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पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum depression)

Dr. Sangeeta Desai
Gynecologist

verified
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लगभग 13 प्रतिशत महिलाएं प्रसव होने के एक साल के भीतर डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं, जिसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जुड़ी पर्याप्त जानकारी न होने के कारण अक्सर इस समस्या का निदान नहीं हो पाता है और कई सालों तक महिलाएं इससे पीड़ित रहती हैं। एक अध्ययन के अनुसार एशियाई देशों में लगभग 65 प्रतिशत महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार हैं। वहीं अगर हम मृत बच्चा पैदा होना और मिसकैरेज जैसे मामलों को भी शामिल करें, तो ये आंकड़े और भी ज्यादा हैं। पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण सामान्य डिप्रेशन की तरह अक्षम बना देने वाले होते हैं। यह पाया गया कि 50 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ही पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण पैदा हो जाते हैं। कई बार पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण मां अपने बच्चे के साथ भी नाजुक भावना नहीं बना पाती हैं। पोस्टपार्टम डिप्रेशन आमतौर पर बच्चे के जन्म लेने के 30 दिनों के भीतर एक असुरक्षा की भावना के रूप में शुरू होता है और इससे धीरे-धीरे अन्य लक्षण भी पैदा होने लग जाते हैं। इसके लक्षणों में आमतौर पर महिला को दिनभर उदासी या चिंता रहना और शाम के समय लक्षण और गंभीर हो जाना।

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन के प्रकार

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के प्रकारों को उसकी गंभीरता के आधार पर निर्धारित किया गया है, जिसमें आमतौर पर निम्न शामिल हैं -

  1. पोस्टपार्टम ब्लू - इसे बेबी ब्लू के नाम से भी जाना जाता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ग्रसित लगभग 85 प्रतिशत महिलाएं पोस्टपार्टम ब्लू से ही पीड़ित होती हैं। यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सबसे आम और सामान्य प्रकार है।
  2. पोस्टपार्टम एंग्जायटी - यह भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन का एक आम प्रकार है। इसमें आमतौर पर चिंता, भय व तनाव जैसी लक्षण होते हैं और इस कारण से कई बार इसका समय पर निदान नहीं हो पाता है।
  3. पोस्टपार्टम पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) - प्रसव के बाद होने वाले अवसाद के कुल मामलों में पीटीएसडी के 9 प्रतिशत मामले पाए जाते हैं। यह आमतौर पर अचानक सी-सेक्शन कराने की आवश्यकता पड़ना, शिशु अस्वस्थ होना या प्रसव से संबंधित अन्य स्थितियों में होता है।
  4. पोस्टपार्टम पैनिक डिसऑर्डर - यह प्रसव के बाद लगभग 10 प्रतिशत महिलाओं को होता है। पोस्टपार्टम पैनिक डिसऑर्डर में आमतौर पर सीने में जकड़न, घबराहट होना और सांस फूलना जैसी लक्षण देखे जाते हैं।
  5. पोस्टपार्टम ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर - एक अध्ययन के अनुसार लगभग 11 प्रतिशत महिलाओं में प्रसव के बाद ओसीडी के लक्षण देखने को मिलते हैं।
  6. पोस्टपार्टम साइकोसिस - यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सबसे गंभीर प्रकार है, लेकिन अपेक्षाकृत कम मामलों में देखा जाता है। यह प्रसव के 2 से 3 दिन बाद ही विकसित हो जाता है और इससे शुरुआत में अनिद्रा व चिड़चिड़ापन जैसी लक्षण विकसित होते हैं। हालांकि, बाद में इससे हल्लुसिनेशन, डिलूशन और अन्य मानसिक लक्षण भी विकसित हो सकते हैं।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण

प्रसव के बाद होने वाले डिप्रेशन के लक्षण आमतौर पर काफी सामान्य होते हैं और इसलिए इन पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है - पोस्टपार्टम डिप्रेशन से होने वाले प्रमुख लक्षणों में निम्न शामिल हैं -

डॉक्टर को कब दिखाएं?

प्रसव के बाद महिलाओं को कुछ समय के लिए मानसिक तनाव हो सकता है और उसका मतलब ये नहीं है कि वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ग्रसित है। हालांकि, फिर भी स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है। इसलिए अगर आपको प्रसव के बाद डिप्रेशन से संबंधित किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में संपर्क कर लेना चाहिए।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण

हालांकि, अभी तक पोस्टपार्टम डिप्रेशन के सटीक कारण के बारे में पता नहीं लगा पाए हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है हार्मोन, बायोकेमिकल, फिजियोलॉजिकल और एनवायरमेंटल कारकों से जुड़ी कुछ स्थितियां हो सकती हैं जिसके कारण पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है। निम्न कुछ स्थितियां हैं, जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं -

  1. हार्मोन का स्तर अचानक से गिर जाना - प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन गर्भावस्था के दौरान आमतौर पर दस गुना तक बढ़ जाते हैं। वहीं प्रसव के बाद इन हार्मोन का स्तर फिर से सामान्य हो जाता है। हार्मोन का अचानक से बढ़ना कई बार व्यवहारिक बदलाव कर सकता है।
  2. शारीरिक बदलाव - प्रसव के बाद भी शरीर में काफी बदलाव आते हैं, जैसे शरीर का वजन बढ़ जाना, स्ट्रेच मार्क्स आ जाना और शरीर के कुछ हिस्सों दर्द रहना आदि स्थितियां भी हैं, जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण बन सकती हैं।
  3. समय से पहले गर्भावस्था - कई बार समय से पहले गर्भावस्था के कारण भी महिलाओं को डिप्रेशन हो सकता है। ऐसे में उन्हें प्रसव के बाद भी कुछ समय तक अवसाद रहता है।
  4. अधिक बार गर्भावस्था - अगर आपको प्रसव के दौरान काफी मानसिक व शारीरिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है, तो ऐसे में आपको प्रसव के बाद भी कुछ समय तक अवसाद की समस्या रहती है। साथ ही इसके बाद होने वाली गर्भावस्था में आपको और अधिक गंभीर अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के जोखिम कारक

निम्न कुछ जोखिम कारक हैं, जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन के खतरे को बढ़ा देते हैं -

साथ ही एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो महिलाएं महानगरों, उपनगरों या कस्बों में रहती हैं, उन्हें पोस्टपार्टम डिप्रेशन होने का खतरा अधिक रहता है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का निदान

डॉक्टर इस दौरान आपके लक्षणों की जांच करते हैं और साथ ही आपके स्वास्थ्य से जुड़ी पिछली जानकारियों के बारे में भी पूछा जाता है। अगर डॉक्टर को लगता है कि आप पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ग्रसित हो सकती हैं, तो ऐसे में आपको स्पेशलिस्ट के पास रेफर कर दिया जाता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन का निदान करने के लिए निम्न तरीके अपनाए जाते हैं -

पोस्टपार्टम डिप्रेशन की रोकथाम

पोस्टपार्टम डिप्रेशन की रोकथाम करने का कोई निश्चित तरीका है। अच्छी नींद लेने की तकनीक अपनाना और अपने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना आदि पोस्टपार्टम डिप्रेशन के खतरे को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। पोस्टपार्टम डिप्रेशन के खतरे को कम करने के लिए गर्भावस्था के दौरान भी कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं जैसे स्वस्थ व संतुलित आहार लेना और योग, व्यायाम व मेडिटेशन करना आदि। साथ ही इस दौरान डॉक्टर कैफीन (जैसे चाय-कॉफी) और शराब आदि का सेवन बंद करने की सलाह भी दे सकते हैं।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज करने के लिए निम्न उपचार तकनीक अपनाई जाती हैं -

  1. थेरेपी - पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज करने के लिए साइकोलॉजिस्ट और साइकिएट्रिस्ट मिलकर थेरेपी देते हैं।
  2. मैरिज काउंसलिंग - शादीशुदा जीवन में किसी प्रकार की जटिलता भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण बन सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए मैरिज काउंसलिंग की जाती है।
  3. दवाएं - पोस्टपार्टम डिप्रेशन के इलाज के लिए एंटीडिप्रेसेंट्स दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा हार्मोन थेरेपी की दवाएं भी दी जा सकती हैं। एंटीडिप्रेसेंट्स दवाओं के साथ कई बार एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी भी दी जा सकती है।