पोरफाइरिया कई अनुवांशिक विकारों का एक समूह है, जो पोरफाइरिन नामक रसायन बनने के कारण विकसित होता है। ये रसायन शरीर में हीम बनने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने के कारण विकसित होते हैं। हीम हीमोग्लोबिन का एक खास हिस्सा है, जो आयरन से समृद्ध होता है और यह रक्त को रंग प्रदान करने काम करता है। पोरफाइरिया दुर्लभ रोगों का एक समूह है, जो त्वचा और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। पोरफाइरिया के प्रकार के अनुसार पोरफाइरिन का प्रथम हिस्सा अस्थि मज्जा (बोन मेरो) व लिवर में जमा होने लगता है और कई अलग-अलग प्रकार की जटिलताएं पैदा करता है। पोरफाइरिया का इलाज संभव नहीं है, हालांकि, मरीज को नियमित रूप से रक्त चढ़ाकर और अन्य उपचार विकल्पों की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
पोरफाइरिया के प्रकार
हीम बनने के कारण शरीर का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है आदि के आधार पर पोरफाइरिया को दो अलग-अलग प्रकारों में विभाजित किया गया है -
एक्यूट पोरफाइरिया - यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं विकसित होने लगती हैं। एक्यूट पोरफाइरिया को आमतौर पर इन प्रकारों में विभाजित किया गया है -
एक्यूट इंटरमिटेंट पोरफाइरिया
वेरिएगेट पोरफाइरिया
हेरेडिटरी पोरफाइरिया
डेल्टा-अमीनोलेवूलिनिक एसिड
क्यूटेनियस पोरफाइरिया - यह आमतौर पर त्वचा को प्रभावित करता है और आमतौर पर लाइट सेंसिटिविटी के कारण होती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं विकसित हो जाती हैं। क्यूटेनियस पोरफाइरिया के निम्न प्रकार हैं -
पोरफाइरिया क्यूटेनिया टार्डा
प्रोटोपोरफाइरिया
कॉन्जेनिटल एरिथ्रोपोएटिक पोरफाइरिया
हेप्टोएरिथ्रोपोएटिक पोरफाइरिया
पोरफाइरिया के लक्षण
पोरफाइरिया के प्रकार के अनुसार उससे होने वाले लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं - एक्यूट पोरफाइरिया के लक्षण
पेट में गंभीर दर्द
हाथ, पैर और पीठ में दर्द
मल त्याग ठीक से होना
उल्टी आना
अनिद्रा
घबराहट (पैल्पिटेशन)
मसूड़े सिकुड़ना (या पीछे हटना)
तंत्रिका क्षतिग्रस्त होना (जिससे कमजोरी, लकवा और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण होते हैं)
दौरे पड़ना और अन्य मानसिक समस्याएं हो जाना
हाई ब्लड प्रेशर
पेशाब रोक न पाना या पेशाब बंद होना
पेशाब के रंग में बदलाव होना
धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में छाले पड़ जाना
क्यूटेनियस पोरफाइरिया के लक्षण -
त्वचा में जलन महसूस होना (लालिमा और सूजन के साथ)
त्वचा में खुजली और स्थायी निशान पड़ना
त्वचा पर दर्दनाक छाले पड़ जाना
पेशाब का रंग गहरा हो जाना
त्वचा पर जल्दी घाव बनना और धीरे-धीरे ठीक होना
छाले व घाव संक्रमित हो जाना
त्वचा में जलन के साथ-साथ दर्द व चुभन भी महसूस होना
डॉक्टर को कब दिखाएं?
पोरफाइरिया एक गंभीर समस्या हो सकती है, इसलिए अगर आपको थोड़ा सा भी संदेह हो रहा है कि आप इस रोग से ग्रसित हैं, तो ऐसे में आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। वहीं अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो भी आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
पोरफाइरिया के कारण
दिल्ली में स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट, डर्मेटोलॉजी डॉक्टर निपुण जैन कहते हैं कि पोरफाइरिया ऐसे कई रोगों का समूह है, जो तंत्रिकाओं और त्वचा को प्रभावित करते हैं। उनके अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में ऐसे पदार्थ जमा होने लग जाते हैं, जिनके कारण पोरफाइरिन बनने लग जाता है। हीम बनाने वाले प्रोटीन में किसी प्रकार का आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic Mutation) होना पोरफाइरिया का प्रमुख कारण होता है। हीम प्रोडक्शन से पहले बनने वाले पदार्थ को पोरफाइरिन और पोरफाइरिन प्रीकर्सर (Porphyrin precursors) कहा जाता है। कुछ मामलों में अगर किसी ऐसे एंजाइम की कमी है, जो पोरफाइरिन बनाने के लिए आवश्यक है, तो ऐसे में पोरफाइरिन और पोरफाइरिन प्रीकर्सर जमा होने लग जाता है। ये ज्यादातर त्वचा, लिवर व शरीर के अन्य ऊतकों में बनने लगते हैं। पोरफाइरिन या पोरफाइरिन प्रीकर्सर अधिक मात्रा में बनने से इससे कुछ प्रकार के पोरफाइरिया के लक्षण विकसित होने लग जाते हैं।
पोरफाइरिया के जोखिम कारक
पोरफाइरिया के अधिकतर मामले अनुवांशिक स्थितियों में ही देखे जाते हैं, जिसका मतलब उन्हें अपने माता-पिता से यह बीमारी हुई है और ऐसे मामलों में बहुत ही कम कोई लक्षण देखा जाता है। हालांकि, एंजाइम की कमी से विकसित होने वाले पोरफाइरिया के जोखिम कारक निम्न हो सकते हैं -
अधिक शराब पीना
धूम्रपान करना
अधिक मात्रा में आयरन वाले खाद्य पदार्थ लेना
एस्ट्रोजन हार्मोन वाली दवाएं लेना
गर्भनिरोधक
हेपेटाइटिस सी
एचआईवी एड्स
धूप के बहुत ज्यादा संपर्क में रहना
तनाव
पोरफाइरिया का निदान
डॉक्टर निपुण जैन के अनुसार पोरफाइरिया का निदान आमतौर पर ब्लड, यूरिन व स्टूल टेस्ट की मदद से किया जाता है और साथ ही साथ इसके कारण हो रहे लक्षणों की करीब से जांच की जाती है। हालांकि, कई बार इसका निदान करना मुश्किल भी हो जाता है, क्योंकि पोरफाइरिया में होने वाले लक्षण आमतौर पर कई अन्य बीमारियों में भी होते हैं। इसके अलावा जेनेटिक टेस्टिंग भी की जा सकती है, जिसकी मदद से पोरफाइरिया के निदान की पुष्टि की जा सकती है और साथ ही इसकी मदद से जीन की जांच भी की जा सकती है। अगर जेनेटिक टेस्टिंग के दौरान कोई जीन म्यूटेशन मिलती है, तो ऐसे में डॉक्टर परिवार के अन्य लोगों को भी जेनेटिक टेस्टिंग कराने की सलाह दे सकते हैं।
पोरफाइरिया की रोकथाम
डॉक्टर निपुण जैन के अनुसार पोरफाइरिया जैसे रोगों की रोकथाम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। हालांकि, कुछ सामान्य बातों का पालन करके पोरफाइरिया से बचाव करने में कुछ मदद मिल सकती है -
ऐसी दवाएं ना लें जो पोरफाइरिया का कारण बन सकती हैं, इसके लिए डॉक्टर से बात करके वैकल्पिक दवाओं का इस्तेमाल करें
धूम्रपान, शराब या अन्य किसी नशीले पदार्थ का सेवन न करें
बहुत अधिक डाइटिंग या फास्टिंग न करें
त्वचा को सीधे धूप के संपर्क में न आने और बाहर जाते समय कपड़े से ढक लें या फिर अच्छी सनस्क्रीन का उपयोग करें
भावनात्मक तनाव को बढ़ने न दें
त्वचा संबंधी कोई भी समस्या होने पर तुरंत इलाज कराएं
पोरफाइरिया का इलाज
पोरफाइरिया का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है। पोरफाइरिया के प्रकार और उसमें हो रहे लक्षणों के अनुसार विशेष प्रकार की दवाएं दी जाती हैं। कुछ गंभीर मामलों में मरीज को लगातार नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा पोरफाइरिया के इलाज में निम्न शामिल हैं - एक्यूट पोरफाइरिया का इलाज
दिल की धड़कन को नियंत्रित करने के लिए प्रोप्रानोलोल
दर्द कम करने के लिए पेन किलर
हेमाटिन की दवाएं देना, जिसमें ऐसा हेमाटिन मौजूद होता है जिसका उपयोग आपके शरीर द्वारा किया जाता है
त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं का इलाज करने के लिए दवाएं जैसे संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक
क्यूटेनियस पोरफाइरिया का इलाज
शरीर से अतिरिक्त पोरफाइरिन को निकालने के लिए डॉक्टर एक्टिवेटेड चारकोल देते हैं, जो शरीर से अतिरिक्त पोरफाइरिन को अवशोषित कर लेता है।
रोजाना विटामिन ए और अन्य पोषक तत्वों के लिए सप्लीमेंट्स लेना, इन्हें आमतौर पर एक लंबे समय तक दिया जाता है।
लिवर से अतिरिक्त आयरन को कम करने के लिए थेराप्यूटिक फ्लेबोटॉमी करना, जिसमें कुछ निश्चित मात्रा में रक्त को निकाल दिया जाता है।