
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 6, 2024 8:15 PM IST
Ways Ayurveda Can Help Manage Diabetes: डायबिटीज की बीमारी के मरीजों की संख्या में तेजी से हो रहा इजाफा दुनियाभर में चिंता का विषय बनी हुई है। लेटेस्ट आंकड़ों की बात करें तो दुनियाभर में लगभग 246 मिलियन (24 करोड़) से अधिक लोग डायबिटीज की बीमारी के साथ जीवन बिता रहे हैं। वहीं, अनुमान ऐसा है कि साल 2025 में यह आंकड़ा 380 मिलियन (38 करोड़) तक पहुंच जाएगा। डायबिटीज की बीमारी ना केवल लोगों के जीवन पर असर डालती है बल्कि यह दुनियाभर में स्वास्थ्य संकट को बढ़ा रहा है।
एलोपैथी से डायबिटीज का इलाज करते हुए मरीज को इंसुलिन देने और दवाओं की मदद ली जाती है। हालांकि, इन तरीकों की मदद से डायबिटीज को मैनेज करते समय अक्सर बीमारी के मुख्य कारणों (underlying causes of the disease) को समझ पाना और उसका इलाज कर पाना मुश्किल हो जाता है। डॉ. गोविंदराजन (Dr. Govindarajan, Chief Innovation Officer, Kapiva) के अनुसार, आयुर्वेद में डायबिटीज की बीमारी को मैनेज करने के लिए (managing their diabetes more effectively and naturally) मरीज को व्यक्तिगत स्तर पर इस बात में सक्षम बनाने की कोशिश की जाती है कि वह अपनी बीमारी को आसानी से मैनेज कर सकें। आयुर्वेद उन लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है जो अपनी बिगड़ी हुई हेल्थ को दोबारा ठीक करना (reclaim their health and) चाहते हैं और एलोपैथी या अंग्रेजी दवाओं का सेवन (reduce their dependence on medications) कम करना या पूरी तरह से बंद करना चाहते हैं।
डॉ. गोविंदराजन आयुर्वेद उन नियमों के बारे में बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप डायबिटीज में दवाओं की जरूरत कम कर सकते हैं।
आयुर्वेद में आपके आहार को ही आपकी सबसे पहली दवा माना जाता है। डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए आयुर्वेद में जिस तरह के आहार या डाइट की सलाह दी जाती है उसमें लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (low glycemic index) वाले फूड्स का सेवन महत्वपूर्ण है। लो जीआई वाले फूड्स ग्लूकोज को खून में तेज गति से घुलने से रोकते हैं जिससे ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से नहीं बढ़ता।
साबुत अनाज (Whole grains), सब्जियां ( vegetables), किनवा ( Quinoa), जौ ( Barley), बेरीज (Berries), चने ( Chickpeas), नट्स और सीड्स ( nuts & seeds), हरी पत्तेदार सब्जियां ( Leafy Greens) और दालें (legumes)
आयुर्वेद मे शरीर की प्रकृति या दोष को संतुलित करने की सलाह दी जाती है। शरीर में वात, पित्त और कफ दोष को संतुलित करने से आपको डायबिटीज के लक्षणों को कम करने में भी मदद हो सकती है।
इसके साथ ही आसानी से डायबिटीज मैनेज करने के लिएआपको अपने भोजन का समय भी तय करना होगा। इसी के साथ दिन के समय आपको हेवी और रात में बहुत हल्का मील लेने की सलाह दी जा सकती है।
आयुर्वेद में दिनचर्या और विहार या लाइफस्टाइल में बदलाव करके डायबिटीज को मैनेज करने के प्रयास किए जा सकते हैं। लाइफस्टाइल से जुड़े कुछ ऐसे ही नियम ये हैं-
समय पर खाना (timely meal times)
अच्छी नींद सोना ( sufficient sleep) और,
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना।
इन नियमों की मदद से शरीर का रिदम और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ायी जा सकती (enhance their insulin sensitivity) है। जिससे ब्लड शुगर लेवल भी आसानी से नियंत्रितकिया जा सकता है।
आयुर्वेदिक पद्धति से की गयी पंचकर्म थेरेपी की मदद से शरीर में जमा टॉक्सिंस या अम पदार्थों को साफ करने में मदद हो सकती है। शरीर से हानिकारक तत्व साफ हो जाने से शरीर के अंगों का कार्य भी तेज हो सकता है और आप स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
आयुर्वद में कुछ फलों, मसालों और सब्जियों को डायबिटीज के लक्षणों की गम्भीरता कम करने के लिहाज से कारगर पाया गया है। आप इन चीजों का सेवन कर सकते हैं-
आंवला ( Amla or Indian Gooseberry) शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है।
करेला ( Karela or Bitter Gourd) में कैरेंटिन (charantin) नामक तत्व पाया जाता है जो ब्लड शुगर लेवल को कम करने का काम करता है।
नीम (Neem) इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है।
हल्दी (turmeric) में सूजन कम करने वाले तत्व (anti-inflammatory) पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर लेवल कम करते हैं।
मेथी दाने (Fenugreek seeds) रक्त में शुगर के लेवल को कम करते हैं और इंसुलिन रिस्पॉन्स भी सुधारते हैं।