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आमतौर पर वसंत ऋतु मार्च महीने से शुरू होकर जून में खत्म होता है, ये मौसम स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होता है और काफी खुशनुमा होता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर ऐश्वर्या संतोष के मुताबिक, स्प्रिंग सीजन यानी वसंत ऋतु 'कफ सीजन' के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि इस मौसम में शरीर में कफ दोष की वृद्धि होती है। ऐसा सूर्य की गर्मी तेज होने के कारण होता है। इसलिए इस मौसम में एलर्जी, राइनाइटिस, साइनोसाइटिस जैसे लक्षण ज्यादा देखने को मिलते हैं। अगर इन लक्षणों से बचना चाहते हैं तो ये 6 आयुर्वेदिक टिप्स फॉलो कर सकते हैं।
वसंत ऋतु में एक्सरसाइज करना खुद के लिए अनिवार्य बना लें। व्यायाम करने से शरीर में कफ संतुलित होने में मदद मिलती है। इससे शरीर की डाइजेस्टिव फायर बढ़ती है।
अदरक की प्रकृति गर्म और ड्राई होती है। इससे भी शरीर में कफ बैलेंस होने में सहायता मिलती है। इसलिए वसंत ऋतु में अदरक वाली चाय पीना सबसे बेस्ट रहता है।
दिन के काफा समय से बचने के लिए सुबह सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें या सूर्योदय होने से पहले ही उठ जाएं। नींद और कफ में एक जैसे गुण होते हैं इसलिए जब हम सुबह के काफा समय तक सोते रहते हैं जो सूर्योदय के बाद होता है, हमारे शरीर के अंदर का काफा लेवल अपने आप ही बढ़ जाता है।
पाउडर से अपने शरीर की ड्राई मसाज करें। उद्वर्तनम काफार्म पूरे शरीर के कफ लेवल को कम करने में मदद करता है। उदाहरण के तौर पर कुलाथा चूर्ण पाउडर से शरीर की मसाज कर सकते हैं।
ज्यादा हैवी, ठंडा, खट्टा और मीठा खाना न खाएं। लाइट भोजन करें, पका हुआ और गर्म खाना ही खाएं। बर्फ की या बहुत ठंडी चीजों को खाना अवॉयड करें। पुराने जौ, चावल और गेहूं का सेवन करने से बचें।
वसंत ऋतु के दौरान दिन में न सोएं। दिन में सोने से कफ लेवल बढ़ता है और इससे अपचन की समस्या देखने को मिलती है। खाना पच पाने में भी काफी दिक्कत होती है।
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