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Written By: Anshumala | Published : November 4, 2019 11:15 AM IST
प्रदूषण से बढ़ता है अस्थमा अटैक, इससे बचने के लिए करें ये दो योगासन। © Shutterstock
अस्थमा के मरीजों के लिए वायु प्रदूषण जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में उन्हें बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए घर से कम ही बाहर निकलना चाहिए। अस्थमा का अटैक ना आ जाए इसके लिए आप अपने घर में कुछ योग का अभ्यास कर सकते (Yoga cures Asthma) हैं। अस्थमा में सांस नली में म्यूकस जमा होने से सांस लेना में परेशानी आती है। सूजन के कारण सांस नली सिकुड़ जाती है। इस कारण रोगी की सांस की लम्बाई बहुत घट जाती है। सीने में जकड़न महसूस होती है। यदि आप प्रदूषण भरे वातावरण में घर से बाहर जाएंगे, तो अधिक धूल-मिट्टी, दूषित वायु और सर्दी से अस्थमा अटैक आने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। आप कुछ योग का अभ्यास (Yoga poses for Asthma) करना शुरू कर दें, ताकि आपको सांस लेने में तकलीफ ना हो और अस्थमा का अटैक भी ना आए।
प्रदूषण के कारण इन दिनों अस्थमा (Yoga poses for Asthma) के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है, जिससे हॉस्पिटल में इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इससे बचने के लिए आपको अपनी लाइफ स्टाइल पर ध्यान देना होगा। प्रदूषण कारी तत्व अस्थमा की परेशानी को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी घातक साबित हो सकती है। अस्थमा के मरीजों के लिए योग (Yoga poses for Asthma patients) बहुत मददगार है। यदि आप हर दिन भुजंगासन और अनुलोम विलोम करें, तो आपको लाभ मिल सकता है।
Yoga for Asthma : अस्थमा के मरीजों को दिवाली में स्वस्थ रखेंगे ये दो योगासन
भुजंगासन करने से काफी हद तक आप अस्थमा की समस्या (bhujangasana for asthma patient) से बचे रह सकते हैं। इस योग मुद्रा का अभ्यास करने के लिए अपने कंधों को झुकाते हुए अपनी दोनों हाथेलियों को जमीन पर रखें। इस लिफ्ट करने के बाद अपने चेस्ट और हाथों को सीधा करें और सिर की पीछे की ओर झुकाएं। सिर को पीछे झुकाते समय सांस लें।
अस्थमा एक सांस संबंधित बीमारी है। इसका अटैक आने पर यदि मरीज को सही वक्त पर इलाज या दवा ना मिले, तो उसकी जान भी जा सकती है। आप अस्थमा को कंट्रोल में रखने के लिए अनुलोम विलोम का अभ्यास करें। इसमें पद्मासन में बैठ जाएं। एक नाक के एक छिद्र से सांस अंदर लें और दूसरे छिद्र से सांस छोड़ें। इससे फेफड़े सही तरह से कार्य करते हैं। फेफड़े में जमी गंदगी साफ हो जाती है। इसके अलावा इससे आप थकान और डिप्रेशन भी कम कर सकते हैं। अस्थमा के रोगियों को प्रत्येक दिन इसका अभ्यास सुबह करना चाहिए। अनुलोम विलोम अस्थमा के लक्षणों को कम करने के साथ ही फेफड़ों को भी सुरक्षित रखता है। रोगी सांस लेने की प्रक्रिया को कंट्रोल कर पाते हैं। ब्रीदिंग की प्रॉब्लम सामान्य हो जाती है। छाती की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, जिससे सांस लेने में कोई तकलीफ नहीं होती।