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Written By: Anshumala | Published : September 20, 2018 10:01 PM IST
यदि आप अलग-थलग रहेंगे और किसी से बात नहीं करेंगे, तो इससे भविष्य में आपके इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ सकती है। © Shutterstock
21 सितंबर को पूरी दुनिया में विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer’s Day) मनाया जाता है। अल्जाइमर बीमारी का असर सीधा हमारे याद्दाश्त पर होता है। इसमें याद्दाश्त गंभीर रूप से कम हो जाती है। व्यक्ति की याद करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। ये डिमेंशिया का ही एक रूप है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में लगभग 16 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। यह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव (neurodegenerative) बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाओं को लगातार नुकसान पहुंचता है। इसी कारण यह बीमारी होती है। ज्यादातर यह बीमारी बुजुर्गों में होती है, लेकिन आजकल जिस तरह की लाइफस्टाइल में लोग जीते हैं, उसके कारण अब यह कम उम्र में भी लोगों को प्रभावित करने लगी है। शायद आपको यह पता नहीं कि अगर आप सही समय पर इसकी पहचान कर लें, तो इस समस्या से बच सकते हैं।
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क्या है अल्जाइमर
अल्जाइमर्स डिजीज को शुरुआती स्तर पर पहचान पाना थोड़ा मुश्किल होता है। दिमाग को कब यह प्रभावित करके व्यक्ति की याद्दाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में अवरोध उत्पन्न करने लगती है, इसका पता ही नहीं चल पाता है। जब यह बीमारी हो जाती है, तो पीड़ित व्यक्ति ठीक से सोचने-समझने, बोलने, काम करने में परेशानी महसूस करने लगता है। उसका सामाजिक दायरा संकुचित होता चला जाता है। वह अकेला रहना लगता है। हालांकि, बीमारी के शुरुआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू पा सकते हैं। इसे भी पढ़ें- लीवर की बीमारी की दवा अल्जाइमर के इलाज में कारगर
क्या है कारण
अल्जाइमर्स डिजीज लाइफस्टाइल से संबंधित एक बीमारी है। बिगड़ती जीवनशैली के कारण जिस तरह रक्तचाप, डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, ठीक उसी तरह हमारे याद रखने की क्षमता भी हमारी लाइफस्टाइल से प्रभावित होती है। दिन-रात काम करना और शारीरिक रूप से अनफिट रहना, इस बीमारी की मूल वजह है। बीपी और डायबिटीज के रोगियों में इस बीमारी के होना का खतरा अधिक होता है। कई बार सिर पर ज्यादा चोट लगने से भी अल्जाइमर हो सकता है।
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समाजिक सक्रियता बढ़ाएं
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि आप अलग-थलग रहेंगे, किसी से बात नहीं करेंगे, तो भविष्य में आपके इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ सकती है। अधिक लोगों के साथ रहने, उनसे बातचीत करने से इस रोग से बचा जा सकता है। जितना हो सके परिवार, दोस्तों, बच्चों के साथ समय व्यतीत करने की कोशिश करें। अल्जाइमर का खतरा कम होता है। बौद्धिक गतिविधियों से जुड़े रहें। पढ़ाई, खेलकूद जैसे क्रॉसवर्ड और अन्य दिमागी शक्ति लगाने वाली गतिविधियों का भरपूर मजा लें।
डिमेंशिया और अल्जाइमर से बचना है, तो हेल्दी, पौष्टिक और बैलेंस्ड डायल लेना शुरू कर दें। © Shutterstock
हेल्दी और बैलेंस्ड डायट लें
डिमेंशिया और अल्जाइमर से बचना चाहते हैं, तो आज से ही हेल्दी, पौष्टिक और बैलेंस्ड डायल लेना शुरू कर दें। इसके लिए अपनी डायट में फल, सब्जी, मछली, दूध, अंडे का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। हरी सब्जियों में विटामिन ए, सी और कई पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, जो दिमाग की सेहत के लिए जरूरी होते हैं। ऐसे में प्रतिदिन पालक, ब्रोकली, बीन्स आदि सब्जियों को भरपूर मात्रा में शामिल करें। जिन लोगों को अल्जाइमर्स डिजीज है, उन्हें तिल, सूखे टमाटर, कद्दू, मक्खन, चीज, फ्राइड फूड, जंक फूड, रेड मीट, पेस्ट्रीज और मीठे का सेवन कम करना चाहिए।
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फिजिकली एक्टिव रहना भी है जरूरी
मानसिक सेहत हमारी शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी हुई है। शारीरिक रूप से आप जितने एक्टिव होंगे डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा उतना ही कम होगा। ऐसे में हर दिन एक्सरसाइज करें, टहलनें जाएं। यदि आप शारीरिक रूप से एक्टिव रहते हैं, तो इससे आपका मेटाबॉलिज्म बेहतर रहेगा और आप इस बीमारी से बचे भी रहेंगे।
शौक करें पूरा
शोध में पाया गया है कि किसी भी हॉबी को जैसे पेंटिंग, पॉटरी कला जैसे एक्टिविटी अपनाने से आप 45 % तक इस बीमारी से अपना बचाव कर सकते हैं।