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डिलीवरी के बाद आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं को क्या करना चाहिए और क्या नहीं? जानें

डिलीवरी के बाद का समय महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आयुर्वेद के अनुसार, क्या करना चाहिए और क्या नहीं आइए जानते हैं इसके बारे में।

डिलीवरी के बाद आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं को क्या करना चाहिए और क्या नहीं? जानें
आयुर्वेद के अनुसार सही खान-पान, आराम महिला की रिकवरी तेजी से करता है।

Written by Ashu Kumar Das |Published : April 4, 2026 1:38 PM IST

Delivery Ke Mahila ko Kya karna Chaiye ya Nahi: स्वास्थ्य के लिहाज से महिलाओं के जीवन में कई पड़ाव आते हैं। शुरुआती उम्र में पीरियड्स, उसके बाद प्रेग्नेंसी और फिर डिलीवरी। पुराने दौर में ऐसा कहा जाता था कि डिलीवरी यानी की बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं का नया जीवन शुरू होता है। इस दौरान शरीर शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद के समय को सूतिका काल कहा जाता है, जो सामान्यतः 40 से 45 दिनों तक माना जाता है। इस समय की अवधि में मां की सही देखभाल हो, तो न सिर्फ उसकी वर्तमान की सेहत में सुधार आता है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों का खतरा भी घटता है। यही कारण है कि भारत में आज भी कई क्षेत्रों में डिलीवरी के बाद महिलाओं को एक अलग कमरे में रखा जाता है, ताकि शारीरिक और मानसिक तौर पर उन्हें पर्याप्त आराम मिल सके। तो चलिए देर किस बात की है, आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के अनुसार, डिलीवरी के बाद महिलाओं को क्या करना चाहिए (Ayurvedic guide for new mothers postnatal care) और क्या नहीं करना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार डिलीवरी के बाद क्या करना चाहिए

हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ के एक्सपर्ट कहते हैं कि आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद समय को सूतिका काल कहा गया है। कुछ जगहों पर इसे जापा भी कहा जाता है।

1. पौष्टिक आहर लें

आयुर्वेद कहता है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं का शरीर रिकवरी मोड पर चला जाता है। इस दौरान हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला भोजन ही खाना चाहिए। डिलीवरी के बाद 40 से 45 दिन तक मूंग दाल, घी, सूप, खिचड़ी, अजवाइन, सौंठ, मेथी जैसे मसाले खाने की सलाह दी जाती है। इस प्रकार का भोजन पाचन क्रिया को सुधारता है और शरीर की रिकवरी के लिए ताकत देता है।

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गुनगुना पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं।

2. गर्म पानी पिएं

आमतौर पर महिलाएं ठंडा पानी पीती हैं। लेकिन आयुर्वेद डिलीवरी के बाद महिलाओंको गुनगुना पानी पीने की सलाह देता है। गुनगुना पानी पाचन तंत्रिका को बेहतर बनाकर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

3. अभ्यंग मालिश

डिलीवरी के दौरान महिलाओं को कई हड्डियां टूटने जैसा दर्द होता है। इस दर्द से रिकवरी के लिए आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद तेल से मालिश बहुत जरूरी मानी गई है। डिलीवरी के बाद तिल और सरसों के तेल से मालिश करने से कमजोर पड़ी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और यह दर्द को कम करता है।

4. योग और प्राणायाम

डिलीवरी के बाद 20 से 25 दिन का समय खत्म हो जाए, तब महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बाद हल्के योग और प्राणायाम शुरू करना चाहिए। योग और प्राणायाम करने से शरीर की ताकत बढ़ती है।

5. पेट बांधना (Belly Binding)

डिलीवरी के बाद पेट की बढ़ी हुई मांसपेशियों को कम करने के लिए आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद पेट बांधने की परंपरा है। पेट पर बेल्ट, सूती का कपड़ा बांधने से पेट आसानी से अंदर चल जाता है। आयुर्वेद कहता है कि डिलीवरी के बाद पेट बांधने से गर्भाशय जल्दी सामान्य होने लगता है।

आयुर्वेद के अनुसार डिलीवरी के बाद क्या नहीं करना चाहिए

  1. आयुर्वेद के अनुसार, डिलीवरी के बाद कम से कम 1 साल तक महिलाओं को ठंडी चीजें जैसे ठंडा पानी, आइसक्रीम और फ्रिज का खाना नहीं खाना चाहिए। इससे शरीर का वात दोष बढ़ता है। इससे कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।
  2. डिलीवरी के बाद शरीर रिकवरी मोड में चला जाता है। ऐसे में ज्यादा मसालेदार और तैलीय खाना पाचन को खराब कर सकता है। इससे गैस, कब्ज और कमजोरी बढ़ सकती है। इसलिए इस प्रकार का खाना डिलीवरी के बाद खाने से बचना चाहिए।
  3. डिलीवरी के बाद मां को किसी प्रकार का मानसिक तनाव नहीं लेना चाहिए। मानसिक तनाव मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। महिला के मानसिक तनाव से दूध की गुणवत्ता और मात्रा कम हो सकती है।
  4. डिलीवरी के बाद सही रिकवरी हो सके, इसके लिए रोजाना 8 से 10 घंटे की नींद लेना जरूरी है। दरअसल, नींद की कमी से शरीर की रिकवरी धीमी हो जाती है। नींद की कमी से शारीरिक थकान, दर्द की समस्या हो सकती है।

आपकी भी हाल फिलहाल में डिलीवरी हुई है, तो ऊपर बताए गए नियमों का पालन जरूर करें।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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