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क्या आप जानते हैं कि अचानक से उठने वाले तेज़ पीठ दर्द कुछ गम्भीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है? स्लिप्ड डिस्क ऐसी ही एक समस्या है, जिसका समय पर इलाज नहीं कराने से यह न्यूरोल़ॉजिकल डिसॉर्डर पैरालिसिस जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है।
स्पाइनल डिस्क्स हमारे रीढ़ से जुड़ी हड्डियों के बीच मौजूद एक गद्देदार डिस्क होती हैं। ये रीढ़ की हड्डी को सहारा देने का काम करता है और रीढ़ को झटकों और चोट लगने से बचाने में मदद करती है। साथ ही ये डिस्क रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाती हैं। लेकिन, अगर किसी वजह से एक या दोनों डिस्क खराब हो जाएं, तो इस समस्या को स्लिप्ड डिस्क कहते हैं। आमतौर पर यह परेशानी चोट या सूजन की वजह से होता है। इस स्थिति में डिस्क अपनी सामान्य सीमाओं से आगे बढ़ जाती हैं, उनमें सूजन आ जाती है और डिस्क के बाहरी हिस्से में दरार या छेद होने लगते हैं। ऐसे में, डिस्क के अंदर मौजूद तरल पदार्थ न्यूक्लियस पल्पोसस (Nucleus Pulposus) का रिसाव होने लगता है। इसका असर रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास मौजूद नसों पर पड़ने लगता है। जिससे हाथों-पैरों में कमजोरी आने लगती है।
स्लिप डिस्क की समस्या रीढ़ की हड्डी के किसी भी भाग में हो सकती है। लेकिन आमतौर पर यह सबसे अधिक पीठ के निचले हिस्से को ही प्रभावित करती है। स्लिप डिस्क आमतौर पर बढ़ती उम्र के कारण होती है। यह 35 से 50 वर्ष के लोगों को ज्यादा प्रभावित कर सकती है। लेकिन, अब बदलती लाइफस्टाइल के चलते यह समस्या छोटी उम्र के लोगों में भी देखी जा रही है। स्लिप डिस्क की समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों को होने का रिस्क बहुत अधिक होता है। वहीं मोटापा यानि शरीर का अधिक वजन स्लिप डिस्क की वजह बनता है।
ये समस्याएं स्लिप्ड डिस्क के लक्षण हो सकती हैं:-
स्लिप डिस्क की समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर सर्वप्रथम पीड़ित व्यक्ति को महसूस होनेवाले लक्षणों पर ध्यान देता है। लक्षणों को स्थिति की गम्भीरता के आधार पर डायग्नोसिस के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जाते हैं।
इस समस्या से बचने के लिए इसकी वजह बनने वाली स्थितियों से बचने के प्रयास करने चाहिए। इसीलिए, लोगों को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:-
स्लिप डिस्क के उपचार के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जा सकते हैं। अगर स्थिति बहुत गम्भीर नहीं है तो एक्सरसाइज़ की मदद से स्लिप डिस्क के दर्द से राहत पाने और पीठ के मसल्स को मज़बूत बनाने का काम किया जा सकता है। इसके अलावा पेन किलर्स लेने से भी इस तकलीफ से आराम मिलता है। हालांकि, अगर उपचार के इन तरीकों से भी आपको समस्या से राहत नहीं मिलती, तो ऐसे में सर्जरी की भी सलाह दीं जा सकती है। स्लिप्ड डिस्क के लिए माइक्रोडिसकेक्टमी सर्जरी की जाती है। जिसमें सर्जरी के दौरान डिस्क के उन हिस्सों को निकाल दिया जाता है जो ख़राब हो चुके हैं और उसके स्थान पर कृत्रिम डिस्क लगा दी जाती है।