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क्या नॉन-टॉक्सिक (non-toxic) कलर से होली खेलना सुरक्षित होता है?

होली में नॉन-टॉक्सिक कलर से खेलना केमिकल कलर के तुलना में सुरक्षित होता है। लेकिन ऑरगानिक या हर्बल कलर ही सबसे ज़्यादा सुरक्षित होते हैं।

होली के दिनों में बूरा न मानो होली है कहकर लोग कुछ भी रंग आपके चेहरे पर लगा देते हैं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप चेहरे पर लेड ऑक्साइड (lead oxide), इंजन ऑयल (engine oil), क्रोमियम आयोडीन(chromium iodine) और कॉपर सल्फेट (copper sulphate) आदि लगा रहे हैं! शायद नहीं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि होली के रंगों में यह सारे केमिकल के अवयव रहते हैं जो त्वचा और बालों के लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के रंगों का इस्तेमाल करने से न सिर्फ त्वचा पर रैशेज निकलने की संभावना होती हैं बल्कि यह आँखों को अंधेपन के स्थिति तक क्षति पहुँचा सकते हैं।

इसलिए होली में रंग खेलने का मजा लुटना चाहते हैं तो नैचरल या प्राकृतिक चीजों से तैयार रंगों से खेंले। बहुत सारे कंपनियों के रंग बाजार में मिलते हैं। आजकल बाजार में नॉन- टॉक्सिक रंगों का बोलबाला है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सुरक्षित है कि नहीं ?

भारत के टॉप कॉज़्मेटिक डर्मटॉलजिस्ट डॉ. जयश्री शरद का कहना है कि नॉन- टॉक्सिक कलर केमिकल फ्री नहीं होते हैं। ये रंग इस तरह से बनाये जाते हैं कि त्वचा और बालों से आसानी से निकल सके।

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क्या ये नैचरल होते हैं?

नॉन- टॉक्सिक कलर प्राकृतिक नहीं होते हैं। ये कॉज़्मेटिक तत्वों से बनाये जाते हैं। ऐसे रंग बायोडिग्रेडिब्ल (biodegradable) होते हैं यानि प्राकृतिक तरीके से नष्ट हो सकते हैं या सेहत के लिए हानिकारक नहीं होते हैं। और ये केमिकल रंग से सौ गुना स्वास्थ्य के दृष्टि से सुरक्षित होते हैं। अगर आप नॉन-टॉक्सिक कलर लेना चाहते हैं तो बाजार में पीडीलाइट (Pedilite ) और रंगीला (Rangeela) ब्रांड के विभिन्न प्रकार के रंग मिलते हैं। पढ़े- गर्भवती महिलायें होली का आनंद कुछ साव‍धानियों के साथ मनायें

नॉन-टॉक्सिक और ऑरगानिक कलर के बीच क्या अंतर होता है?

इन दोनों रंगों में सबसे मूल अंतर यह होता है कि नॉन-टॉक्सिक कलर पूरी तरह से केमिकल फ्री नहीं होते हैं और ऑरगानिक कलर (organic colour) पूर्ण रूप से प्राकृतिक होते हैं। क्योंकि ऑरगानिक कलर फूल,सब्ज़ी, और हर्ब से बनाए जाते हैं। इसको बनाने के लिए केसर, काले अंगूर, लाल चंदन का पावडर, गेंदे का फूल, गुलमोहर का फूल,चुकंदर या बीटरूट, हल्दी आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसको लगाने से त्वचा संबंधी कोई भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। पढ़े-  होली हेल्दी रेसिपी- पिचकारी थन्डाई

क्या नॉन-टॉक्सिक कलर बच्चों के लिए सुरक्षित होता है?

डॉ. जयश्री के अनुसार केमिकल कलर के तुलना में यह सुरक्षित होते हैं मगर ऑरगानिक कलर के तुलना में नहीं। क्योंकि ऑरगानिक कलर आसानी से धुल भी जाते हैं और बच्चों के त्वचा को क्षति भी नहीं पहुँचाते हैं। इसलिए बच्चे जब भी होली खेलें बड़ों के निगरानी में ही खेलें ताकि गलती से भी उनके मुँह में रंग न चला जाय। क्योंकि पेट में केमिकल वाला रंग चले जाने पर पेट की बीमारी होने का खतरा हो सकता है। पढ़े- होली हेल्दी रेसिपी- रेड चेरी एण्ड पाइनेपल गुझिया

क्या सभी होली खेलने के लिए नॉन-टॉक्सिक कलर का इस्तेमाल कर सकते हैं?

डॉ. जयश्री के अनुसार संवेदनशील त्वचा के लिए नॉन-टॉक्सिक कलर हानिकारक साबित हो सकता है। क्योंकि इसको लगाने से संवेदनशील त्वचा पर रैशेज या एलर्जी आदि निकल सकते हैं।

इसलिए घर पर बनाये हुए ऑरगानिक कलर से ही होली खेलना सुरक्षित होता है। क्योंकि ये न सिर्फ त्वचा और बालों के लिए लाभदायक सिद्ध होते हैं बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टि से भी सुरक्षित होते हैं।

चित्र स्रोत: Getty images


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