रूमेटाइड अर्थराइटिस शरीर के जोड़ों मे सूजन व लालिमा पैदा करने वाला रोग है, जिससे जोड़ों में दर्द व अकड़न जैसी समस्याएं होने लगती हैं। रूमेटाइड अर्थराइटिस का समय पर इलाज शुरू न किया जाए तो स्थिति बदतर हो सकती है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग (Autoimmune disorder) है, जिससे शरीर के जोड़ों में सूजन, लालिमा व दर्द जैसी समस्याएं हो जाती हैं। यह एक दीर्घकालिक रोग है, जिसे दुनियाभर की 1 प्रतिशत आबादी प्रभावित है। रूमेटाइड अर्थराइटिस अधिकतर मामलों में 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं में देखा जाता है। इसमें आमतौर पर जोड़ों की अंदरूनी परत क्षतिग्रस्त होने लगती है और फिर धीरे-धीरे हड्डियां नष्ट होने लग जाती है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के चरण
रूमेटाइड अर्थराइटिस की गंभीरता के अनुसार उसे चार अलग-अलग चरणों में निर्धारित किया गया है, जो इस प्रकार हैं -
स्टेज 1 - इसमें जोड़ों में दर्द होने लगता है, लेकिन एक्स रे में कोई क्षति नहीं दिखाई देती है।
स्टेज 2 - इसमें कार्टिलेज के ठीक नीचे की हड्डियां (सबकॉन्ड्रल बोन) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और हड्डियां कमजोर पड़ने लग जाती हैं।
स्टेज 3 - इसमें ओस्टियोपोरेसिस हो जाता है और साथ ही हड्डियां विकृत होने लगती हैं। एक्स रे में कार्टिलेज व हड्डियां दोनों की क्षति देखी जा सकती है।
स्टेज 4 - इसमें उपरोक्त समस्याओं के साथ हड्डियों के आसपास तंतुनुमा संरचनाएं बनने लग जाती हैं, जिस स्थिति को एन्किलोसिस कहा जाता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षण
वैसे तो रूमेटाइड अर्थराइटिस मुख्य रूप से शरीर के जोड़ों को ही क्षति पहुंचाता है, हालांकि, इससे शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे अन्य लक्षण भी पैदा हो सकते हैं। जोड़ों में दर्द, सूजन व अकड़न होना रूमेटाइड अर्थराइटिस के प्रमुख लक्षण हैं। हालांकि, इससे अन्य लक्षण भी हो सकते हैं -
बुखार
लिम्फ नोड में सूजन
शरीर का वजन कम होना
थकान व सुस्ती
भूख कम लगना
नींद कम आना या अनिद्रा
सुबह के समय लगभग एक घंटे तक शरीर के जोड़ों में जकड़न रहना
मुंह व आंखों में सूखापन
हाथ व पैरों में जलन व झुनझुनी होना
यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो आपको डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को जोड़ों में मौजूद कोशिकाओं को नष्ट करने लग जाती हैं। सामान्य स्थितियों में प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को संक्रमण व अन्य रोगों से सुरक्षित रखने में मदद करती है। रूमेटाइड अर्थराइटिस में प्रतिरक्षा प्रणाली साइनोवियल मेम्बरेन की कोशिकाओं की पहचान नहीं कर पाती है और उन्हें क्षति पहुंचाना शुरू कर देती है। ऐसी स्थिति में जोड़ों में सूजन, दर्द व अन्य समस्याएं होने लग जाती हैं।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के जोखिम कारक
ऐसे कई पर्यावरणीय व अनुवांशिक कारक हैं, जो रूमेटाइड अर्थराइटिस विकसित होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इन जोखिम कारकों में प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -
लिंग - पुरुषों की तुलना में महिलाओं को रूमेटाइड अर्थराइटिस होने का खतरा अधिक रहता है।
उम्र - वैसे तो रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है, हालांकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह रोग होने का खतरा भी बढ़ता रहता है।
धूम्रपान - सिगरेट पीने से रूमेटाइड अर्थराइटिस विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है और यदि पहले से ही आपको यह रोग है तो इसके लक्षण गंभीर होने लगते हैं।
मोटापा - शरीर का वजन सामान्य से अधिक होना भी रूमेटाइड अर्थराइटिस होने के खतरे को बढ़ा देता है।
अनुवांशिक - कुछ लोगों में ऐसे विशेष जीन पाए जाते हैं, जो रूमेटाइड अर्थराइटिस होने के खतरे को बढ़ा देते हैं।
जन्म - जिन महिलाओं में कभी जन्म नहीं दिया है, उन्हें रूमेटाइड अर्थराइटिस होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस की रोकथाम
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग है, इसलिए इसकी पूरी तरह से रोकथाम करना संभव नहीं है। हालांकि, कुछ विशेष बातों का ध्यान रखकर इस रोग की प्रभावशीलता को कम किया जा सकता है -
धूम्रपान व तंबाकू का सेवन बंद कर दें
नियमित रूप से जोड़ों व हड्डियों की जांच कराते रहें
जीवनशैली की आदतों को सुधारें जैसे नियमित एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन
स्वास्थ्यकर व संतुलित आहार लें
नमक का सेवन अधिक न करें
शारीरिक व मानसिक तनाव कम करें
रूमेटाइड अर्थराइटिस का निदान
रूमेटाइड अर्थराइटिस का निदान उसके लक्षणों के आधार पर किया जाता है। अभी तक ऐसा कोई विशेष टेस्ट विकसित नहीं हो पाया है, जिससे रूमेटाइड अर्थराइटिस की पुष्टि की जा सके। हालांकि, कुछ टेस्ट हैं जिनकी मदद से रूमेटाइड अर्थराइटिस का निदान करने में मदद मिल सकती है -
रूमेटाइडफैक्टरटेस्ट - इस टेस्ट की मदद से रक्त में रूमेटाइड एंटीबॉडी की जांच की जाती है, जिससे रूमेटाइड अर्थराइटिस का पता लगाने में मदद मिलती है।
साइनोवियलफ्लूइडएनालिसिस - इसमें कई अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं, जिनकी मदद से जोड़ों के बीच मौजूद साइनोवियल फ्लूइड की जांच की जाती है।
ब्लडटेस्ट - इसमें सीबीसी, एंटी सीसीपी बॉडी, सी-रिएक्टिव प्रोटीन और ईएसआर आदि शामिल हैं। इन टेस्टों की मदद से भी रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों का पता लगाने में मदद मिलती है।
एमआरआईस्कैन - यह एक इमेजिंग स्कैन है जिसकी मदद से हड्डियों की संरचनाएं देखी जाती हैं।
एक्सरेवसीटीस्कैन - ये दोनों भी इमेजिंग टेस्ट हैं, जिनकी मदद से जोड़ों में सूजन आदि की जांच की जाती है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज
रूमेटाइड अर्थराइटिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, हालांकि, दवाओं की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित रखा जा सकता है और स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों का इलाज करने के लिए आमतौर पर निम्न दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है -
पेनकिलरऔरस्टेरॉयडदवाएं - इन दवाओं से रूमेटाइड अर्थराइटिस में होने वाले दर्द, सूजन, लालिमा व जकड़न जैसे लक्षणों को कम किया जा सकता है।
डिजीजमॉडिफाइंगएंटीरूमेटिकड्रग्स (DMARDs) - इन दवाओं की मदद से शरीर के अंदर सूजन पैदा करने वाली समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती हैं।
बायोलोजिकड्रग्स - ये सबसे एडवांस दवाएं हैं, जो प्रमुख रूप से सूजन व लालिमा पैदा करने वाले प्रोटीन को नष्ट करने में मदद करती हैं।
रूमेटाइड अर्थराइटिस की जटिलताएं
रूमेटाइड अर्थराइटिस से होने वाली जटिलताएं शरीर के प्रभावित हिस्सों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। हालांकि, रूमेटाइड अर्थराइटिस से आमतौर पर निम्न जटिलताएं हो सकती हैं -
रीढ़ की हड्डी में चोट लगना
फेफड़ो के ऊतकों में क्षति होना
हृदय की मांसपेशियों में सूजन आने के कारण कंजेस्टिव हार्ट फेलियर
धमनियों में रुकावट
संक्रमण
ऑस्टियोपोरोसिस
लिम्फोमा
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर
लंबे समय से एनीमिया
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