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Written By: Atul Modi | Updated : May 21, 2021 10:59 AM IST
कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए आयुष विभाग, लखनऊ ने अणु तेल का प्रयोग करने की सलाह दी है।
कोरोना महामारी के दौरान शरीर का मजबूत होना बहुत ही जरूरी है। ऐसे में अगर आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ अणु तेल का प्रयोग (Anu Tel Uses) करते है तो यह आपके अच्छे स्वास्थ्य का एक अचूक विकल्प साबित होगा। कोरोना संकट की इस मुश्किल घड़ी में आयुर्वेदिक दवाओं से निर्मित यह अणु तेल रामबाण साबित होने वाला है। अब अणु तेल को उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। अणु तेल प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा की एक प्रमुख औषधि है जिसका प्रयोग आयुर्वेद में कई वर्षों से हो रहा है। कोरोना वायरस के खिलाफ इसे अच्छी दवा के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति में नाक तथा कान में तेल डालना की परंपरा बहुत पहले से ही रही है। ऐसे समय में इसका सफल प्रयोग भारत की इस प्राचीन चिकित्सा को बढ़ावा मिल रहा है। अणु तेल के इस्तेमाल से नाक में नमी बनी रहती है जोकि वायरस को अंदर जाने से रोकती है और हवा में फैले कणों को फेफड़ों में जाने से रोकती है। अणु तेल का प्रयोग करना बहुत ही आसान है क्योंकि यह एक घरेलू उपाय जो हर घर में बहुत ही सुगमता के साथ मिल सकता है।
ऑल इंडिया ऑफ आयुर्वेदा जो कि आयुष विभाग के अंतर्गत आता है उसका मत है कि इस प्रकार की चिकित्सा पहले से ही भारत में प्रभावी रूप से कारगर थी और आज भी पूरी तरह प्रभावी है। अणु तेल के अच्छे परिणाम कोरोना के मरीजों में देखने को मिल रहे है।
अणु तेल के संबंध में आशा आयुर्वेद केंद्र की आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ चंचल शर्मा का कहना कि अणु का तेल नाक में डालने से नाक व गले में एक मजबूत परत बन जाती है जिसके उपरांत नाक में हानिकारक कण अंदर प्रवेश नही है क्योंकि अणु तेल उन्हें नाक में ही खत्म कर देता है। यदि मास्क से साथ-साथ अणु तेल का प्रयोग किया जाये तो इससे कोरोना से डबल सुरक्षा मिलती है।
आयुर्वेद में अणु तेल का निर्माण कई औषधि के मिश्रण से तैयार किया गया है। यह तेल कोरोना के मरीजों के लिए एक वरदान के जैसा साबित होने वाला है। अणु तेल में डालने वाली आयुर्वेदिक औषधियां कुछ इस प्रकार है- दालचीनी, कंटकारी, पिठवन, बृहती, देवदार, अनंतमूल, जीवंती इत्यादि का प्रयोग किया जाता है।
अणु तेल श्वास संबंधी बीमारी के अलावा अन्य बीमारियां में भी लाभकारी है। अणु तेल के प्रयोग से शरीर में होने वाली सूजन कम होती है। अणु तेल शरीर में पैदा होने वाले हानिकारक सूक्ष्मजीवों को रोक कर शरीर की रक्षा करता है। यदि शरीर में कामेच्छा की कमी है तो उसके विकार को दूर कर उत्तेजना में वृद्धि करता है। कफ से होने वाली बीमारियों अर्थात शरीर के कफ दोष में नियंत्रण करके श्वासनली को साफ करता है और शरीर में संतुलन स्थापित करता है। अस्थमा के मरीज में इसको प्रयोग में ला सकते है क्योंकि यह उनको राहत दिलाता है और तनाव-अवसाद में कमी लाता है। सिर दर्द एवं माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज का भी एक अच्छा विकल्प है।
डॉ चंचल शर्मा अणु तेल के औषधीय गुण को ध्यान में रखते हुए इसके प्रयोग पर जोर दिया है। यदि कोरोना से संक्रमित मरीज या फिर कोरोना से बचने के लिए स्वस्थ व्यक्ति इसकी दो बूंद नाक में डालता है तो कोरोना से संक्रमित होने की संभावना बिल्कुल भी नही होती है।
आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति में पांच प्रकार के कर्म होते है उन्हीं पांच कर्मों में से एक कर्म है नस्यमकर्म जिसमें नाक में औषधि तेल डालने का विधान है। नस्यम कर्म के नियम के अनुसार सुबह में नियमित रूप से दोनों नथुनों में दो बूंद अणु का तेल डालना चाहिए।
नस्यम कर्म के अनुसार किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में प्रतिदिन नियमित रूप से नाक में तेल डालने से शरीर को स्वस्थ रखता है, झुर्रियों, गंजापन, बालों को सफेद होने से रोकता है। इसके साथ ही सिर दर्द, पक्षाघात, राइनाइटिस, मानसिक विकार तथा त्वचा विकार को भी रोकने में मदद करता है। थकान को दूर करके दृष्टि में सुधार करता है और दांतों की शक्ति में वृद्धि करता है।
नोट: यह जानकारी आशा आयुर्वेद केंद्र की निःसंतानता विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा से बातचीत पर आधारित है।