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विटिलिगो (Vitiligo)

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विटिलिगो एक स्किन डिसऑर्डर है, जिसमें मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाएं नष्ट होने लग जाते हैं और परिणामस्वरूप त्वचा मे मेलेनिन की कमी हो जाती है। मेलेनिन की कमी के कारण त्वचा के कुछ हिस्सों पर सफेद रंग के दाग पड़ने लग जाते हैं।

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विटिलिगो क्या है

विटिलिगो (vitiligo in hindi) एक प्रकार का त्वचा रोग है, जिसे हिन्दी में “श्वेत कुष्ठ” और अंग्रेजी में “व्हाइट लेप्रोसी” (White leprosy) के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा कुछ हिस्सों से अपना सामान्य रंग खो देती है और वहां पर सफेद रंग के धब्बे बन जाते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे बड़े होते रहते हैं, जिस कारण से अक्सर लोगों में आत्मसम्मान की कमी हो जाती है। विटिलिगो त्वचा के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में यह बालों व मुंह की अंदरूनी त्वचा को भी प्रभावित कर देता है। हमारी त्वचा को रंग प्रदान करने का काम मेलेनिन का होता है और जब मेलानिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या किसी अन्य कारण से मेलानिन बनना बंद हो जाता है, तो विटिलिगो रोग विकसित होता है।

विटिलिगो के प्रकार

(Types of Vitiligo in hindi) विटिलिगो को चार अलग-अलग प्रकारों में बांटा गया है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

विटिलिगो के लक्षण

त्वचा पर सफेद रंग के धब्बे बन जाना विटिलिगो का सबसे प्रमुख लक्षण है। हालांकि, कुछ मामलों में इसमें होने वाले धब्बे हल्के गुलाबी, ग्रे या ब्राउन रंग के भी हो सकते हैं। समय से पहले सिर, दाढ़ी, मूंछ या भौंहों के बालों का रंग सफेद या ग्रे हो जाना भी विटिलिगो का लक्षण हो सकता है। हालांकि, अधिकतर मामलों में विटिलिगो से शरीर के निम्न हिस्सों में सफेद दाग होते हैं -

विटिलिगो से स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं होती है, हालांकि, फिर भी यदि आपकी त्वचा पर सफेद दाग बनने लग गए हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। ऐसा आमतौर पर इसलिए किया जाता है, ताकि धब्बों के बढ़ने की गति को धीमा किया जा सके।

विटिलिगो के कारण

(Vitiligo causes in hindi) विटिलिगो रोग तब विकसित होता है, जब मेलेनोसाइट्स (Melanocytes) नामक कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या फिर मेलानिन बनाना बंद कर देती हैं। मेलेनिन खास प्रकार का पिगमेंट होता है, जो त्वचा, बाल व आंखों को उसका रंग प्रदान करता है। हालांकि, अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया कि मेलेनोसाइट्स नष्ट क्यों होती हैं या फिर किस कारण से मेलेनिन बनाना बंद कर देती हैं। हालांकि, कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित समस्या हो सकती है। जबकि कुछ अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि यह जीन से संबंधित समस्या हो सकती है।

विटिलिगो के जोखिम कारक

(Vitiligo risk factor in hindi) कुछ स्थितियां हैं, जिनमें विटिलिगो होने का खतरा बढ़ जाता है -

विटिलिगो के बचाव

(Vitiligo preventions in hindi) जैसा कि अभी तक विटिलिगो के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है इसलिए इससे बचाव करने के तरीकों के बारे में भी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, त्वचा की सामान्य रूप से देखभाल करना और स्वास्थ्यकर आहार लेना त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है और परिणामस्वरूप विटिलिगो के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

विटिलिगो का निदान

(Vitiligo Diagnosis in hindi) विटिलिगो के धब्बों की जांच करके डॉक्टर आसानी से इस रोग का पता लगा लेते हैं। हालांकि, स्थिति की पुष्टि करने के लिए “वुड लैंप” नामक एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। वुड लैंप में पराबैंगनी किरणों की मदद से विटिलिगो के धब्बों की पहचान की जाती है। इसके अलावा स्किन बायोप्सी व अन्य कुछ टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से यह पता लगाया जाता है कि विटिलिगो के साथ कोई अन्य रोग तो नहीं हैं।

विटिलिगो का इलाज

(Vitiligo treatment in hindi) विटिलिगो का कोई स्थायी इलाज नहीं है, सिर्फ इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और इसके बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। इसके इलाज का मुख्य लक्ष्य त्वचा की दिखावट में सुधार करना है। विटिलिगो का इलाज प्रमुख रूप से रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है, जो कुछ इस प्रकार हैं -

इसके अलावा विटिलिगो का इलाज करने के लिए अन्य ट्रीटमेंट प्रोसीजरों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिनमें मुख्य रूप से स्किन ग्राफ्टिंग, मेलानोसाइट्स ट्रांसप्लांट और टैटू बनाना आदि शामिल हैं।

विटिलिगो की जटिलताएं

(vitiligo complications in hindi) विटिलिगो से ग्रस्त मरीजों के शरीर में मेलेनिन की कमी हो जाती है, जिससे वे धूप के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। विटिलिगो के मरीजों को आंखों संबंधी समस्याएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा की दिखावट में बदलाव होने के कारण विटिलिगो के मरीजों को सामाजिक व भावनात्मक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।