Dr. Rajesh Vandra
Chest Physician/ Pulmonologist
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खांसी एक परेशान कर देने वाली समस्या है, जो संक्रमण, एलर्जी व अन्य कई कारणों से हो सकती है। खांसी होने पर आमतौर पर दो से तीन दिन का इंतजार किया जाता है और फिर उसके लिए दवाएं ली जाती हैं। लेकिन कई बार दवाएं लेने के बाद भी खांसी कम नहीं होती है और ऐसे में हम उलझन में पड़ जाते हैं। लेकिन आपको जानकारी होना जरूरी है कि खांसी भी अलग-अलग प्रकार की हो सकती हैं और इनमें से एक है बलगम वाली खांसी। इसे प्रोडक्टिव कफ (Productive cough) भी कहा जाता है, जो खांसी का एक अलग प्रकार है। इस खांसी में बलगम व कफ अधिक मात्रा में बनता है और इसलिए ही इसे बलगम वाली खांसी कहा जाता है। इस तरह की खांसी फेफड़ों में जमी बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है और इसलिए इसे नियंत्रित नहीं किया जा जाना चाहिए। खांसी के साथ अधिक मात्रा में बलगम आने के साथ-साथ छाती में भारीपन महसूस होना और सांस लेने में दिक्कत होना आदि इसके प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। यह आमतौर पर वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण समेत कई समस्याओं के कारण हो सकती है।
जैसा कि इसके नाम से पता चलता है खांसी के साथ बलगम या कफ निकलना ही बलगम वाली खांसी सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है। खांसी के दौरान निकलने वाले इस बलगम व कफ में आमतौर पर बैक्टीरिया, मृत ऊतक और कोशिकाओं के टुकड़े होते हैं। बलगम वाली खांसी से कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न को शामिल किया जाता है -
बलगम वाली खांसी के निम्न कारण हो सकते हैं -
बलगम वाली खांसी एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसका निदान करना भी काफी आसान होता है। निदान के दौरान डॉक्टर मरीज से उसको हो रहे लक्षणों के बारे में पूछते हैं और साथ ही स्टेथोस्कोप की मदद से खांसी के दौरान आ रही ध्वनि का करीब से सुना जाता है। हालांकि, बलगम वाली खांसी के कारण का पता लगाने के लिए कुछ अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए अस्थमा जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए मेथाकोलाइन चैलेंज नामक टेस्ट किया जा सकता है।
बलगम वाली खांसी के इलाज का मुख्य लक्ष्य छाती में जमे हुए बलगम को निकालना होता है। डॉक्टर कुछ प्रकार दवाएं देते हैं, जो बलगम निकालने का काम करती हैं इन दवाओं को एक्सपेक्टोरेंट्स (Expectorants) के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, अगर बलगम वाली खांसी किसी अन्य बीमारी के कारण विकसित हुई है, तो साथ ही साथ इसका इलाज भी किया जाता है। उदाहरण के रूप में अगर अस्थमा के कारण बलगम वाली खांसी विकसित हुई है, तो इसका इलाज करने के लिए इनहेल्ड ब्रोंकोडायलेटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं निमोनिया और फेफड़ों में घाव बनने की स्थिति या इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है। ठीक इसी प्रकार अगर किसी अन्य स्वास्थ्य समस्याके कारण बलगम वाली खांसी हो गई है, तो उसके अनुसार ही इलाज शुरू किया जाता है औऱ साथ ही ही साथ बलगम को निकालने वाली दवाएं दी जाती हैं। इलाज के दौरान डॉक्टर इन बातों का ध्यान रखने की सलाह भी देते हैं -
बलगम वाली खांसी आमतौर पर किसी अंदरूनी समस्या के कारण विकसित होती है और इसलिए अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर स्थितियां पैदा कर सकती है। उदाहरण के लिए अगर फेफड़ों में संक्रमण के कारण बलगम वाली खांसी विकसित हुई है और इसका समय पर इलाज शुरू नहीं किया गया है, तो ऐसे में संक्रमण अन्य अंगों में फैल सकता है। वहीं अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की समय पर देखभाल न करने पर उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगती हैं। वहीं समय पर खांसी का इलाज न करने पर खांसी गंभीर हो जाती है और इससे पेट में दर्द, बेहोशी और यहां तक कि दबाव के कारण इसोफेगस में क्षति भी हो सकती है।