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पोरफाइरिया (Porphyria)

Dr. Sachin Shelke
Internal Medicine

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पोरफाइरिया कई अनुवांशिक विकारों का एक समूह है, जो पोरफाइरिन नामक रसायन बनने के कारण विकसित होता है। ये रसायन शरीर में हीम बनने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने के कारण विकसित होते हैं। हीम हीमोग्लोबिन का एक खास हिस्सा है, जो आयरन से समृद्ध होता है और यह रक्त को रंग प्रदान करने काम करता है। पोरफाइरिया दुर्लभ रोगों का एक समूह है, जो त्वचा और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। पोरफाइरिया के प्रकार के अनुसार पोरफाइरिन का प्रथम हिस्सा अस्थि मज्जा (बोन मेरो) व लिवर में जमा होने लगता है और कई अलग-अलग प्रकार की जटिलताएं पैदा करता है। पोरफाइरिया का इलाज संभव नहीं है, हालांकि, मरीज को नियमित रूप से रक्त चढ़ाकर और अन्य उपचार विकल्पों की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

पोरफाइरिया के प्रकार

हीम बनने के कारण शरीर का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है आदि के आधार पर पोरफाइरिया को दो अलग-अलग प्रकारों में विभाजित किया गया है -

  1. एक्यूट पोरफाइरिया - यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं विकसित होने लगती हैं। एक्यूट पोरफाइरिया को आमतौर पर इन प्रकारों में विभाजित किया गया है -
    • एक्यूट इंटरमिटेंट पोरफाइरिया
    • वेरिएगेट पोरफाइरिया
    • हेरेडिटरी पोरफाइरिया
    • डेल्टा-अमीनोलेवूलिनिक एसिड
  2. क्यूटेनियस पोरफाइरिया - यह आमतौर पर त्वचा को प्रभावित करता है और आमतौर पर लाइट सेंसिटिविटी के कारण होती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं विकसित हो जाती हैं। क्यूटेनियस पोरफाइरिया के निम्न प्रकार हैं -
    • पोरफाइरिया क्यूटेनिया टार्डा
    • प्रोटोपोरफाइरिया
    • कॉन्जेनिटल एरिथ्रोपोएटिक पोरफाइरिया
    • हेप्टोएरिथ्रोपोएटिक पोरफाइरिया

पोरफाइरिया के लक्षण

पोरफाइरिया के प्रकार के अनुसार उससे होने वाले लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं - एक्यूट पोरफाइरिया के लक्षण

क्यूटेनियस पोरफाइरिया के लक्षण -

डॉक्टर को कब दिखाएं?

पोरफाइरिया एक गंभीर समस्या हो सकती है, इसलिए अगर आपको थोड़ा सा भी संदेह हो रहा है कि आप इस रोग से ग्रसित हैं, तो ऐसे में आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। वहीं अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो भी आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

पोरफाइरिया के कारण

दिल्ली में स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट, डर्मेटोलॉजी डॉक्टर निपुण जैन कहते हैं कि पोरफाइरिया ऐसे कई रोगों का समूह है, जो तंत्रिकाओं और त्वचा को प्रभावित करते हैं। उनके अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में ऐसे पदार्थ जमा होने लग जाते हैं, जिनके कारण पोरफाइरिन बनने लग जाता है। हीम बनाने वाले प्रोटीन में किसी प्रकार का आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic Mutation) होना पोरफाइरिया का प्रमुख कारण होता है। हीम प्रोडक्शन से पहले बनने वाले पदार्थ को पोरफाइरिन और पोरफाइरिन प्रीकर्सर (Porphyrin precursors) कहा जाता है। कुछ मामलों में अगर किसी ऐसे एंजाइम की कमी है, जो पोरफाइरिन बनाने के लिए आवश्यक है, तो ऐसे में पोरफाइरिन और पोरफाइरिन प्रीकर्सर जमा होने लग जाता है। ये ज्यादातर त्वचा, लिवर व शरीर के अन्य ऊतकों में बनने लगते हैं। पोरफाइरिन या पोरफाइरिन प्रीकर्सर अधिक मात्रा में बनने से इससे कुछ प्रकार के पोरफाइरिया के लक्षण विकसित होने लग जाते हैं।

पोरफाइरिया के जोखिम कारक

पोरफाइरिया के अधिकतर मामले अनुवांशिक स्थितियों में ही देखे जाते हैं, जिसका मतलब उन्हें अपने माता-पिता से यह बीमारी हुई है और ऐसे मामलों में बहुत ही कम कोई लक्षण देखा जाता है। हालांकि, एंजाइम की कमी से विकसित होने वाले पोरफाइरिया के जोखिम कारक निम्न हो सकते हैं -

पोरफाइरिया का निदान

डॉक्टर निपुण जैन के अनुसार पोरफाइरिया का निदान आमतौर पर ब्लड, यूरिन व स्टूल टेस्ट की मदद से किया जाता है और साथ ही साथ इसके कारण हो रहे लक्षणों की करीब से जांच की जाती है। हालांकि, कई बार इसका निदान करना मुश्किल भी हो जाता है, क्योंकि पोरफाइरिया में होने वाले लक्षण आमतौर पर कई अन्य बीमारियों में भी होते हैं। इसके अलावा जेनेटिक टेस्टिंग भी की जा सकती है, जिसकी मदद से पोरफाइरिया के निदान की पुष्टि की जा सकती है और साथ ही इसकी मदद से जीन की जांच भी की जा सकती है। अगर जेनेटिक टेस्टिंग के दौरान कोई जीन म्यूटेशन मिलती है, तो ऐसे में डॉक्टर परिवार के अन्य लोगों को भी जेनेटिक टेस्टिंग कराने की सलाह दे सकते हैं।

पोरफाइरिया की रोकथाम

डॉक्टर निपुण जैन के अनुसार पोरफाइरिया जैसे रोगों की रोकथाम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। हालांकि, कुछ सामान्य बातों का पालन करके पोरफाइरिया से बचाव करने में कुछ मदद मिल सकती है -

पोरफाइरिया का इलाज

पोरफाइरिया का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है। पोरफाइरिया के प्रकार और उसमें हो रहे लक्षणों के अनुसार विशेष प्रकार की दवाएं दी जाती हैं। कुछ गंभीर मामलों में मरीज को लगातार नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा पोरफाइरिया के इलाज में निम्न शामिल हैं - एक्यूट पोरफाइरिया का इलाज

क्यूटेनियस पोरफाइरिया का इलाज