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Written By: Atul Modi | Published : August 9, 2023 7:03 PM IST
हृदय से जुड़ी बीमारियां एक वैश्विक समस्या है। आजकल आए दिन हृदय रोगों से अचानक होने वाली मौतें बहुत ही आम होती जा रही है। अधिकांश लोग एलोपैथी की दवाइयां भी ले रहे होते हैं उसके बावजूद हृदय संबंधी रोगों की समस्याएं बनी रहती हैं। जबकि आयुर्वेद में वैकल्पिक चिकित्सा के तौर पर तमाम आयुर्वेदिक औषधियां मौजूद हैं जिससे हृदय रोगों की समस्याएं न सिर्फ नियंत्रित रहती हैं बल्कि लोग ठीक भी हो जाते हैं। हृदय रोगों में अर्जुन की छाल एक महत्वपूर्ण औषधि है जो हृदय से जुड़ी बीमारियों में लाभप्रद है। यह हाई और लो ब्लड प्रेशर, धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल का जमाव, ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना और हार्ट ब्लॉकेज जैसी समस्याओं में बहुत ही कारगर औषधि है।
अर्जुन एक औषधीय वृक्ष है जिसकी छाल को पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है खासतौर से हृदय रोग में इसकी उपयोगिता सबसे ज्यादा है। ज्यादातर आयुर्वेदाचार्य हृदय रोगियों को अर्जुन की छाल का काढ़ा, सिरप, चूर्ण या गोलियों के रूप में रोगियों को देते हैं। हृदय रोगों में अर्जुन की छाल के क्या क्या फायदे हैं आइए विस्तार से जानते हैं:
आयुर्वेद के अनुसार, अर्जुन की छाल ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम को मजबूत बनाता है जिससे पूरे शरीर में रक्त का संचार बेहतर तरीके से होता है और हृदय रोग में किसी प्रकार के जोखिम की संभावना कम हो जाती है। शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर रहने से प्रत्येक अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह भी बेहतर रहता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है।
अर्जुन की छाल का सेवन करने से खराब हो रहे हृदय के ऊतक फिर से जीवंत होने लगते हैं। इसके अलावा हृदय की मांसपेशियां भी स्वस्थ होने लगती हैं और अपने कार्यों को सही तरीके से कर पाते हैं। हृदय की मांसपेशियों का मजबूत होना बहुत आवश्यक होता है।
जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की समस्या है उनके लिए भी अर्जुन की छाल एक बेहतरीन औषधि है यह धमनियों में जमा गंदे कोलेस्ट्रॉल को निकाल कर बाहर कर देता है यहां तक कि हार्ट ब्लॉकेज में भी यह बहुत ही कारगर है।
अर्जुन का उपयोग पारंपरिक रूप से इमोशनल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है यह दुख और उदासी का अनुभव करने वाले लोगों के मन को संतुलित करता है साथ ही साथ इच्छा शक्ति को भी बढ़ता है।