
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
pregnancy care Ayurveda (AI generated image)
गर्भावस्था महिलाओं के लिए एक बहुत ही नाज़ुक और महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें अपनी सेहत और बच्चे दोनों का खास ध्यान रखना होता है। इसमें महिलाओं को आराम करने की सलाह दी जाती है, ज़्यादा व्यायाम या झुकने का काम करने का वर्जित बताया गया है। ऐसे में आप सही खान-पान से अपने शरीर को स्वास्थ्य रख सकते है पर क्या आपने अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया है? दिल्ली के आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और फर्टिलिटी डॉ. चंचल शर्मा से हम इस बारे में कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियां लेने वाले हैं।
आयुर्वेद में माना गया है की जितना ज़रूरी आपका शारीरिक स्वास्थ्य है उससे कई ज़्यादा आपका मानसिक स्वास्थ्य ज़रूरी है, क्योंकि अगर आपका मन शांत रहेगा तभी आपका शरीर भी संतुलित रहेगा।
आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, गर्भावस्था और बच्चे का जन्म किसी महिला के लिए सबसे ज्यादा नई ऊर्जा देने वाला समय हो सकता है, क्योंकि इस दौरान उसके शरीर की हर कोशिका को खुद को नया करने का मौका मिलता है।
गर्भावस्था के दौरान, पल रहे भ्रूण के पोषण के लिए नीचे की ओर जाने वाली ऊर्जा, जिसे 'अपान वायु' कहा जाता है, जरूरी होती है। जब गर्भवती महिला का मन और शरीर संतुलित अवस्था में होता है, तो 'अपान वायु' पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है; लेकिन तनाव और थकान के समय, ऊपर की ओर जाने वाली ऊर्जा यानि—'प्राण वायु' को जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।
ये 5 तरीके प्रेगनेंसी के दौरान मां और बच्चे की सेहत बनाए रखने के साथ-साथ प्राण और अपान वात को संतुलित रखने के लिए अपनाए जाने चाहिए।
ऐसे तेल त्वचा की सतह पर मौजूद माइक्रोबायोलॉजी को पोषण देते हैं और माँ की त्वचा के सेंसरी नर्वस सिस्टम को आराम पहुंचाता हैं। यह मालिश खुद भी की जा सकती है या पार्टनर भी कर सकते हैं। पेट वाले हिस्से की मालिश करें और 8वें व 9वें महीने में ब्रेस्टफीडिंग की तैयारी के लिए निपल्स पर ज्यादा ध्यान दें।
प्रेग्नेंसी के दौरान सबसे ज़रूरी बात है हमेशा खुश रहना, ऐसे में पार्टनर की भूमिका यह पक्का करना है कि होने वाली माँ खुश रहे। साथ ही, माँ को भी रोजाना खुश रहने वाली चीजें करनी चाहिए। पार्टनर को होने वाली माँ की सभी इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। प्रेगनेंसी के आठवें महीने में जितना हो सके सोना चाहिए, क्योंकि यह एक उत्कृष्ट समय होता है। इस दौरान 'ओजस' नाम का सूक्ष्म तरल पदार्थ माँ से बच्चे तक पहुंचाता है, जो ऊर्जा और इम्यून सिस्टम के काम करने के लिए ज़रूरी होता है। अपना ध्यान रखें और आने वाले नन्हे मेहमान के साथ-साथ अपना भी खास ख्याल रखें।
डॉ. चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा)
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल गर्भावस्था में आयुर्वेद के फायदों के बारे में बताना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।