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पिछले कुछ दिनों में ठंड काफी बढ़ गई है। जैसा कि हम सभी देख पा रहे हैं इन दिनों पतझड़ का मौसम ठंड या सर्दी में काफी तेजी से बदल रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. वरालक्ष्मी यनामंदरा (Dr.Varalakshmi Yanamandra) बताती हैं तेजी से बदलता यह मौसम कुछ लोगों के लिए काफी कठिन हो सकता है। उनकी मानें तो ऐसे में हम में से कुछ लोगों की त्वचा रूखी हो सकती है, साथ ही आपका मल भी। सिर्फ इतना ही नहीं कुछ लोगों को बदलते मौसम में जोड़ों में दर्द और जकड़न का भी अनुभव हो सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि इस बदलते मौसम में आप खुद का ख्याल कैसे रख सकते हैं? आयुर्वेद के अनुसार, मौसमी परिवर्तनों के साथ तालमेल बिठाने के लिए किसी भी व्यक्ति को मूल बातों पर वापस जाने और ऋतुचर्या (Rituacharya) की अवधारणा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस प्राचीन आयुर्वेदिक प्रथा का अर्थ दो शब्दों से लिया गया है जिसमें 'ऋतु' का अर्थ है ऋतुएँ (6 ऋतुएँ) और 'चर्या' का अर्थ है एक नियम या एक अनुशासन।
आयुर्वेद की मानें तो ऋतुचर्या का अभ्यास मूल रूप से व्यक्ति को अपनी जीवनशैली को मौसमी बदलावों के अनुकूल बनाना सिखाता है, जो शरीर द्वारा पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के कारण अनुभव किए जाते हैं। यह किसी भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इस लेख में हम आपके साथ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. वरालक्ष्मी की सुझाई कुछ टिप्स शेयर कर रहे हैं जिससे आपको बदलते मौसम से होने वाली दिक्कतों से लड़ने में मदद मिलेगी।
अभ्यंग (Abhyanga) एक मालिश है, जिसमें गर्म तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें तेल को सिर की त्वचा से लेकर पैरों के तलवों तक पूरे शरीर पर लगाया जाता है। यह आयुर्वेद में सबसे लोकप्रिय मालिश है, जो भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद प्राकृतिक प्रथाओं जैसे मालिश और आप क्या खाते हैं, के माध्यम से स्वास्थ्य को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करता है। तेल इस अभ्यास का केंद्रीय घटक है। जब तेल को मालिश के स्ट्रोक्स के साथ जोड़ा जाता है, तो यह समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने का काम करता है। वैसे तो अभ्यंग आमतौर पर एक मसाज चिकित्सक द्वारा किया जाता है, लेकिन आप इसका अभ्यास घर पर खुद से भी आराम से कर सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सुबह-सुबह अभ्यंग करना सबसे अच्छा माना जाता है लेकिन आप इन अन्य टिप्स को भी आजमा सकते हैं, जैसे: