आठ घंटे की नींद लेने के बाद भी क्यों महसूस होती है थकान? आयुर्वेद एक्सपर्ट से जानें

Tiredness after waking up: समस्या यह नहीं है कि आप कितनी देर सोते हैं, बल्कि यह है कि आपका शरीर चुपचाप ठीक होने की अपनी क्षमता खो चुका है। जिसके बारे में प्राचीन भारतीय जड़ी-बूटी चिकित्सा सदियों से बात कर रही है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 11, 2026 9:33 AM IST

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Medically Verified By: Mr. Shafiulla Hirehal Nuruddin

Subah Uthne par thakan mehsus hona: बहुत से भारतीय इस एहसास को अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन ज्यादातर इसे असली समस्या नहीं मानते। हम रात के समय, तनाव और मौसम को दोष देते हैं और ऊपर से भी चाय पीते हैं। दिन में काम पूरा न हो पाने के कारण रात के समय में ही अपने काम में जुट जाते हैं। हम इस बात को चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं कि सुबह ऐसा ही महसूस होता है। लेकिन आयुर्वेद इसके बारे में अलग सोचता है। ग्रीनस्‍पेस हर्ब्‍स एंड क्‍वॉन्‍टम आयुर्वेदा के फाउंडर शफीउल्ला हीरेलाल नूरुद्दीन के अनुसार आयुर्वेद कहता है कि सुबह उठते ही यह थकान कोई व्यक्तित्व की खासियत या नौकरी का खतरा नहीं है। यह एक संकेत है। और शरीर के सभी संकेतों की तरह, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि समझना चाहिए।

सुबह की स्थिति में बारे में क्‍या कहता है आयुर्वेद

प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, सबसे अच्छा तरीका जागने का यह है कि आप स्वाभाविक रूप से सतर्क हों, शरीर पूरी तरह आराम किया हुआ हो, मन साफ हो और नींद के बाद प्राण (जीवन ऊर्जा) पूरी तरह भर चुका हो। आयुर्वेद कहता है कि ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से एक घंटे पहले का समय, रिस्टोरेशन का सबसे पवित्र समय होता है। लोगों का मानना है कि यही वह समय है जब रिस्टोरेशन स्वाभाविक रूप से सबसे चरम पर होता है।

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सुबह की कमजोरी को मामूली न समझें

अगर आप सुबह सोकर उठने के बाद भारीपन, सुस्ती, थकान या दिमाग में भारीपन (धुंधलापन) महसूस करते हैं, तो आयुर्वेद की नजर में यह कोई मामूली बात नहीं है। आयुर्वेद कहता है कि यह शरीर में कुछ गड़बड़ होने का संकेत है। अक्सर ऐसा तब होता है जब शरीर में कफ बढ़ जाता है, वात का संतुलन बिगड़ जाता है, या फिर शरीर के अंदर विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं जिसे ‘आम’ कहा जाता है।

आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है ‘आम’, जिसका मतलब है अपचित पदार्थ का शरीर में जमा होना। यह सिर्फ भोजन से नहीं, बल्कि अनसुलझे तनाव, पर्यावरण के विषाक्त पदार्थों, अनियमित दिनचर्या और दबी हुई भावनाओं से भी बनता है।

जब आम शरीर की नालियों (स्रोतास) में जमा हो जाता है, तो शरीर भारी और सुस्त लगने लगता है। चाहे आप कितनी भी नींद ले लें, यह थकान नहीं जाती। समस्या नींद की मात्रा की नहीं, बल्कि रिस्टोरेशन की गुणवत्ता की है।

आज जैसे आधुनिक भारतीय जी रहे हैं, वह हमें नुकसान पहुंचा रहा है

जीवनशैली की खराब आदतें

देर रात तक स्क्रीन से चिपके रहना, समय पर खाना न खाना या जल्दबाजी में कुछ भी खा लेना जैसे पैकेट बंद यानी प्रोसेस्ड फूड्स। आयुर्वेद के हिसाब से ऐसे खाने में 'प्राण' यानी वह ताजगी और जीवन शक्ति नहीं होती जो ताजे खाने में मिलती है। इसके अलावा, दिन भर का हल्का-हल्का तनाव हमारे शरीर में कोर्टिसोल को रात भर बढ़ाए रखता है, जिससे शरीर को आराम नहीं मिल पाता। साथ ही, शहरों की प्रदूषित हवा हमारे फेफड़ों और लिवर पर बोझ बढ़ा देती है। ये कोई कभी-कभार होने वाली बातें नहीं, बल्कि आज हम सबकी रोज की जिदगी का हिस्सा बन गई हैं।

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आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य का मूल आधार अग्नि, यानी पाचन और मेटाबॉलिज्म की आग धीरे-धीरे कमजोर होती चली जाती है। जब अग्नि कमजोर होती है, तो भोजन पूरी तरह पोषण में नहीं बदल पाता। आराम पूरी तरह ऊर्जा में नहीं बदल पाता। हर सुबह आप उतनी ऊर्जा के साथ नहीं उठते, जितनी आपको जजरूरत होती है।

जड़ी-बूटियों का पता है कि क्या करना है

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की सबसे बड़ी बात यही है कि ये पौधे कोई सौ-दौसो साल पहले खोजी हुई कोई टेक्नोलॉजी नहीं है, बल्कि हजारों सालों पहले खोजी, देखी, परखी और समय-समय पर सुधारी गई औषधि है। जिसे भारत में पीढ़ी दर पीढ़ी इस्तेमाल किया गया अलग-अलग तरह के शरीरों और भारतीय उपमहाद्वीप की अनोखी जिंदगी की चुनौतियों के बीच काम किया है। इसलिए इन जड़ी-बूटियों और चिकित्सा पद्धतियों को पहले से ही पता था, कि रात को होने वाली इन समस्याओं से कैसे निपटना है।

सुबह की थकान के लिए खास जड़ी-बूटियां

1. अश्वगंधा

अश्वगंधा एक एडाप्टोजेन है, यानी यह शरीर को उसके अपने तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसका नाम घोड़े की शक्ति से आया है। आधुनिक विज्ञान ने भी पुष्टि कर दी है जो आयुर्वेद बहुत पहले से जानता था यह कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, नींद की गुणवत्ता और गहराई बढ़ाता है, और सिर्फ़ उत्तेजना देने के बजाय शरीर की ऊर्जा भंडार को फिर से भरता है। जो लोग लंबे समय के तनाव और नर्वस थकान से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह बहुत जरूरी है।

2. शतावरी

शतावरी रस धातु को वह सब वापस लौटती है जो खो गया है। रस धातु आयुर्वेद के अनुसार प्लाज्मा और लिम्फ टिश्यू है, जो शरीर की मुख्य ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। यह अंदर से नमी और जीवंतता की भावना लौटाती है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है लेकिन जब महसूस होती है तो बहुत साफ लगता है। यह मुख्‍य रूप से महिलाओं के लिए फायदेमंद है जिनमें होने वाले हार्मोनल बदलाव थकान को बढ़ावा देते हैं।

3. ब्राह्मी

ब्राह्मी उस दिमागी थकान के लिए एक बेहतरीन दवा है, जब सुबह उठकर आपको सब कुछ धुंधला-धुंधला सा लगता है और दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता। कभी-कभी ऐसा होता है कि शरीर तो बिस्तर से उठ जाता है, लेकिन मन अभी भी सुस्ती में ही रहता है, ब्राह्मी इसी स्थिति को ठीक करती है। यह न सिर्फ गहरी और अच्छी नींद लाने में मदद करती है, बल्कि मानसिक थकान को भी दूर करती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह बिना किसी झटके या नुकसान के, धीरे-धीरे आपके दिमाग को तेज और सजग बनाती है।

4. गिलोय (गुडूची)

संस्कृत में गिलोय को गुडूची कहा जाता है, जिसका अर्थ है “अमृत” यानी अमरता का रस। यह आम को साफ करने के स्तर पर काम करता है। यह लिवर और इम्यून सिस्टम को उन विषाक्त पदार्थों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है जो शरीर में जमा होकर भारीपन और थकान पैदा करते हैं। आज के समय में जब पर्यावरण और हमारे भोजन में बहुत अधिक टॉक्सिन्स हैं, तो गिलोय शायद पहले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

क्या है आयुर्वेद का उद्देशय

क्वॉन्टम आयुर्वेदा के फाउंडर शफीउल्ला हीरेलाल नूरुद्दीन ने आगे बताया कि हम शरीर को जबरदस्ती जगाने की कोशिश नहीं कर रहे। हम उसे गहरी नींद लेने, पूरी तरह रिकवर करने और सच में तरोताजा होकर उठने की अपनी प्राकृतिक क्षमता वापस लौटाने में मदद कर रहे हैं।

आयुर्वेद का असली उद्देश्य हमेशा से शरीर को लचीला और सेहतमंद बनाए रखना है। इसका मतलब यह है कि आपको सुबह जागने के लिए किसी चाय, कॉफी या बाहरी सहारे की जरूरत न पड़े। बल्कि, आप कुदरती तौर पर भरपूर जोश और असली ऊर्जा के साथ उठें, ताकि आपका पूरा दिन ताजगी से भरा रहे।

अगर आप हर रोज थके-थके उठते हैं, तो कृपया इसे सामान्य न समझें। इस पर ध्यान दें। सुनें कि आपका शरीर क्या कह रहा है। और यह भी सोचें कि क्या हजारों सालों से भारतीयों को स्वस्थ रखने वाली जड़ी-बूटियां और प्राचीन ज्ञान आपकी भी मदद कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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