
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr Partap Chauhan
ayurveda and lung cancer (AI generated image)
अगर हम आंकड़ों की बात करें तो दुनियाभर की रिसर्च यही बताती हैं कि लंग कैंसर दुनिया का सबसे खतरनाक कैंसर है। डब्ल्यूएचओ की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने के अनुसार भी फेफड़ों में होने वाला कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण हैं। लेकिन भारत की हजारों साल पुरानी पद्धति आयुर्वेद हमारे फेफड़ों और उनमें होने वाली कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में क्या कहती है। Jiva Ayurveda के फाउंडर आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रताप चौहान ने प्रदूषण और उससे होने वाली फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां व लंग कैंसर आदि के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी। इस लेख में हम इस बारे में जानने के साथ-साथ यह भी जानेंगे कि प्रदूषण वाली जगहों पर रहने वाले लोग आखिर किन बातों का ध्यान रख कर फेफड़ों में कैंसर जैसी बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।
डॉ. प्रताप चौहान के अनुसार अलग-अलग शहरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण वहां की हवा में विषाक्त तत्व पाए जाते हैं, जो श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके साथ-साथ बदली जीवनशैली के कारण हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ती जा रही है, जो सीधे हमारे फेफड़ों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। अस्पतालों की ओपीडी में सांस के मरीजों, पुरानी खांसी, एलर्जी और अस्थमा की शिकायतों में लगातार भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
श्वसन से जुड़ी समस्याओं के लिए एलोपैथिक ट्रीटमेंट जो बेहद कारगर है, लेकिन इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में लोग दीर्घकालिक समाधान के लिए आयुर्वेद पर ही भरोसा करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति हमारे फेफड़ों को मजबूत करने और बीमारियों से बचाने में वाकई प्रभावी है? Thehealthsit.com ने इस विष्य पर आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रताप चौहान से बात की और उन्होंने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी।
प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में फेफड़े केवल अंग नहीं बल्कि 'प्राणवह स्रोतस' जिसका मतलब है ऑक्सीजन और प्राणवायु के प्रवाह का मुख्य केंद्र। पर्यावरण से जुड़े श्वसन विकार मुख्य रूप से शरीर में 'कफ' और 'वात' दोष के असंतुलन के कारण ही उत्पन्न होते हैं।
ayurveda lung problems (AI generated image)
हजारों सालों से आयुर्वेद को इसी खास बात के लिए जाना जाता है, कि आयुर्वेद का प्राथमिक लक्ष्य केवल बीमारी के लक्षणों को दबाना नहीं है बल्कि बीमारी से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाना और दोषों को संतुलित करना है, ताकि बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके। अपने इसी दृष्टिकोण की मदद से आयुर्वेद बीमारियों को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखता है।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों पर विभिन्न रिसर्च किए जा चुके हैं और आयुर्वेद भी कुछ जड़ी-बूटियों को फेफड़ों के स्वास्थ्य बेहद फायदेमंद बताता है -
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल आयुर्वेद के अनुसार फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के बारे में सही जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।