Gestational Hypertension: प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के 10 नेचुरल उपाय
High Blood Pressure In Pregnancy In Hindi: यहां कुछ आयुर्वेदिक सुझाव दिए गए हैं जो प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर को रोकने और प्रबंधित करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
Written by Atul Modi|Published : December 16, 2022 7:54 PM IST
मायो क्लिनिक के अनुसार, जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (Gestational Hypertension) वह होता है, जब महिलाओं में गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure In Pregnancy) की समस्या विकसित होती है। इस दौरान यूरिन में किसी भी तरह का एक्स्ट्रा प्रोटीन नहीं होता है और ना ही किसी तरह के ऑर्गन डैमेज होने के लक्षण होते हैं। लेकिन कुछ मामलों में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन प्रीक्लेम्पसिया का कारण (Preeclampsia Causes) बन सकते हैं। प्रीक्लेम्पसिया तब होता है जब प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर विकसित होता है, यह शरीर के अलग-अलग अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार यह मां और बच्चे के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर देते हैं। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान उच्च रक्तचाप का उपचार करना बहुत जरूरी होता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीक्षा भावसारने प्रेगनेंसी के दौरान उच्च रक्तचाप (जेस्टेशनल हाइपरटेंशन) से निपटने के लिए कुछ आयुर्वेदिक सुझाव दिए हैं, जो आपकी मदद करेंगे। आइए जानते हैं।
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प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के 10 उपाय - (Natural Remedy For High Blood Pressure In Pregnancy)
प्रेगनेंसी के दौरान अगर आप सफेद नमक का सेवन कर रही हैं तो आपको सेंधा नमक की तरफ स्विच करने की जरूरत है। इस दौरान अत्यधिक नमक और चीनी वाले पैकेज्ड फूड से बचें।
सुबह या शाम के समय 30 मिनट के लिए घास पर चलने का अभ्यास करें। यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
रोजाना कम से कम 15 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम और 10 मिनट भ्रामरी प्राणायाम जबकि 11 बार ॐ का जाप करना हाई ब्लड प्रेशर में फायदेमंद हो सकता है।
सुबह उठने के बाद और सोने से 1 घंटे पहले तक अपने मोबाइल फोन या किसी भी तरह के डिवाइस से दूर रहें।
आप किसी योग ट्रेनर की मदद से प्रतिदिन प्रेगनेंसी के दौरान किए जाने वाले योगाभ्यास का प्रयास करें।
दिन में कम से कम 3 बार घर का बना ताजा भोजन करें।
अपने आहार में पोटेशियम और मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ खासकर फल और सब्जियों को शामिल करें।
मौसमी फलों का नियमित सेवन करें।
सर्दियों में प्रतिदिन कम से कम एक आंवला फल जरूर खाएं यह मतली और कब्ज में फायदेमंद है।
कैफीन युक्त पेय पदार्थ, धूम्रपान, शराब और चीनी युक्त सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने से बचें।
सोने से पहले कुछ समय किसी आध्यात्मिक पुस्तक को पढ़कर अपने दिन का समापन करें और खुद को शांति प्रदान करें।
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