ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम मूत्र प्रणाली संबंधी एक विकार है, जिसमें व्यक्ति को पेशाब करने की तीव्र ईच्छा होती है और इस दौरान वह पेशाब रोक नहीं पाता है। इस समस्या के दौरान व्यक्ति के मूत्राशय (ब्लैडर) में थोड़ा सा ही पेशाब होने के बावजूद भी उसे पेशाब करने की तीव्र ईच्छा हो जाती है, जिससे नियंत्रित करने उसके लिए काफी मुश्किल होने लगता है। अगर सरल शब्दों में कहें तो ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के दौरान व्यक्ति को थोड़ा सा पेशाब होने के बावजूद भी मूत्र असयंमिता (Incontinence) की समस्या होने लगती है। हालांकि, कई बार पेशाब करने की तीव्र ईच्छा के कारण बाथरूम तक पहुंचने से पहले ही कुछ लोगों को थोड़ा-बहुत पेशाब निकल जाता है। लेकिन ऐसा आमतौर पर गंभीर मामलों में ही होता है। अचानक से पेशाब की तीव्र ईच्छा होना और करने पर थोड़ी सी मात्रा में ही पेशाब आना इस समस्याका सबसे प्रमुख लक्षण है। ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के कारण के बारे में अभी तक पूरी तरह से जानकारी नहीं मिल पाई है। इस स्थिति के इलाज में आमतौर परक दवाएं, सर्जरी, एक्सरसाइज और कुछ अन्य प्रकार की उपचार प्रक्रियाएं शामिल हैं।
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के लक्षण
अचानक से पेशाब करने की तीव्र ईच्छा होना और ऐसा महसूस होना की आप उसे कंट्रोल नहीं कर पाएंगे, ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का मुख्य लक्षण माना जाता है। इसके अलावा इस समस्या के साथ कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं जैसे -
बार-बार पेशाब जाना
रात के समय एक से अधिक बार पेशाब करने के लिए उठना
कई बार बाथरूम तक समय पर न पहुंच पाने के कारण पेशाब का रिसाव हो जाना
डॉक्टर को कब दिखाएं
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम एक परेशान कर देने वाली समस्या हो सकती है और इस कारण से कई बार शर्मिंदगी का सामना भई करना पड़ सकता है। अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्,ण महसूस हो रहा है या फिर आप किसी अन्य कारण से पेशाब को रोक नहीं पा रहे हैं, तो ऐसे डॉक्टर से इस बारे में संपर्क कर लेना चाहिए।
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के कारण
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का कारण बनने वाली समस्याओं के बारे में सटीक रूप से अभी जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, देखा गया है कि इस सिंड्रोम से ग्रसित ज्यादातर लोगों में मूत्राशय की मांसपेशियों संंबधी समस्याएं पाई जाती हैं। ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम में मूत्राशय की मांसपेशियों ओवरएक्टिव (अतिसक्रिय) और संकुचित हो जाती है, जिसकी कोई आवश्यकता नहीं होती है। सामान्य स्थितियों में जब मूत्राशय धीरे-धीरे भर रहा होता है, तो इस दौरान मांसपेशियां रिलैक्स (शिथिल) रहती हैं और जब मूत्राशय भर जाता है, तो मस्तिष्क तक इसका संकेत पहुंचता है। ऐसा कई बार तब भी हो जाता है, जब ब्लैडर सिर्फ आधार ही भरा होता है। अक्सर लोग पेशाब की ईच्छा होने पर भी उसे आवश्यकता के अनुसार आसानी से नियंत्रित कर लेते हैं। हालांकि, ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम से ग्रसित लोगों में उनके मूत्राशय की मांसपेशियां इतनी ओवरएक्टिव हो जाती हैं कि थोड़ा सा पेशाब जमा होने पर ही मूत्राशय भरा हुआ महसूस होने लगता है और ऐसे में मस्तिष्क को गलत संकेत जाने लगता है। मस्तिष्क को संकेत मिलने के कारण मूत्राशय की मांसपेशियां संकुचित होने लगती हैं और ऐसे में कई बार पेशाब का रिसाव हो जाता है। कुछ दुर्लभ मामलों में तंत्रिका या मस्तिष्क से संबंधी रोगों के कारण भी ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम हो सकता है, इनमें निम्न समस्याएं शामिल हैं -
स्ट्रोक
पार्किंसन डिजीज
मल्टीपल स्क्लेरोसिस
रीढ़ की हड्डी में चोट लगना
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के जोखिम कारक
इसके अलावा कुछ अन्य स्थितियां हैं, जो ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं जैसे -
गर्भावस्था या प्रसव के बाद पेल्विस की मांसपेशियां कमजोर पड़ना
किसी प्रकार की चोट के कारण नसें क्षतिग्रस्त हो जाना
अल्कोहल, कैफीन या किसी प्रकार की दवा तो मूत्राशय को तेजी से भर देती है या मस्तिष्क को गलत संकेत देती है
मूत्र प्रणाली में संक्रमण होना जिसके कारण भी मस्तिष्क को गलत संकेत मिल सकता है
मोटापा बढ़ना जिससे मूत्राशय पर अधिक दबाव पड़ जाता है और उसकी क्षमता कम हो जाती है
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होना जिसके कारण भी मूत्र असंयमिता जैसे लक्षण हो सकते हैं
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का निदान
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का निदान आमतौर पर यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर द्वारा किया जाता है। जब आपको निदान के लिए अस्पताल बुलाया जाता है, तो डॉक्टर सबसे पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे जानते हैं, जिसमें आपके स्वास्थ्य से संबंधित पिछली जानकारियां ली जाती हैं। साथ ही साथ डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करते हैं, जिससे पेट, पेल्विस, गुदा और अन्य आसपास के अंगों की जांच की जाती है। आपको कुछ हफ्तों का इस्तेमाल करने को कहा जा सकता है, जिसमें आपको यह लिखने की सलाह दी जाती है कि आप कितनी बार बाथरूम जा रहे हैं और कितनी बार आपका यूरिन लीक हो रहा है। ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम की पुष्टि करने के लिए निम्न टेस्ट भी मदद कर सकते हैं -
यूरिन टेस्ट
ब्लैडर स्कैन
इलेक्ट्रोमायोग्राफी
वीडियो यूरोडायनामिक
सिस्टोस्कोपी
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम की रोकथाम
अपनी जीवनशैली में कुछ अच्छे बदलाव लाकर ओवरएक्टिव ब्लैडर विकसित होने या उसके गंभीर होने से रोकथाम करने में मदद मिल सकती हैं, जैसे -
आहार में बदलाव - जितना हो सके कैफीन, अल्कोहल, कृत्रिम मिठास, सोडा और चॉकलेट वाले खाद्य व पेय पदार्थ न लें।
शरीर का वजन कम करें - अच्छा व संतुलित आहार लेकर और नियमित रूप से व्यायाम करके शरीर का वजन बढ़ने से रोका जा सकता है, जो ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम होने के खतरे को भी कम करता है।
ब्लैडर ट्रेनिंग - कीगल एक्सरसाइज समेत कई ऐसे व्यायाम हैं, जो ब्लैडर कंट्रोल में सुधार कर सकते हैं।
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का इलाज
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का इलाज कई अलग-अलग उपचार तरीकों से किया जा सकता है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
दवाएं - कुछ मामलों में दवाओं की मदद से ही ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें डॉक्टर एंटीमस्कैरिनिक्स (Antimuscarinics) दवाएं दे सकते हैं, जो मूत्राशय के कुछ तंत्रिका आवेगों को मस्तिष्क तक जाने से रोक सकते हैं। ऐसा होने पर मूत्राशय की क्षमता बढ़ जाती है और साथ ही मांसपेशियां भी शांत हो जाती हैं। हालांकि, इन दवाओं से कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।
सर्जरी - ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम समस्याओं के लिए सर्जरी का उपयोग आमतौर पर कम ही मामलों में होता है। ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम का इलाज करने के लिए कई सर्जिकल प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, सर्जरी प्रोसीजर का इस्तेमाल सिर्फ उन मामलों में ही किया जाता है, जब इस समस्या का इलाज करने का कोई और ऑप्शन न हो और इससे आपकी जीवनशैली प्रभावित हो रही हो।
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज - कुछ मालमों में ही पेल्विस की एक्सरसाइज करने से ही ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इन व्यायामों की मदद से मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जा सकता है। हालांकि, एक्सरसाइज की मदद से समस्या को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है।
नर्व स्टीमुलेशन - इसमें न्यूरोमोड्यूलेशन थेरेपी के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी मदद से ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम से हो रही समस्याओं को कम किया जा सकता है। इस थेरेपी के दौरान उस नस को विद्युत संकेत भेजे जाते हैं, मूत्राशय के संकेत को मस्तिष्क तक पहुंचाती है। इस थेरेपी का मुख्य लक्ष्य मूत्राशय से मस्तिष्क तक संकेत जाने की प्रक्रिया में सुधार करना है, ताकि गलत संकेत न जा सकें। नर्व स्टीमुलेशन दो प्रकार की होती है