Dr. Poonam Kathe
ENT specialist
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सिर में चक्कर होना या सिर घूमने की भावना को मेडिकल भाषा में वर्टिगो कहा जाता है। इस समस्या के दौरान दौरान उन्हें सिर्फ सिर घूमने जैसा ही महसूस नहीं होता है उसके साथ-साथ उन्हें ऐसा भी लगता है जैसे उनके आसपास की चीजें घूम रही हों। वर्टिगो अपने आप में एक अलग बीमारी है और इसका ऊंचाई वाले स्थानों से डर लगने से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, एक विशेष प्रकार का वर्टिगो है, जिसके लक्षण ऊंचाई वाले स्थानों से देखने के कारण विकसित होने लगते हैं। वर्टिगो के दौरान अचानक से गर्दन घुमाना या फिर सिर हिलाने को कोई अन्य गतिविधि करने से सिर घूमने या सिर में चक्कर होने जैसे लक्षण और गंभीर हो जाते हैं। वर्टिगो से ग्रस्त व्यक्ति को चलने के दौरान शरीर का संतुलन बनाने में दिक्कत होने लगती है। साथ ही लंबे समय से बैठे होने के बाद अचानक से खड़े होने पर भी उनमें वर्टिगो के लक्षण महसूस होने लगते हैं। इसके अलावा वर्टिगो से ग्रस्त व्यक्ति को कान में असामान्य ध्वनि सुनाई देना और किसी वस्तु पर अपना फोकस न कर पाना आदि लक्षण भी महसूस होने लगते हैं। वर्टिगो के ये लक्षण आमतौर पर कुछ मिनट तक ही महसूस होते हैं और कुछ मामलों में लंबे समय तक भी रह सकते हैं।
वर्टिगो के प्रमुख रूप से दो प्रकार हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
आपके आसपास की चीजें घूमने जैसा महसूस होना वर्टिगो का प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा इसमें अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं -
जब आप खड़े होते हैं या कुछ काम कर रहे होते हैं, तो उस दौरान मस्तिष्क लगातार आपके अंगों (जैसे आंख व त्वचा) को आपकी पोजीशन से जुड़े सिग्नल भेजता रहता है। इन सिग्नल्स की मदद से ही आपको अपने शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। कान का अंदरूनी हिस्सा (Inner ear) आपकी संतुलन क्रिया को नियंत्रित करता है, जिससे आपको आसपास की चीजों की पोजीशन की जानकारी रहती है। बार-बार वर्टिगो के लक्षण विकसित होने पर उल्टी, मतली और गंभीर मामलों में गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वर्टिगो अंदरूनी कान से संबंधित किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। निम्न कुछ प्रमुख समस्याओं के बारे में बताया गया है, जो वर्टिगो का कारण बन सकती हैं -
वर्टिगो का निदान पूरी तरह से स्थिति आपको महसूस हो रहे लक्षणों पर निर्भर करता है। अक्सर अधिकत मरीज वर्टिगो के लक्षणों को चक्कर आना ही बताते हैं और इस कारण से कई बार स्थिति का ठीक से निदान नहीं हो पाता है। यदि मरीज द्वारा बताए गए लक्षणों के आधार पर डॉक्टर यह पता लगा पाते हैं कि समस्या कान के अंदरूनी हिस्से में है, तो ऐसे में मरीज का शारीरिक परीक्षण किया जाता है। शारीरिक परीक्षण के दौरान गर्दन को हिला कर देखा जाता है, ताकि वर्टिगो के लक्षणों को पैदा करने वाले कारकों का पता लगाया जा सके। इसके अलावा स्थिति की पुष्टि करने के लिए कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे हियरिंग टेस्ट और एमआरआई स्कैन आदि।
कुछ मामलों में बिना इलाज के अपने आप ही ठीक हो जाता है। हालांकि, यदि इसके लक्षण अपने आप ठीक नहीं हो रहे हैं, तो इसका इलाज दवाएं, फिजिकल थेरेपी और सर्जरी आदि की मदद से किया जाता है, जो लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। दवाएं - इनका इस्तेमाल प्रमुख रूप से वर्टिगो के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है, क्योंकि दवाएं वर्टिगो के कारणों का इलाज नहीं करती हैं। दवाओं की मदद से अचानक से विकसित होने वाले वर्टिगो के लक्षणों को रोका जा सकता है। डॉक्टर लक्षणों को आधार पर ही उचित दवाएं देते हैं। इसके इलाज में आमतौर पर डाइमनहाइड्रिनेट (Dimenhydrinate), प्रोमेथाज़ीन (Promethazine) और एंटीकोलिनर्जिक (Anticholinergic) दवाओं इस्तेमाल किया जाता है, जो लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। इसके अलावा वर्टिगो के कारण हो रही अन्य समस्याओं का इलाज करने के लिए भी दवाएं दी जा सकती हैं जैसे उल्टी व मतली को रोकने की दवाएं आदि। फिजिकल थेरेपी - फिजिकल थेरेपी से मस्तिष्क के सामान्य कार्य फिर से चालू करने में मदद मिलती है। फिजिकल थेरेपी की मदद से मस्तिष्क की संतुलन प्रणाली को फिर से ठीक किया जा सकता है। वर्टिगो के इलाज में प्रमुख रूप से निम्न थेरेपी की जाती हैं -