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सोरायसिस (Psoriasis)

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सोरायसिस एक प्रकार का त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा पर गुलाबी, हल्के लाल व सफेद रंग के चकत्ते बनने लगते हैं। ये चकत्ते त्वचा से उभरे हुए होने के साथ-साथ इनमें खुजली भी होती है और यह सोरायसिस के प्रमुख लक्षणों में से एक है। सोरायसिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसका कोई जड़ से इलाज नहीं है और इसलिए इसे क्रोनिक बीमारी की श्रेणी में रखा जाता है। सोरायसिस के दौरान स्किन पर हुए चकत्तों में तेज खुजली और व जलन होने के कारण मरीजों को रात के समय ठीक से नींद भी नहीं आ पाती है और साथ ही वे दिन में भी ध्यान लगाने में समस्याएं होने लगती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोरायसिस आमतौर पर समय के अनुसार कम व ज्यादा होती रहती है जैसे लक्षण कुछ हफ्ते या महीनों के लिए ज्यादा रहना और फिर कुछ समय के लिए कम रहना। सोरायसिस के मरीजों की समस्याएं यहीं खत्म नहीं होती है, उन्हें संक्रमण, त्वचा का छिलना व स्किन से जुड़ी अन्य समस्याएं होने का खतरा भी ज्यादा रहता है।

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सोरायसिस के प्रकार

सोरायसिस रोग कई प्रकार का होता है, जिनमें से कुछ प्रमुख के नाम इस प्रकार हैं - 1. प्लाक सोरायसिस - यह सोरायसिस का सबसे आम प्रकार है और 80 से 90 प्रतिशत मामले इसी प्रकार से जुड़े होते हैं। 2. इनवर्स सोरायसिस - यह आमतौर पर त्वचा की तह वाले हिस्सों में ही होता है जैसे कोहनी या घुटने का पिछला हिस्सा। 3. गटेट सोरायसिस - इसमें छोटे लाल रंग के चकत्ते बनने ते हैं और इनकी आकृति पानी की बूंद जैसी होती है। 4. पस्टूलर सोरायसिस - इसमें त्वचा पर बनने वाले चकत्तों का आकार छोटा होता है, लेकिन उनमें पस भरा हो सकता है। 5. एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस - यह सोरायसिस के गंभीर प्रकारों में से एक है, जिससे त्वचा का ज्यादातर हिस्सा प्रभावित हो जाता है। 6. सेबोसोरायसिस - सोरायसिस का यह प्रकार आमतौर पर चेहरे व खोपड़ी की त्वचा को प्रभावित करता है, जिसमें उभरे हुए चकत्ते बनने लगते हैं और उन पर चिकनाई वाली पीली परत बन जाती है। 7. नेल सोरायसिस - सोरायसिस का यह प्रकार आमतौर पर हाथों और पैरों के नाखूनों को प्रभावित करता है।

सोरायसिस के लक्षण

सोरायसिस में होने वाले लक्षण रोग की रोग की गंभीरता और हर मरीज के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर इस बीमारी में स्किन पर हल्के गुलाबी और सफेद रंग के चकत्ते देखने को मिलते हैं, जिनके ऊपर हल्के सफेद रंग की परत होती है और अंदर से गुलाबी त्वचा दिखाई देती है। इन चकत्तों से होने वाले लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -

डॉक्टर को कब दिखाएं

सोरायसिस की जांच जल्द से जल्द डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए और इसलिए यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

सोरायसिस का कारण

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया है कि सोरायसिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है और इसलिए शरीर में इसके विकसित होने के पीछे के कारण का अभी तक ठीक से पता नहीं चल पाया है। सोरायसिस में हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम ठीक से काम करना बंद कर देता है और त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लग जाता है। इसके कारण त्वचा की ग्रोथ तेज हो जाती है, जिससे ये लक्षण पैदा होने लगते हैं। सोरायसिस के लक्षण आमतौर पर इन कारणों से तीव्र हो जाते हैं

सोरायसिस के जोखिम कारक

कुछ प्रकार की स्थितियां भी हैं जो सोरायसिस जैसी बीमारी पैदा करने के खतरे को बढ़ा सकती है और ये इस प्रकार हैं - सोरायसिस एक जेनेटिक कंडीशन है और इसलिए फैमिली हिस्ट्री होना इसका सबसे प्रमुख जोखिम कारक हो सकता है। यदि आपके परिवार में किसी को पहले भी सोरायसिस हो चुका है या फिर कोई अन्य ऑटोइम्यून कंडीशन जैसे रूमेटाइड आर्थराइटिस आदि हो चुका है, तो इस बीमारी के होने का खतरा भी बढ़ सकता है। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें सोरायसिस विकसित होने के खतरा भी बढ़ सकता है। स्मोकिंग न सिर्फ सोरायसिस विकसित होने के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि जिन्हें पहले से ही यह रोग है उनमें इसके लक्षण काफी गंभीर हो सकते हैं।

सोरायसिस का निदान

सोरायसिस स्किन को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है और इसलिए इसका निदान आमतौर पर स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर (डर्मेटोलॉजिस्ट) द्वारा किया जाता है। डॉक्टर सोरायसिस के कारण हुए चकत्तों को देखते ही बीमारी का निदान कर लेते हैं। निदान के दौरान डॉक्टर आपसे कुछ सवाल भी पूछ सकते हैं जैसे - परिवार में पहले किसी को सोरायसिस या कोई ऑटोइम्यून डिजीज हुई होना

हालांकि, सोरायसिस के लक्षण अन्य कई स्किन प्रॉब्लम्स से मेल खाते हैं और इसलिए डॉक्टर बीमारी की पुष्टि करने के लिए कुछ प्रकार के टेस्ट कर सकते हैं। सोरायसिस की पुष्टि करने के लिए आमतौर पर स्किन बायोप्सी की जाती है, जिसमें प्रभावित हिस्से से त्वचा के ऊतक का सेंपल लिया जाता है और उसकी लैब में जांच की जाती है।

सोरायसिस का इलाज

सोरायसिस एक ऐसी ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसका जड़ से इलाज अभी तक संभव नहीं हो पाया है। हालांकि, वर्तमान में उपलब्ध उपचारों की मदद से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे मरीज की परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं। सोरायसिस का इलाज आमतौर पर दो प्रकार का है।

टॉपिकल ट्रीटमेंट

इसमें आमतौर पर स्किन पर लगाने की क्रीम, लोशन व मलम आदि होती हैं, जिन्हें सीधे चकत्ते पर लगाया जाता है। सोरायसिस के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली टॉपिकल दवाएं आमतौर पर निम्न केमिकल कंपोजिशन के साथ आती हैं -

ओरल ट्रीटमेंट

सोरायसिस जैसी बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए ओरल ट्रीटमेंट के रूप में इम्यूनोसप्रासांट्स दवाएं दी जाती है जिनें आमतौर पर मेथोट्रेक्सेट शामिल है। इसके अलावा साइक्लोस्पोरिन, एंजाइम इन्हिबिटर्स और ओरल रेटिनोइड्स दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।