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पीपल या बोधी वृक्ष के बारे में शायद ही आपको किसी ने यह सब बताया हो!

क्या आप जानते हैं कि बोधी वृक्ष दिनभर यानि 24 घंटे ऑक्सीजन देता है?

Written by Editorial Team |Published : June 8, 2017 4:24 PM IST

हर धर्म की अपनी मान्यताएं होती हैं और हिंदू धर्म में एक ऐसी मान्यता है जिसके आधार पर हिंदू धर्म माननेवाले लोग पीपल या बोधी वृक्ष की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि पीपल के पेड़ के नीचे धन और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी रहती हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पीपल एक राक्षस है जिसके पास जादुई शक्तियां हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पीपल के पेड़ के नीचे ही अंतिम सांस ली थी और प्राण त्यागे। कई शताब्दियों से, भक्तों ने पीपल के पेड़ को एक विशेष महत्व दिया और विभिन्न अनुष्ठान इस पेड़ की परिक्रमा कर पूरे किए। लेकिन अगर आप पौराणिक कहानियों को नहीं मानते, तो हम यहां आपको बता रहे हैं पीपल के पेड़ कुछ वैज्ञानिक बातें, जो शायद इससे पहले आपको किसी ने बतायी नहीं और जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए।

वैज्ञानिक महत्व

क्या आप जानते हैं कि बोधी वृक्ष दिनभर यानि 24 घंटे ऑक्सीजन देता है? जी हां यह पेड़ रात के समय भी कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर सकता है। अपनी क्रॉसलेसियन एसिड मेटाबोलिज्म (Crassulacean Acid Metabolism (CAM) नामक एक प्रकाश संश्लेषण क्षमता या फोटोसिन्थिसिस (photosynthesis) के कारण पीपल ऐसा कर पाता है। इसीलिए, यह समझना मुश्किल नहीं है कि यह वृक्ष अक्सर हमारे गांवों के बीचोबीच क्यों देखे जाते हैं, और क्यों अक्सर गांववालों की बैठकें या पंचायत पीपल के पेड़ के नीचे ही लगती हैं।

औषधीय गुण

पीपल के पेड़ में कुछ महत्वपूर्ण औषधीय गुण भी हैं जिसकी मदद से प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति की शुरुआत हुई। पीपल पेड़ की पत्तियों को गरम करके घावों पर लगाया जाता है, जबकि पेड़ की छाल को टैनिन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। पीपल के फलों को रेचक औषली या लैक्सेटिव और इसके दूध या रबड़ (लेटेक्स) को टॉनिक के रूप में उपयोग किया जाता है, और अस्थमा के इलाज के लिए पीपल के फलों के पाउडर का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, पीपल के पेड़ से प्राप्त चीज़ों से दस्त या डायरिया(diarrhoea) और गैस्ट्रिक विकारों सहित 50 स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। गोनोरिया और त्वचा रोगों के उपचार में यह लाभदायक है और पारंपरिक रूप से इसे एंटी-अल्सर (antiulcer), एंटी-बैक्टेरियल और एंटी-डायबेटिक के तौर पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

अन्य फायदे

कुछ शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि पीपल के पत्तियों को छूकर गुज़रने वाली हवा और इससे उत्पन्न होनेवाली ध्वनि से आसपास रहने वाले इंफेक्शन वाले बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं।

संदर्भ:

Chandrasekar, S. B., Bhanumathy, M., Pawar, A. T., & Somasundaram, T. (2010). Phytopharmacology of Ficus religiosa. Pharmacognosy Reviews, 4(8), 195–199. http://doi.org/10.4103/0973-7847.70918

Read this in English.

अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्रस्रोत-Shutterstock

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