स्लीपवॉकिंग यानी नींद में चलना एक प्रकार का स्लीप डिसऑर्डर (Sleep Disorder) है और इसे पैरासोमनिया (Parasomnia) भी कहा जाता है। नींद में चलने की बीमारी को सोमनांबूलिज्म (Somnambulism) भी कहा जाता है। स्लीपवॉकिंग व्यक्ति की नींद को प्रभावित करता है। नींद में चलने की बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आ जाता है और वह अक्सर असामान्य गतिविधियां करने लगता है। वहीं इस समस्या से पीड़ित कुछ लोग अनावश्यक रूप से बोलने लगते हैं। नींद में चलने की बीमारी आमतौर पर गहरी नींद के दौरान या उससे ठीक पहले या बाद में हो सकती है। नींद में चलने की बीमारी को लोग अक्सर यह समझ लेते हैं कि इस रोग से ग्रसित व्यक्ति नींद के दौरान चलने लगता है। हालांकि यह जानना जरूरी है कि व्यक्ति सिर्फ नींद के दौरान चलता ही नहीं बल्कि कई जटिल कदम भी उठा लेता है। उदाहरण के रूप में नींद में चलने की बीमारी के दौरान व्यक्ति नींद में चलने या दौड़ने के अलावा अन्य सामान्य क्रियाएं भी करने लग जाता है जैसे कपड़े पहनना, यौन क्रिया करना, फर्नीचर को हिलाना और गलत जगह पर पेशाब करना आदि। नींद में चलने की बीमारी की आमतौर पर किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में इसे बच्चों में ही देखा जाता है। ऐसा मानना है कि हर बच्चे को 1 से 5 साल के बीच एक बार नींद में चलने के लक्षण जरूर होते हैं। स्लीपवॉकिंग के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह अधिकतर उन लोगों में ही देखा गया है जिनके परिवार में पहले किसी को यह समस्या हो चुकी है।
नींद में चलने के लक्षण
हर व्यक्ति के अनुसार नींद में चलने के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, इस स्थिति में आमतौर पर निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं -
रातभर ठीक से नींद न ले पाना
उठने के बाद उलझन व भटका हुआ महसूस होना
दिनभर थकान रहना
सुबह उठने पर शरीर में चोट लगी दिखाई देना
आपके द्वारा रात को कई कई गतिविधियां याद न होना (परिवार के सदस्यों द्वारा बताई गई बात)
नींद के दौरान बिस्तर से उठकर इधर-उधर घूमना
बिस्तर पर बैठे हुए नींद से जागना
सुबह नींद से जाग नींद में चलने पाना
उठने के बाद फिर से जल्दी नींद आना
नींद के दौरान हुई कोई भी गतिविधि याद न होना
नींद के दौरान डरना
कुछ दुर्लभ मामलों में स्लीपवॉकिंग से ग्रसित व्यक्ति को निम्न परेशानियां व लक्षण हो सकते हैं -
नींद के दौरान घर खुला छोड़कर बाहर निकल जाना
बेड के आसपास या गलत जगह पर पेशाब कर देना या अन्य कोई असामान्य गतिविधि करना
नींद के दौरान ही गाड़ी चलाना
चोट लगना
हिंसक गतिविधियां करना जैसे नींद के दौरान किसी को चोट पहुंचाने की कोशिश करना
डॉक्टर को कब दिखाएं?
नींद में चलना एक गंभीर समस्या हो सकती है और इसे नजरअंदाज करना कई बार गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। अगर आपको लगता है कि आप स्लीपवॉकिंग से ग्रस्त हैं, तो आपको डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
नींद में चलने के कारण
नींद में चलने की बीमारी कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है, जिनमें निम्न को भी शामिल किया जा सकता है -
पारिवारिक समस्या - अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पहले भी किसी को नींद में चलने की समस्या रह चुकी है, तो ऐसे में उसे यह रोग होने का खतरा बढ़ सकता है।
दवाओं का प्रभाव - कुछ दवाएं शरीर पर शामक प्रभाव डालती है, जिसके उन्हें अधिक नींद आने लगती है। दिन के समय दवाओं का शामक प्रभाव होना नींद में चलने का कारण बन सकता है।
शराब का सेवन - अधिक मात्रा में शराब का सेवन करना भी नींद में चलने की बीमारी का कारण बन सकता है, क्योंकि इससे मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण नींद प्रभावित हो जाती है।
सिर में चोट लगना - अगर सिर में चोट लगने के कारण मस्तिष्क में सूजन आ गई है, तो उसके कारण भी नींद में चलने की दिक्कत हो सकती है।
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया - ओएसए के कारण कई बार नींद संबंधी समस्याएं होने लग जाती हैं और इस कारण से कई बार नींद में चलने की बीमारी भी हो जाती है।
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम - यह भी एक प्रकार का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसके कारण कई बार नींद में चलने की दिक्कत हो सकती है।
तनाव - अगर किसी व्यक्ति को अधिक मानसिक तनाव हो सकता है, तो उसे भी नींद में चलने की बीमारी समेत अन्य स्लीप डिसऑर्डर हो सकते हैं।
इसके अलावा कुछ अन्य बीमारियां भी हैं, जिनके कारण कई बार नींद में चलने समस्या होने लगती है जैसे कम नींद आना, हाइपोथायरायडिज्म, पेट फूलना, माइग्रेन, स्ट्रोक, मासिक धर्म से पहले का समय और अधिक शोर या प्रकाश में सोना आदि।
नींद में चलने का निदान
स्लीपवॉकिंग की समस्या का निदान करने के लिए डॉक्टर आपसे व आपके परिवार से आपको हो रही परेशानियों के बारे में पूछ सकते हैं। आपको या आपके परिवार को दो हफ्ते तक एक डायरी लगाने की सलाह भी दी जा सकती है, जिसमें आपकी सारी गतिविधियों को नोट किया जाता है। आपको या परिवार में पहले किसी को कोई बीमारी हुई है, तो इस बारे में भी डॉक्टर आपसे पूछ सकते हैं। नींद में चलने की बीमारी की पुष्टि करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं -
स्लीप स्टडी
पोलीसोम्नोग्राफी
ब्रीथिंग टेस्ट
हार्ट रेट
नींद में चलने की रोकथाम
अगर नींद में चलने की समस्या किसी अंदरूनी बीमारी के कारण हो रही है, तो उसकी रोकथाम करना आमतौर पर थोड़ा मुश्किल हो सकता है। वहीं नींद में चलने से संबंधित अनुवांशिक व मानसिक स्थितियों की रोकथाम करना भी मुश्किल हो सकता है। हालांकि, अगर किसी अन्य कारण से नींद में चलने की बीमारी विकसित हुई है, तो जीवनशैली की अच्छी आदतें अपनाकर इस समस्या की रोकथाम करने में मदद मिल सकती है। इनमें निम्न शामिल हैं -
रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लें
हर रोज एक ही समय पर सोने व उठने की आदत डालें
शराब व अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नींद में चलने करें
डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई भी दवा न लें
नियमित रूप से व्यायाम करें और अच्छी डाइट लें
नींद में चलने का इलाज
अगर किसी बच्चे को नींद में चलने की बीमारी हुई है, तो आमतौर पर उसका इलाज कराने की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में डॉक्टर बच्चे के माता-पिता को बच्चे पर रातभर नजर रखने की सलाह देते हैं। वहीं अगर कोई वयस्क नींद में चलने की समस्या से परेशान है, तो ऐसी स्थिति का इलाज निम्न तरीकों की मदद से किया जा सकता है -
दवाएं - नींद में चलने की बीमारी का इलाज करने के लिए इसके अधिकतर मामलों में दवाओं आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में बेंजोडायजेपाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन दवाओं का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। हालांकि, इससे कुछ साइड इफेक्ट्स भी देखे जा सकते हैं। वहीं ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
साइकोलॉजिकल थेरेपी - स्लीपवॉकिंग की समस्या का इलाज करने के लिए साइकोलॉजिकल थेरेपी का इस्तेमालभी किया जा सकता है। नींद में चलने की बीमारी का इलाज करने के लिए रिलैक्सेशन थेरेपी, हिप्नोसिस या कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।