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आयुर्वेद में हाई बीपी मैनेज करने का क्या है तरीका? हाइपरटेंशन के मरीजों के काम आएंगी ये टिप्स

हाई ब्लड प्रेशर लेवल को कम करने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय बताए गए हैं। इनमें कुछ नेचुरल फूड्स, हर्ब्स और पत्तियों से नुस्खे तैयार किए जाते हैं।

आयुर्वेद में हाई बीपी मैनेज करने का क्या है तरीका? हाइपरटेंशन के मरीजों के काम आएंगी ये टिप्स

Written by Sadhna Tiwari |Updated : April 30, 2024 11:51 PM IST

Managing High BP with Ayurved: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आजकल बहुत कॉमन है। यह एक लाइफस्टाइल डिजिज है जो लोगों को अस्त-व्यस्त जीवनशैली और खान-पान से जुड़ी गलतियों के कारण भी अपना शिकार बना लेती है। हालांकि, कुछ मामलों में अनुवांशिक कारणों और किसी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री जैसे कारणों से भी हाइपरटेंशन का रिस्क बढ़ता हुआ दिखायी देता है। ब्लड प्रेशर लेवल को अगर नियंत्रित ना किया जाए तो इससे हार्ट हेल्थ से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर लेवल को कम करने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय बताए गए हैं। इनमें कुछ नेचुरल फूड्स, हर्ब्स और पत्तियों से नुस्खे तैयार किए जाते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर लेवल के लिए नेचुरल उपाय (Natural remedies for  high blood pressure)

लहसुन खाएं (Eat Garlic to control blood pressure level)

ब्लड प्रेशर लेवल को बढ़ने से रोकनेके लिहाज से लहसुन का सेवन बहुत कारगर बताया जाता है। लहसुन में एलिसीन नामक तत्व पाया जाता है जो ब्लड प्रेशर लेवल को संतुलित करता है। कुछ स्टडीज में यह पाया गया कि जो लोग लहसुन का सेवन करते हैं उन्हें अपना ब्लड प्रेशर लेवल मैनेज करने में आसानी होती है।

बीटरूट का जूस पीएं (Beetroot Juice for high BP management)

हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए चुकंदर या बीटरूट के सेवन के भी कई फायदे हैं। कुछ स्टडीज में पाया गया कि बीटरूट का जूस पीने से ब्लड प्रेशर लेवल नियंत्रित रहता है। इन लोगों को दिन में एक कप बीटरूट जूस पीने की सलाह दी जाती है। बीटरूट में नाइट्रेट नामक तत्व पाया जाता है। यह नसों की सिकुड़न कम करता है जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। रक्त का संचार ठीक तरीके से होने से ब्लड प्रेशर कम होता है।

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Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।

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