करें और इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।