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World Autism Awareness Day 2020 : क्या ऑटिज्म सिर्फ बच्चों को होता है? जानें, ऑटिज्म से जुड़े कुछ मिथक

2 अप्रैल को ‘विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2020’ (world autism awareness day 2020) मनाया जाता है। अधिकतर लोगों को लगता है कि ऑटिज्म सिर्फ बच्चों को होने वाली मानसिक बीमारी है, पर ऐसा नहीं है। जानें, ऑटिज्म से संंबंधित कुछ ऐसे ही भ्रम या मिथकों के बारे में यहां...

Written By Anshumala
Updated : March 31, 2020 6:46 PM IST

According to experts, signs of autism usually appear by age 2 or 3.

पूरी दुनिया भर में 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2020’ (world autism awareness day 2020) मनाया जाता है। ऑटिज्म मानसिक या एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो बोलने, लिखने, दूसरों के साथ व्यवहार करने की क्षमता को बाधित कर देता है। इसे ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहते हैं। ज्यादातर यह बच्चों में होता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है।इसके लक्षण हर बच्चे में अलग-अलग नजर आते हैं। अधिकतर लोगों को लगता है कि यह मानसिक डिसऑर्डर बच्चों को अधिक होता है। ऐसे ही कई मिथ या भ्रम इस रोग (autism myths in hindi) को लेकर समाज में व्याप्त हैं।

अक्सर लोग ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को मंदबुद्धि मानते हैं और सोचते हैं कि ये कभी भी ठीक नहीं हो सकते हैं। यह भी एक भ्रम ही है। जानें, ऑटिज्म संबंधित समाज में व्याप्त भ्रम या मिथकों (myths associated with autism in hindi) के बारे में यहां, जो पूरी तरह से सच नहीं हैं।

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ऑटिस्टिक मरीजों को देखकर आसानी से पहचान सकते हैं

अधिकतर लोग ये सोचते हैं कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को देखकर ही पहचाना जा सकता है। ऐसा लोग कुछ लक्षणों जैसे- आंखें टेढ़ी-तिरछी बनाते रहना, हाथों को हिलाते रहना, सीधे और स्थिर ना खड़ा होना जैसे लक्षणों को देखकर समझ जाते हैं कि ये ऑटिज्म से पीड़ित बच्चा या व्यक्ति है। लेकिन कई ऐसे भी शारीरिक हाव-भाव होते हैं ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में जिसे आप देखकर नहीं कह सकते हैं कि ये बीमार है। वो लक्षण हैं बातें करते समय रुकना, अटकना या हकलाना, भाषा या किसी भी चीज को सीखने-समझने में समय लगाना, लोगों को अपनी बात और दूसरों की बातों को जल्दी न समझ पाना, हर समय अकेले या खोया रहना, चिंतित और परेशान नजर आना।

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कम उम्र में ही पता चल जाता है ऑटिज्म है या नहीं 

अधिकतर लोग यही समझते हैं कि ऑटिज्म से बीमार बच्चे को आसानी से देख कर समझ सकते हैं कि ये ऑटिस्टिक चाइल्ड है या नहीं। दरअसल, लोग ऐसा इसलिए सोचते हैं, क्योंकि कुछ बच्चों का व्यवहार दूसरे बच्चों से काफी शांत और अलग होता है। कई बार जब बच्चे 10 साल के हो जाते हैं, तब उनमें ऑटिज्म के लक्षण नजर आते हैं। बचपन में अधिकतर बच्चों की हरकतें, एक्टिविटीज एक जैसी ही होती हैं, इसलिए यह कहना गलत होगा कि कम उम्र के बच्चे जो थोड़ा अलग व्यवहार करते हैं, वो ऑटिस्टिक ही हों।

बच्चों को ही होता है ऑटिज्म

ऐसा भी नहीं है कि ऑटिज्म के शिकार सिर्फ बच्चे ही होते हैं। जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि यह एक मानसिक डिसऑर्डर है। मानसिक समस्याएं किसी भी उम्र में किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं। कुछ लोगों को युवावस्था में भी ऑटिज्म के लक्षण (Symptoms of autism) नजर आने लगते हैं।

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