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प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer)

Dr Pavan Wakhare
Nephrologist

verified
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पुरुषों की प्रजनन प्रणाली में मौजूद ग्रंथि पौरुष ग्रंथि यानी प्रोस्टेट में विकसित होने वाले कैंसर को प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। यह 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में कैंसर का सबसे प्रमुख प्रकार है। ज्यादातर मामलों में प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और यहां तक कि कई बार तो इससे किसी प्रकार के लक्षण व अन्य परेशानियां भी नहीं होती हैं। हालांकि, कुछ मामलों में कैंसर आक्रामक होकर गंभीर रूप से बढ़ने लगता है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल जाता है। अगर प्रोस्टेट कैंसर से लक्षण हो रहे हैं, तो उनमें आमतौर पर पेशाब में दर्द व अन्य परेशानी होना, पेशाब में खून आना और यौन क्रियाएं सामान्य रूप से न कर पाना आदि शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर के गंभीर मामलों में प्रोस्टेट से संबंधित हड्डी में भी दर्द हो सकता है। हालांकि 40 साल से कम उम्र वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर काफी कम देखा जाता है और बढ़ती उम्र के अनुसार इसके विकसित होने के जोखिम भी बढ़ने लगते हैं। इसके ज्यादातर मामले 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में ही देखे जाते हैं।

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प्रोस्टेट कैंसर के प्रकार

प्रोस्टेट कैंसर के अलग-अलग प्रकार उस कोशिका पर निर्भर करते हैं, जहां से कैंसर शुरू हुआ है। प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख प्रकारों में निम्न शामिल हैं -

  1. एसिनर एडीनोकार्सिनोमा - यह प्रोस्टेट कैंसर का सबसे आम प्रकार है, जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड में विकसित होने वाला कैंसर।
  2. डक्टल एडीनोकार्सिनोमा - यह नलिकाओं (डक्ट) की कोशिकाओं में विकसित होने वाला प्रोस्टेट कैंसर है। यह एसिनर एडीनोकार्सिनोमा की तुलना में तेजी से फैलता है।
  3. स्क्वैमस सेल कैंसर - यह प्रोस्टेट ग्लैंड को कवर करने वाली फ्लैट सेल में होता है, यह कैंसर एडीनोकार्सिनोमा से तेजी से फैलता है।
  4. ट्रांज़िशनल सेल कैंसर - इसे यूरोथेलियल कैंसर भी कहा जाता है। प्रोस्टेट कैंसर का यह प्रकार उन नलिकाओं में होता है, जो पेशाब को मूत्राशय से बाहर की तरफ ले जाती हैं। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर आमतौर पर मूत्राशय में शुरू होता है और धीरे-धीरे प्रोस्टेट तक फैल जाता है।
  5. स्मॉल सेल प्रोस्टेट कैंसर - यह पौरुष ग्रंथि के कैंसर का सबसे दुर्लभ और सबसे आक्रामक प्रकार के कैंसरों में से एक है। यह आमतौर पर न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर की श्रेणी में आता है।
 

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

प्रोस्टेट कैंसर के कुछ मामलों में व्यक्ति को किसी प्रकार का लक्षण ही महसूस नहीं होता है। हालांकि, अगर प्रोस्टेट कैंसर से लक्षण हो रहे हैं, तो उनमें आमतौर पर निम्न लक्षण हो सकते हैं -

ज्यादातर मामलों में प्रोस्टेट कैंसर की शुरूआत में किसी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं और अक्सर किसी और समस्या का निदान के दौरान किए गए रेक्टल एग्जाम, ब्लड टेस्ट, स्कैन या बायोप्सी से इस समस्या का पता लगता है। हालांकि, जब प्रोस्टेट कैंसर काफी गंभीर हो जाता है, तो इससे हड्डी में दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

प्रोस्टेट कैंसर से कई बार किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं, इसलिए नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए।

प्रोस्टेट कैंसर के कारण

प्रोस्टेट कैंसर 40 साल या उससे कम उम्र वाले लोगों को काफी कम मामलों में पाया जाता है। हालांकि, इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ-साथ प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा भी बढ़ता रहता है। 60 साल की उम्र और उसके बाद प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि, कुछ अन्य कारक भी हो सकते हैं, जो प्रोस्टेट कैंसर होने के जोखिम को बढ़ाते हैं, इनमें निम्न शामिल हैं -

इसके अलावा इस पर किए गए कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना और यौन संचारित रोग (STD) आदि भी प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

प्रोस्टेट कैंसर का निदान

अगर प्रोस्टेट कैंसर से किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं हो रहे हैं, तो कई बार उसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, प्रोस्टेट कैंसर का निदान करने के लिए रेक्टल एग्जाम, प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (Serum PSA) और ट्यूमर मार्कर आदि प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। इन टेस्टों के अलावा प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि करने के लिए प्रोस्टेट की बायोप्सी की जा सकती है, जिसें ग्रंथि के प्रभावित ऊतकों से सैंपल लिया जाता है और लैब में उसकी जांच की जाती है। प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी आमतौर पर गुदा के माध्यम से और अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग की मदद से की जाती है। अगर प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हो जाती है तो एमआरआई भी की जा सकती है, जिसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि कैंसर कहां तक फैल चुका है। इसके अलावा कुछ मामलों में चेस्ट एक्स रे, अल्ट्रासाउंड और बोन स्कैन इमेजिंग स्कैन भी किए जा सकते हैं, ताकि कैंसर के फैलाव का पता लगाया जा सके।

प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम

कुछ सामान्य बातों का ध्यान रख कर प्रोस्टेट कैंसर विकसित होने से बचाव किया जा सकता है, जैसे -

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज

अगर प्रोस्टेट कैंसर से ग्रसित पुरुष की उम्र अधिक हो गई है, तो ऐसे में डॉक्टर आमतौर पर कोई सक्रिय इलाज शुरू नहीं करते हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में मरीज को नियमित रूप से अस्पताल बुलाया जाता है, जिसकी मदद से यह जांच की जाती है कि कहीं कैंसर बढ़ तो नहीं रहा है। हालांकि अन्य स्थितियों में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में निम्न तरीकों से किया जा सकता है -

  1. सर्जरी - प्रोस्टेट ग्लैंड में मौजूद कैंसर से प्रभावित ऊतकों को निकालने के लिए सर्जरी प्रोसीजर शुरू की जाती है। प्रोस्टेट कैंसर के लिए की जाने वाली सर्जरी पेट में बड़े चीरे से लेकर रोबोटिक मेथड से की जा सकती है। सर्जरी से प्रोस्टेट कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज होने की दर काफी अधिक है, लेकिन कुछ मामलों में इससे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे यौन क्रियाएं प्रभावित होना और पेशाब संबंधी समस्याएं आदि।
  2. रेडियोथेरेपी - प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, कई बार सामान्य सर्जरी होने के बाद अगर कैंसरयुक्त ऊतक शरीर के अंदर रह गए हैं, तो उन्हें निकालने के लिए भी रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. हार्मोन थेरेपी - दवाएं जो टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम करने का काम करती हैं, उन्हें भी प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए एक प्रमुख विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  4. कीमोथेरेपी - प्रोस्टेट कैंसर के गंभीर मामलों में जब किसी दवा या हार्मोन थेरेपी से रोग को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे में कीमोथेरेपी करनी पड़ सकती है। इसमें मरीज को कुछ शक्तिशाली दवाएं दी जाती हैं, जो कैंसर को नष्ट करने और कैंसर को फैलने से रोकने का काम करती हैं।