World Autism Awareness Day 2020 : क्या है वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे, ऑटिज्म रोग और लक्षण

2 अप्रैल को 'विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2020' (world autism awareness day 2020) मनाया जाता है। ऑटिज्म बच्चों में होने वाला एक मानसिक विकार है। इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में 2 अप्रैल के दिन को ‘विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस’ घोषित किया था।

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Written By: Anshumala | Published : March 29, 2020 2:13 PM IST

पूरी दुनिया भर में 2 अप्रैल को 'विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2020' (world autism awareness day 2020) मनाया जाता है। ऑटिज्म बच्चों में होने वाला एक मानसिक विकार है। इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में 2 अप्रैल के दिन को ‘विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस’ घोषित किया था। पूरी दुनिया में बच्चों में होने वाली इस मानसिक विकार को रोकने, जागरूक करने, उनके जीवन में सुधार लाने के लिए कई तरह के महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते हैं। 'वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे' का उद्देश्य उन बाधाओं पर एक स्पॉटलाइट डालना है, जो ऑटिज्म से पीड़ित लोगों के रास्ते में आती है। जानें, 'विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2020' (world autism awareness day 2020 in hindi) पर इस बीमारी के बारे में यहां...

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क्या है ऑटिज्म रोग (What is autism) 

ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो बोलने, लिखने, दूसरों के साथ व्यवहार करने की क्षमता को बाधित कर देता है। इसे ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहते हैं। इसमें अलग-अलग बच्चों में अलग-अलग लक्षण नजर आते हैं। इसमें कोई बच्चा बहुत तेज, कुशाग्र बुद्धि का होता है, तो कोई दिमाग से कमजोर होता है। किसी को सीखने-समझने में परेशानी होती है, तो किसी को व्यवहार संबंधित समस्याएं आती हैं। ऐसे बच्चों की केयर करते वक्त कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ऑटिज्म होने पर बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास पूरी तरह से रुक जाता है।

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क्या होते हैं ऑटिज्म के लक्षण (Symptoms of autism)

ऑटिज्म से लक्षण बच्चे के जन्म के तीन साल के अंदर नजर आने लगते हैं। इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं...

– बच्चे न तो अपनी मां और ना ही अपने आस-पास मौजूद लोगों के हावभावों के प्रति कोई प्रतिक्रिया देते हैं। नजरें मिलाने से भी कतराते हैं।

– आवाज सुनने के बावजूद प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

– ऐसे बच्चों में भाषा संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

– बच्चे खुद में ही खोए रहते हैं।

– बच्चा बोलने की बजाय अजीब-अजीब सी आवाजें निकाले, तो इसे नजरअंदाज न करें।

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