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ट्रिकोटिलोमेनिया को हेयर पुलिंग डिसऑर्डर (Hair Pulling Disorder) भी कहा जाता है, जिसमें बालों को खींचने की एक तीव्र ईच्छा होती है। हिंदी में इसे लोग बालों को नोचने की बीमारी या बालों को नोचने का विकार भी कहते हैं। ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रस्त व्यक्ति को बाल नोचने की इच्छा इतनी तीव्र होती है, कि हम उसे रोक नहीं पाते हैं। हर 100 में से 4 लोग हेयर पुलिंग डिसऑर्डर से ग्रसित पाए जाते हैं। इसमें ट्रिको (Tricho) का मतलब होता है बाल, टिलो (Tillo) का मतलब खींचना और मेनिया (Mania) का मतलब होता है दिमागी समस्या। यह एक साइकोलॉजिकल विकार है, जो मस्तिष्क में विकसित होता है और मरीज के द्वारा बालों को नोचने के रूप में व्यक्त किया जाता है। ट्रिकोटिलोमेनिया अधिकतर छोटे बच्चों पाया जाता है। ट्रिकोटिलोमेनिया के बारे में पर्याप्त जानकारी न होने के कारण 17 साल की उम्र तक मरीज आमतौर पर इस बीमारी का इलाज नहीं कराते हैं। वहीं इस समस्या का इलाज कराने वाले 70 से 90 फीसदी मरीजों में महिलाएं शामिल होती हैं।
हेयर पुलिंग डिसऑर्डर के कई अलग-अलग प्रकार हो सकते हैं, जिनके अनुसार ही उनका इलाज किया जाता है। ट्रिकोटिलोमेनिया के मुख्य दो प्रकार होते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
बालों को नोचने की समस्या अधिकतर मामलों में बचपन या किशोरावस्था से ही शुरू होती है। ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रस्त कुछ व्यक्ति या तो एक-एक करके बालों को जड़ से उखाड़ते हैं या फिर एक साथ कई बालों को उखाड़ लेते हैं। बाल नोचने की इच्छा उन्हें दिन में थोड़ी सी देर के लिए होती है या फिर कई दिनों में एक बार होती है लेकिन काफी देर तक रहती है। इस स्थिति के कारण व्यक्ति के सिर में बाल निकलने के बाद निशान (पैच) बन जाते हैं। ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रसित अधिकतर लोग सिर के बालों को ही उखाड़ते हैं, लेकिन कुछ मामलों में व्यक्ति को भौहें, दाढ़ी या शरीर के किसी अन्य हिस्से से बाल उखाड़ने की आदत भी पड़ सकती है। हालांकि, ट्रिकोटिलोमेनिया के एपिसोड के दौरान व्यक्ति का मानसिक तनाव बढ़ जाता है और बालों को नोचने के बाद उन्हें अच्छा महसूस होने लगता है। कुछ तनावपूर्ण स्थितियां ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रसित व्यक्ति के बाल नोचने की स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं। वहीं ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रसित कुछ बाल बालों को उखाड़ कर खाने लगते हैं और बाल पेट में जमा हो जाते हैं। पेट में जमा हुए बालों को ट्राइकोबीजोर (Trichobezoar) कहा जाता है। ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रसित बच्चों में बाल खींचने के लक्षण आमतौर पर टीवी देखने या पढ़ने के दौरान होते हैं और इस दौरान उन्हें इस बारे में पता नहीं होता है। वहीं कुछ बच्चे जानबूझ कर और पूरी तरह से होश के दौरान भी ऐसा कर सकते हैं।
ट्रिकोटिलोमेनिया एक इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति अपने बाल खींचने या नोचने की आदत को छोड़ नहीं पाता है। अभी तक ट्रिकोटिलोमेनिया के किसी सटीक कारण का पता नहीं लग पाया है। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि यह आनुवांशिक और अधिक तनाव जैसी स्थितियों के कारण हो सकता है। वहीं अगर व्यक्ति को गंभीर डिप्रेशन या चिंता है और इस बारे में वह किसी को बता नहीं पा रहा है, तो ऐसी स्थितियों में भी हेयर पुलिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। तनाव को ट्रिकोटिलोमेनिया का कारण बनने या उसके लक्षणों को और गंभीर बनाने वाला कारक माना गया है। कुछ स्थितियां जैसे एग्जाम या ऑफिस के काम की चिंता, वित्तीय समस्या और रिश्तों में किसी प्रकार का तनाव आदि भी ट्रिकोटिलोमेनिया के लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है। वहीं ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रसित कुछ लोगों का मानना है कि बाल खींचना उन्हें अच्छा लगता है और उन्हें भावनात्मक रूप से शांति मिलती है।
ट्रिकोटिलोमेनिया के बारे में जानकारी न होना या जानबूझकर बाल खींचने की आदत किसी व्यक्ति को ट्रिकोटिलोमेनिया का निदान कराने से रोक सकता है। वहीं माता-पिता कई बार इस बात को नकारते हैं कि उनका बच्चा ट्रिकोटिलोमेनिया से ग्रसित है। वहीं वयस्क अक्सर बालों झड़ने की समस्या के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाते हैं। डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर (DSM) के अनुसार ट्रिकोटिलोमेनिया का निदान निम्न के रूप में किया जाता है -
ट्रिकोटिलोमेनिया से बचाव या इसके लक्षणों की रोकथाम करना आसान नहीं है। हालांकि, समय पर इसकी जांच करवा कर उचित इलाज शुरू करना स्थिति को गंभीर होने से रोक सकता है। अगर किसी व्यक्ति को तनाव जैसी स्थितियों के कारण ऐसा होता है, तो तनाव कम करने के तरीकों को अपनाकर भी इस स्थिति की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
ट्रिकोटिलोमेनिया का कोई सटीक इलाज नहीं है और इसके अधिकतर मामले अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। उदाहरण के लिए स्कूल जाना शुरू करने से पहले जिन बच्चों को ट्रिकोटिलोमेनिया के लक्षण होते हैं, उनके लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, लेकिन कुछ बच्चों में ट्रिकोटिलोमेनिया के लक्षण उनके वयस्क होने तक देखे जा सकते हैं। शुरुआती वयस्कता में ट्रिकोटिलोमेनिया का सबसे सही इलाज इस बात पर ध्यान देना है, कि उसे किस बात से दिक्कत हुई है। यह एक साइकोलॉजिकल स्थिति है, इसलिए इसके इलाज में बच्चे व उसके माता-पिता दोनों को शामिल किया जाता है। जैसा कि ट्रिकोटिलोमेनिया इंपल्स से जुड़ी समस्या है, जिसे बच्चे कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। इसलिए माता-पिता को भी बच्चे की इस गतिविधि पर उन्हें डांटने या दोषी ठहराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वयस्कों में ट्रिकोटिलोमेनिया आमतौर पर मानसिक रोगों से जुड़ी हो सकती है और इसका इलाज करने के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी और हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं अगर किसी मानसिक रोग के कारण यह समस्या हो रही है, तो उसके अनुसार लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कुछ दवाएं भी दी जा सकती हैं। हालांकि, ट्रिकोटिलोमेनिया जैसे विकारों का इलाज करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल बहुत ही कम मामलों में किया जाता है।