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Written By: Anshumala | Updated : March 30, 2020 4:34 PM IST
यदि आपका बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है, तो उसकी देखभाल में लापरवाही इस समस्या को और भी ज्यादा गंभीर बना सकती है। © Shutterstock
World Autism Awareness Day 2020 : दुनिया भर में 2 अप्रैल को 'वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे 2020' के तौर पर मनाया जाता है। ऑटिज्म बच्चों में होने वाली एक मानसिक विकार है, जो जन्म के बाद से तीन साल के अंदर नजर आने लगता है। यदि आपका बच्चा ऑटिज्म (Autism) से पीड़ित है, तो उसकी देखभाल में लापरवाही इस समस्या को और भी ज्यादा गंभीर बना सकती है। ऐसे बच्चों को प्यार, धैर्य और शांत मन से देखभाल की जरूरत होती है। जानें, किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए पेरेंट्स को जब वे ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे की देखभाल करते हैं। कैसे आप अपने ऑटिस्टिक बच्चे (Autistic child care tips) की मन की बात को समझकर उसे इस बीमारी से उबरने में मदद कर सकते हैं।
ऑटिज्म से पीड़ित (Autistic child care tips) बच्चे जल्दी दूसरों से बात नहीं करते। उनके साथ मिलने-जुलने में खुद को असहज महसूस करते हैं। ऐसे में पेरेंट्स अपनी तरफ से अधिक प्रयास करें। अपने ऑटिस्टिक बच्चे की तारीफ करें। उसे प्राइज के रूप में कोई गिफ्ट दें। इससे वो आपके करीब आएंगे और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
ऑटिस्टिक बच्चे की परवरिश आसान नहीं यह बात सभी समझते हैं, लेकिन उम्मीद न छोड़ें। आपके उम्मीद छोड़ने का सबसे बड़ा और बुरा असर बच्चे पर होगा। ऑटिज्म को यदि कम उम्र में सही ट्रीटमेंट व ध्यान न मिले तो बड़े होने पर बच्चे के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं क्योंकि बाहरी दुनिया में उन्हें हर जगह स्पेशल सपॉर्ट नहीं मिलेगा।
जब आपको यह पता चल जाता है कि आपके बच्चे को ऑटिज्म है, तो उसे रेगलुर डॉक्टर के पास ले जाएं। काउंसलिंग करवाएं। इससे आपको समझने में मदद मिलेगा कि ऑटिस्टिक चाइल्ड का विकास कैसा हो रहा है। आप बतौर पेरेंट्स कहीं कोई गलत तरीका तो नहीं अपना रहे हैं। एक काउंसलर आपको अपने ऑटिस्टिक चाइल्ड के साथ बेहतर ढंग से पेश आने के टिप्स बताता है।
मंदबुद्धि और आटिज्म में क्या अंतर है ?
ऑटिस्टिक बच्चे कहीं भी भीड़-भाड़ वाली जगहों या लोगों से मिलने-जुलने से कतराते हैं। बावजूद इसके, उन्हें बाहर घुमाने-फिराने ले जाएं। इससे उनके अंदर भीड़ में जाने का डर कम होने लगेगा। उन्हें पार्क ले जाएं। दूसरे बच्चों के साथ पार्क में खेलेंगे तो घुलने-मिलने में आसानी होगी।
ऑटिस्टिक बच्चों से बातें करें। उन्हें अकेला ना छोड़ें। अपनी हर बात में उसे शामिल करें। इससे वो अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां कर सकेंगे। हां, उन पर किसी भी तरह का दबाव ना डालें। उनके साथ सहज बने रहने की कोशिश करें। उन्हें डांटने से बचें। उन पर इर्रिटेट ना हों, इससे उन पर उल्टा असर होगा। वह बोलने की बजाय और शांत स्वभाव का हो जाएगा।
यदि आपके आस-पास या आपके बच्चे के स्कूल में किसी और बच्चे को ऑटिज्म है, तो उसके पेरेंट्स से भी आप जरूर मिलें। उनसे मिलकर जानने की कोशिश करें कि उनके बच्चे को क्या परेशानियां होती हैं। लक्षण क्या नजर आते हैं। कैसे वो अपने बच्चे को हैंडल करते हैं। ऐसा करने से आपको यह पता चलेगा कि दूसरे पेरेंट्स इस स्थिति का सामना कैसे कर रहे हैं। कैसे वो अपने ऑटिस्टिक चाइल्ड की केयर कर रहे हैं। इससे आपको काफी एक्सपीरियंस होगा कि कैसे दूसरे पेरेंट्स अपने बच्चे की देखभाल कर रहे हैं। शायद, इससे आपके बच्चे की देखभाल पहले से और भी ज्यादा बेहतर तरीके से हो सके।
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