लालू प्रसाद अर्थराइटिस से पीड़ित, जानें कैसे करें अर्थराइटिस से अपना बचाव

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रांची) में उनका इलाज कर रहे डॉ. डी. के. झा ने कहा, "लालू प्रसाद अर्थराइटिस से पीड़ित हैं। यद्यपि यहां टहलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, फिर भी हम उन्हें टहलने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें कई अन्य बीमारियां भी हैं।"

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Written By: Anshumala | Published : August 18, 2019 2:23 PM IST

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद अर्थराइटिस से पीड़ित हैं, इसीलिए वह ज्यादा चल-फिर नहीं पा रहे हैं। उनका इलाज कर रहे डॉक्टर ने यह जानकारी दी। राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में यहां उनका इलाज कर रहे डॉ. डी.के. झा ने कहा, "लालू प्रसाद अर्थराइटिस से पीड़ित हैं। यद्यपि यहां टहलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, फिर भी हम उन्हें टहलने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें कई अन्य बीमारियां हैं।"

लालू प्रसाद चारा घोटाला मामले में 14 साल जेल की सजा काट रहे हैं। तबीयत खराब होने की वजह से वह पिछले एक साल से रिम्स में इलाज करा रहे हैं। 31 अगस्त को उन्हें यहां एक साल हो जाएगा।

डॉ. झा ने कहा कि वह निर्धारित भोजन ले रहे हैं। उनकी तरफ से और कोई विशेष मांग नहीं की गई है। हर शनिवार को लालू प्रसाद से तीन लोग अस्पताल में मिल सकते हैं। इस शनिवार को लालू के रिश्तेदार विमल यादव और दो अन्य लोग उनसे मिलने आए थे।

क्या है अर्थराइटिस

lalu-prasad is suffering from arthritis treatment अर्थराइटिस के लक्षण, प्रकार और उपचार। © Shutterstock

यह जोड़ों में होने वाली एक कॉमन बीमारी है। इसमें जोड़ों में काफी दर्द होता। चलने-फिरने, उठने-बैठने यहां तक कि जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने में भी परेशानी होती है। अर्थराइटिस होने पर पीड़ित व्यक्ति की रोजमर्रा की जीवनशैली काफी हद तक प्रभावित होती है। अर्थराइटिस कई प्रकार के होते हैं। रूमेटॉयड अर्थराइटिस, सोराइटिक अर्थराइटिस, ऑस्टियोसोरायसिस, पोलिमायलगिया रूमेटिका (50 साल की आयु के बाद होता है), एनकायलॉजिंग स्पोंडिलाइटिस, रिएक्टिव अर्थराइटिस, गाउट या गांठ वाला अर्थराइटिस आदि प्रकार के अर्थराइटिस होते हैं। इन सभी का समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है वरना शरीर, गर्दन, कंधे, कमर को हिलाने-डुलाने में भी समस्या शुरू होने लगती है।

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अर्थराइटिस के लक्षण

जोड़ों में सूजन।

जोड़ों में दर्द रहना।

घुमाने या हिलाने-डुलाने में परेशानी होना।

जोड़ों को घुमाने–फिराने में देर लगना।

जोड़ों में भारीपन आ जाना।

अर्थराइटिस की बीमारी समय के साथ-साथ अधिक तकलीफदेह होती जाती है। ऐसे में जरूरी है, इसके लक्षणों के बारे में पता चलते ही डॉक्टर से संपर्क करना। दवाओं के सेवन और एक्सरसाइज व नियमित योग अभ्यास से अर्थराइटिस में काफी लाभ मिलता है।

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इनपुट: (आईएएनएस हिंदी)

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