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सेबोरिक डर्मेटाइटिस (Seborrheic Dermatitis)

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सेबोरिक डर्मेटाइटिस को हिन्दी में त्वग्वसास्राव कहा जाता है, जिसका मतलब त्वचा वसा स्राव होता है। सेबोरिक डर्मेटाइटिस लंबे समय तक रहने वाला और बार-बार होने वाला स्किन डिसऑर्डर है, जिसमें त्वचा सफेद या हल्के पीले रंग की पपड़ी बनने लग जाती है और कभी-कभी सूजन व लालिमा भी बन जाती है। यह प्रमुख रूप से त्वचा के तैलीय हिस्सों पर देखी जाती है, जिनमें खोपड़ी, चेहरा, छाती का ऊपरी हिस्सा और पीठ आदि शामिल हैं। सेबोरिक डर्मेटाइटिस ज्यादातर वयस्क पुरुषों में देखा जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह छोटे बच्चों को भी हो सकता है। सेबोरिक शब्द का संबंध सिबेशियस ग्लैंड (वसा से संबंधित ग्रंथियां) से है और वहीं डर्मीज़ का संबंध त्वचा से है। जब यह रोग वयस्कों के सिर में होता है तो इसे डैंड्रफ (रूसी) और जब यह शिशुओं के सिर पर होता है तो इसे क्रेडल कैप (Cradle cap) कहा जाता है। इलाज की मदद से सेबोरिक डर्मेटाइटिस के लक्षणों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह रोग लंबे समय तक रह सकता है और इसके लक्षण भी बार-बार विकसित हो सकते हैं।

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सेबोरिक डर्मेटाइटिस के प्रकार

व्यक्ति को किसी उम्र में सेबोरिक डर्मेटाइटिस हुआ है, उसके अनुसार इस रोग के प्रकार को निर्धारित किया जाता है -

  1. शिशुओं को होने वाला सेबोरिक डर्मेटाइटिस - यह ज्यादातर मामलों में खोपड़ी पर होता है, जिसे क्रेडल कैप कहा जाता है। हालांकि, यह चेहरे, हाथ, पैर, धड़, कांख और जांघों पर भी हो सकता है। शिशुओं को होने वाला सेबोरिक डर्मेटाइटिस आमतौर पर छह महीनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है और इस दौरान खुजली या जलन आदि नहीं होती है।
  2. किशोर व वयस्कों में होने वाला सेबोरिक डर्मेटाइटिस - यह शरीर के कई हिस्सों पर हो सकता है, विशेष रूप से जिस हिस्से की त्वचा ज्यादा तैलीय होती है। यह आमतौर पर खोपड़ी, भौहें, नाक के दोनों तरफ, होंठ, कान और छाती पर हो सकती है।
खोपड़ी पर यह डैंड्रफ के रूप में विकसित होता है, जिस कारण आमतौर पर त्वचा में सूजन नहीं आती है। हालांकि, अगर स्थिति गंभीर होती है, तो डैंड्रफ बालों वाले हिस्से से बाहर तक भई फैल सकता है।

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के लक्षण

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के लक्षण पूरी तरह से इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं जैसे -

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के कुछ लक्षण आमतौर पर सोरायसिस की तरह दिखाई देते हैं और वहीं कुछ लोग सोरायसिस को सेबोरिक डर्मेटाइटिस समझ लेते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों में त्वचा पर हल्के गुलाबी रंग के चकत्ते बनने लगते हैं। हालांकि, सोरायसिस में होने वाले चकत्तों की मोटाई ज्यादा होती है और साथ ही इनके ऊपर सफेद पपड़ी भी आ जाती है। वहीं सेबोरिक डर्मेटाइटिस की पपड़ी ऊपर से चिकनाई युक्त होती है, जबकि सोरायसिस के चकत्ते खुरदरे होते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई एक या ज्यादा महसूस हो रहे हैं या फिर आपको लगता है कि आप सेबोरिक डर्मेटाइटिस से ग्रस्त हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करें। वहीं अगर आपको इन लक्षणों में सूजन, लालिमा खुजली जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो यह सोरायसिस का संकेत भी हो सकती है और ऐसे में भी जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के कारण

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार सीबम (Seborrhea) का अत्यधिक स्राव होना इस स्थिति का कारण हो सकता है, लेकिन इसे प्राथमिक कारण नहीं माना गया है। ऐसा भी माना जाता है कि यह रोग मलेसेजिया (Malassezia) नामक एक यीस्ट के बढ़ने या फैलने से होने वाली सूजन व लालिमा के कारण होता है। तेल की ग्रंथियां (Oil Glands) इस यीस्ट के विरुद्ध प्रतिक्रिया देती हैं, जिससे त्वचा में सूजन व लालिमा की समस्याएं हो जाती है। सेबोरिक डर्मेटाइटिस से ग्रसित लोगों में यीस्ट के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। साथ ही कुछ स्थितियां भी हैं, जो इस इसके लक्षणों को बढ़ा सकती हैं जैसे तनाव, थकान, बीमारी और मौसम में बदलाव आदि। हालांकि, यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नहीं फैलता है। पार्किसन्स रोग व स्ट्रोक से ग्रसित व्यक्ति और जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, उन्हें सेबोरिक डर्मेटाइटिस होने का खतरा अधिक रहता है।

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के जोखिम कारक

निम्न स्थितियां हैं, जो सेबोरिक डर्मेटाइटिस होने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं -

सेबोरिक डर्मेटाइटिस का निदान

सेबोरिक डर्मेटाइटिस का निदान आमतौर पर डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेष डॉक्टर) द्वारा किया जाता है, जो त्वचा पर विकसित हुए चकत्तों को देखकर ही स्थिति का पता लगा लेते हैं। सेबोरिक डर्मेटाइटिस का पता लगाने के लिए कोई टेस्ट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, कुछ अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं, जो पुष्टि करते हैं कि यह कोई अन्य बीमारी (जैसे फंगल इन्फेक्शन आदि) सेबोरिक डर्मेटाइटिस ही है।

सेबोरिक डर्मेटाइटिस से बचाव

सेबोरिक डर्मेटाइटिस की पूरी तरह से रोकथाम या बचाव करना संभव नहीं है, हालांकि त्वचा का विशेष ध्यान रखकर कुछ जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है। सेबोरिक डर्मेटाइटिस की रोकथाम करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखा जा सकता है -

सेबोरिक डर्मेटाइटिस का इलाज

सेबोरिक डर्मेटाइटिस के लिए उपलब्ध इलाज की मदद से उसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और उसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। हालांकि, कई बार इलाज बंद करने के बाद लक्षण फिर से विकसित होने लग सकते हैं। ऐसे में कई बार मरीजों को लगातार कई सालों यो महीनों तक समय-समय पर इलाज कराने की आवश्यकता पड़ती है। इसके इलाज में विशेष दवाओं, लोशन, शैंपू और अन्य स्किन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से लक्षणों को नियंत्रित रखा जाता है। साथ ही सेबोरिक डर्मेटाइटिस के लक्षण शरीर के किस हिस्से में विकसित हो रहे हैं, उसके अनुसार भी इलाज शुरू किया जा सकता है, जो इस प्रकार से है - बच्चों को होने वाला सेबोरिक डर्मेटाइटिस - यह आमतौर पर बच्चों की खोपड़ी में होता है और अक्सर इसके इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि, स्थिति को जल्दी ठीक करने के लिए डॉक्टर निम्न की सलाह दे सकते हैं -

वयस्कों में सेबोरिक डर्मेटाइटिस - अगर किसी व्यक्ति के सिर में सेबोरिक डर्मेटाइटिस (डैंड्रफ) है, तो इसके लक्षणो को कम करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ खास प्रकार के शैंपू देते हैं, जिनमें आमतौर पर जिंक पिरिथिओन, सेलेनियम सल्फाइड, सेलिसिलिक एसिड और कीटोकोनाजोल समेत अन्य एंटीफंगल शैंपू दिए जा सकते हैं। अगर शरीर के अन्य हिस्सों पर सेबोरिक डर्मेटाइटिस हुआ है, तो शैंपू की बजाय साबुन व क्रीम आदि दी जाती हैं। साथ में कुछ एंटीफंगल क्रीम भी दी जा सकती हैं।