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Written By: Anshumala | Published : April 2, 2019 10:28 AM IST
आज है ''वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे''। जानें इस बीमारी के कारण और लक्षण। © Shutterstock
आज है ''वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे 2019''। आपने कहीं ना कहीं कई ऐसे बच्चों को देखा होगा जो किसी भी तरह की आवाज को सुनने के बाद ना तो खुश होते हैं, ना हंसते हैं और ना ही कोई जवाब देते हैं। किसी के चेहरे के हावभाव को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। ऐसे बच्चे अक्सर दूसरे बच्चों की तुलना में बहुत ज्यादा शांत और चुप रहते हैं। अपनी दुनिया में ही खोए रहते हैं। ऐसे बच्चे दरअसल, ऑटिज्म से ग्रस्त होते हैं। यदि आपके बच्चे में भी जन्म के कुछ ही महीनों बाद से ऐसे लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से जरूर मिलें।
क्या है ऑटिज्म ?
ऑटिज्म तंत्रिका और विकास से संबंधित एक प्रकार का डिसऑर्डर होता है। सामान्य शब्दों में कहें तो यह एक मानसिक बीमारी है। बच्चों में इसके लक्षण जन्म लेने के तीन-चार महीने के बाद से लेकर तीन वर्ष की आयु में नजर आने लगते हैं। जो बच्चे ऑटिज्म से पीड़ित होते हैं, उनमें लक्षण अलग-अलग नजर आ सकते हैं। ऑटिज्म होने पर बच्चों शारीरिक और मानसिक विकास पूरी तरह से रुक जाता है। समय रहते इन लक्षणों को पहचानकर इलाज कराना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार गर्भावस्था के दौरान खानपान सही न होने की वजह से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।
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रुक जाता है विकास
इस रोग से पीड़ित बच्चों का विकास अन्य नॉर्मल बच्चों की तुलना में धीरे होता है। इसमें बच्चे का मानसिक विकास रुक जाता है। ऐसे बच्चे समाज में घुलने-मिलने में हिचकते हैं। वे प्रतिक्रिया देने में काफी समय लेते हैं और कुछ में ये बीमारी डर के रूप में दिखाई देती है।
क्या होते हैं ऑटिज्म के लक्षण
- बच्चे न तो अपनी मां और ना ही अपने आस-पास मौजूद लोगों के हावभावों के प्रति कोई प्रतिक्रिया देते हैं। नजरें मिलाने से भी कतराते हैं।
- आवाज सुनने के बावजूद प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।
- ऐसे बच्चों में भाषा संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।
- बच्चे खुद में ही खोए रहते हैं।
- बच्चा बोलने की बजाय अजीब-अजीब सी आवाजें निकाले, तो इसे नजरअंदाज न करें।
ज्ञान मुद्रा के अभ्यास से बच्चों में इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।
योग मुद्रा से होता है लाभ
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में यदि उपरोक्त लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से संपर्क करने के साथ ही आप योग मुद्रा का भी सहारा ले सकते हैं। इसके लक्षणों पर कंट्रोल रखने के लिए पेरेंट्स अपने बच्चे को प्रतिदिन ज्ञान मुद्रा का अभ्यास करवाएं। ज्ञान मुद्रा ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए लाभदायक होता है। योगाचार्य डॉ. अनुज कुमार का कहना है कि ज्ञान मुद्रा मस्तिष्क के ज्ञान-तंतुओं को सक्रिय करती है। यह मुद्रा मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि और पीनियल ग्रंथि को प्रभावित करती है। इससे स्मरण-शक्ति बढ़ती है। नकारात्मकता दूर होती है। बुद्धि का विकास होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यह मुद्रा छठी इन्द्रिय को सक्रिय करती है, इसलिए रचनात्मकता बढ़ाने के साथ ही आध्यात्मिक उन्नति में भी कारगर है। इससे शान्ति का अनुभव होता है।
यूं करें ज्ञान मुद्रा- हालांकि, ऐसे बच्चे इसका अभ्यास तुरंत नहीं करना शुरू कर दें। इसके लिए आपको काफी कोशिश करनी होगी। अपने बच्चे के साथ बैठ जाएं। अब कोशिश करें उसके अंगूठे और तर्जनी के अग्र भागों को मिलाने की। बाकी की उंगलियों को सीधा रखें। धीमी, लंबी एवं गहरी सांस लेने के लिए बोलें। यदि 15 मिनट के लिए हर दिन बच्चा चार बार आपकी मदद से करेगा, तो उसे मानसिक रूप से काफी लाभ होगा। आप अपने बच्चे को इस तरह की मानसिक बीमारी से बचाए रखना चाहते हैं, तो भी नियमित रूप से उसे ज्ञान मुद्रा का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करें।