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ऑटिज्म की बीमारी भारत में प्रत्येक 100 बच्चे में से एक बच्चे में होती है। पीएलओएस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार ऑटिज्म के शिकार बच्चों की उम्र लगभग 10 साल के बीच रहती है। ऑटिज्म को मेडिकल भाषा में न्यूरोडेवलपमेंट डिसऑर्डर भी कहा जाता है। न्यरोडेवलपमेंट डिसऑर्डर जब ऑटिज्म बन जाता है तो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहा जाता है। सामान्यतया ऑटिज्म की बीमारी का पता 2 साल की उम्र से ही चलने लगता है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का व्यवहार सामान्य बच्चे से अलग होता है।
वर्तमान समय में अगर देखा जाय तो ऑटिज्म का कोई इलाज नहीं है। ऑटिज्म के इलाज के लिए जो चीजें अपनायी जाती हैं उनमें कुछ थेरेपी हैं और एंटीसाइकोटिक दवांए हैं जो ऑटिज्म की वजह से असामान्य व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए होती हैं। दवाओं और थेरेपी के साथ ऑटिज्म की बीमारी को ठीक करने में जो महत्वपूर्ण चीज होती है वह आस-पास रह रहे लोगों का व्यवहार और सहयोग कैसा है। मंदबुद्धि और आटिज्म में क्या अंतर है ?
मैक्स हेल्थकेयर की डायटेटिक्स प्रमुख रितिका समददार के अनुसार कुछ अध्ययन हैं जो बताते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ ऑटिज्म की परेशानी को बढ़ाने का काम करते हैं तो वहीं कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो ऑटिज्म की परेशानी को दूर करने में मददगार हैं।
कुछ शोधों में यह भी पता चला है कि ऑटिज्म की बीमारी ठीक करने में खान-पान का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। खाद्य पदार्थों में कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो ऑटिज्म की समस्या को बढ़ा सकते हैं तो वहीं कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो ऑटिज्म की परेशानी को कम करते हैं। इसको देखते हुए हम यहां ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बात कर रहे हैं जो ऑटिज्म की बीमारी को ठीक करने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं, ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे के लिए डाइट के 5 मुख्य बातें।
शुगर वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाते हैं जो बच्चे के ऊपर नकारात्मक असर डालता है। ऑटिज्म वाले बच्चों कम शर्करा वाले खाद्य पदार्थों को खिलाना चाहिए। ऑटिज्म के शिकार बच्चों को हमेशा निगरानी में रखें वो अधिक शर्करा वाले खाद्य पदार्थ न खाएं।
ऑटिज्म के शिकार बच्चे ग्लूटेन और डेयरी खाद्य पदार्थों को ठीक से पचा नहीं पाते हैं। ऑटिज्म के शिकार बच्चों का माइक्रोबायोम ठीक नहीं होता है जिसकी वजह से पाचन तंत्र ठीक नहीं रहता है। ग्लूटेन जिन खाद्य पदार्थो में पाया जाता है उनका सेवन कम से कम करना चाहिए। गेहूं, जौ और राई जैसे खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। दूध और डेयरी पदार्थ भी सीमित मात्रा में ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के देना चाहिए।
ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के माता-पिता को इस बात का ध्यान देना चाहिए की उनका बच्चा विटामिन सी और जिंक वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा से ज्यादा मात्रा में खाए। विटामिन सी और जिंक के सेवन से पाचन तंत्र ठीक रहता है और आंत की समस्याएं भी ठीक होती है। विटामिन सी के लिए संतरा, कीवी, अनानास, अंगूर, टमाटर, पपीता, ब्रोकली और स्ट्राबेरी को शामिल कर सकते हैं। जिंक के लिए फलियां, अंडे, साबुत अनाज और दाल को शामिल किया जा सकता है।
कई शोधों में यह बात सामने आयी है कि ओमेगा-3 पैटी एसिड का सेवन ऑटिज्म की बीमारी को ठीक करने में मददगार होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के सेवन से न्यूरो नशों की मरम्मत होती है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के सेवन से ऑटिज्म को ठीक करने में मदद मिलती है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए डाइट में अखरोट, चिया बीज, सोया और मछली के तेल को शामिल किया जा सकता है।
ऑटिज्म के शिकार लोगों में पाचन की समस्या रहती है। पाचन तंत्र ठीक से काम करे इसके लिए प्रोबायोटिक का इस्तेमाल रोजाना करना चाहिए। प्रोबायोटिक के लिए दही, केफिर और अचार जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है।