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ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे के साथ पेरेंट्स को ऐसे करना चाहिए बिहैव

सबसे ज़रूरी है की बच्चों के इशारों को समझें और उससे उसी की भाषा में बात करने की कोशिश करें!

Written by Editorial Team |Published : May 30, 2017 10:37 AM IST

ऑटिज्म बच्चों से जुड़ा ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है जिसमें बच्चे अपनी बात ठीक से किसी के सामने रख नहीं पाते हैं और अपनी ही दुनिया में खोये रहते हैं। कई माता पिता समय रहते अगर इसकी पहचान कर लें तो बच्चों को धीरे धीरे इस बीमारी के चंगुल से निकला जा सकता है। हर एक बच्चे का ऑटिज्म अलग तरह का होता है और इसीलिए उनकी थेरेपी और इलाज का तरीका भी अलग होता है। मॉम्स बिलीफ (Mom’s Belief) नामक संस्था के सीईओ नितिन बिन्दलिश यहां उन पेरेंट्स के लिए कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनके बच्चे ऑटिज्म की चपेट में हैं।

  • अगर आपका बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है तो उससे बात करते समय जितने छोटे वाक्यों या कम शब्दों में अपनी बात कह सकें उतनी ही करें जैसे कि “अपना जूस पियो”, “बैठ जाओ”, “किताब उठा लो”। इससे बच्चे को इन शब्दों को समझने में आसानी रहेगी और धीरे धीरे वे इन्हें अच्छे से समझने लगेगा।

  • ऐसे बच्चे अपनी बात कहने के लिए अलग तरह की आवाजें, फेशियल एक्सप्रेशन और इशारों का सहारा लेते हैं। ऐसे में आप उनके इशारों को सीखने और पकड़ने की कोशिश करें जिससे आप उनकी बात को जल्दी से समझ सकें और उनसे बातचीत कर सकें।

  • ऑटिज्म से पीड़ित कुछ बच्चे तेज आवाज, रोशनी या कुछ तेज महक के प्रति बहुत सवेंदनशील होते है। ऐसे में सबसे पहले आप ये समझने की कोशिश करें की वे किन चीजों को लेकर सहज नहीं है और फिर उन्हें उन चीजों से दूर रखें। जैसे की बच्चा अगर तेज आवाज से प्रभावित हो रहा है तो उसे भीड़भाड वाले इलाके में ना ले जायें।

  • बच्चे का हर काम रूटीन वाइज फिक्स कर दें जैसे की उसके उठने का समय, स्कूल जाने का समय, नाश्ते का टाइम इत्यादि। इससे बच्चा धीरे धीरे उस रूटीन को फॉलो करने लगता है और चीजों को नियंत्रित करने लगता है। एक बार ऐसा शेड्यूल बन जाने पर फिर उसे चेंज ना करें।

  • हर एक बच्चे के अन्दर अपनी एक ख़ास स्किल होती है। वास्तव में ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे भी काफी टैलेंटेड होते हैं बस ज़रूरत है कि आप उनकी स्ट्रेंथ को पहचानें जिससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़े। आप उनको हमेशा मोटीवेट करते रहें इससे उनकी स्थिति में जल्दी सुधार आता है।

  • बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार करें जिससे वो अपने घर में खुद को सुरक्षित महसूस करे और वो रिलैक्स कर सके। घर का माहौल ऐसा बनाये जिससे उसे वहां कोई तंग करने वाला या चिढ़ाने वाला न हो। ऐसे में बच्चे जल्दी रिकवर होते हैं।

  • आमतौर पर ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे विजुअल से किसी भी चीज को बहुत जल्दी सीखते हैं। इसलिए आप भी उन्हें कोई भी नयी चीज सिखाने के लिए विजुअल का सहारा लें। आज कल बाज़ार में तरह तरह की ज्ञानवर्धक सीडी उपलब्ध हैं या फिर आप यूट्यूब से ऐसे वीडियो डाउनलोड कर सकते हैं जिससे बच्चों को सीखने में बहुत मदद मिलती है।

  • जब भी अपने बच्चे से बात करें तो धैर्य बनाये रखें। कई बार बच्चे कुछ चीजें जल्दी समझते नहीं है तो ऐसे में उन्हें डांटकर समझाने की कोशिश न करें बल्कि खुद धैर्य से रहें और उनको प्यार से समझाएं।

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock

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