अंडाशय यानी ओवरी महिलाओं के शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो अंडे और डिंब बनाता है और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरौन दोनों हार्मोन भी बनाता है। ये हार्मोन महिलाओं के शरीर को विकसित करने और मासिक धर्म को नियमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा गर्भावस्था में भी ये हार्मोन बहुत जरूरी होते हैं। ओवेरियन सिस्ट होने पर अंडाशय बुलबुले या थैली के समान दिखने वाली संरचना बन जाती है। जिसे सिस्ट कहा जाता है। ये सिस्ट अलग-अलग आकार की हो सकती हैं और इनमें कई बार पानी, गैस या अन्य कोई पदार्थ भर जाता है। हालांकि, जरूरी नहीं है कि यह कोई ट्यूमर का संकेत हो, लेकिन फिर भी यह कई बार यह कैंसर से संबंधित हो सकती है। अक्सर ओवेरियन सिस्ट से किसी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं और ये सिस्ट अंडाशय में बिना किसी प्रकार का संकेत या लक्षण दिए मौजूद रह सकती है। कुछ मामलों में महिलाओं को उनके अंडाशय में सिस्ट का तब तक पता नहीं चल पाता है, जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती और उसे तुरंत इलाज की आवश्यकता नहीं पड़ती है। कई ओवेरियन सिस्ट संबंधी समस्याएं बिना सर्जरी के भी ठीक की जा सकती हैं।
ओवेरियन सिस्ट के कई प्रकार हैं जो अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं। महिलाओं को प्रभावित करने वाले ओवेरियन सिस्ट के चार प्रमुख प्रकार, जो निम्न हैं -
फिजियोलॉजिकल सिस्ट - ओवेरियन सिस्ट का यह प्रकार आमतौर पर धीरे-धीरे अपने आप ठीक हो जाते हैं और हो सकता है अगले मासिक धर्म के समय में फिर से विकसित हो जाएं। अगर सिस्ट अपने आप गायब नहीं हुई है और इसका आकार 3 से 5 सेंटीमीटर तक बढ़ गया है, तो इन्हें सिस्टिक कहा जाता है। इसके अन्य दो प्रकार निम्न हैं -
फॉलिक्युलर सिस्ट
कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट
बिनाइन सिस्ट - ओवेरियन सिस्ट के इस प्रकार में विकसित होने वाली सिस्ट अलग-अलग आकार की हो सकती हैं और अंडाशय के विभिन्न हिस्सों में विकसित हो सकती हैं। अक्सर ये कैंसर से संबंधित नहीं होती हैं और न ही किसी प्रकार के दर्द या अन्य तकलीफ का कारण बनती हैं।
मैलिग्नैंट सिस्ट - ओवेरियन सिस्ट का मालिग्नेंट प्रकार आमतौर पर ओवरी के एपिथेलियम, फैलोपियन ट्यूब और प्राइमरी पेरिटोनियल पर मौजूद होते हैं। हालांकि, 40 साल से कम उम्र वाली महिलाओं में ओवरी कैंसर के मामले कम पाए जाते हैं।
एंडोमेट्रियोमा - ओवेरियन सिस्ट के इस प्रकार में अंडाशय पर विकसित होने वाली सिस्ट आमतौर पर रक्त से भरी होती हैं। एंडोमेट्रियल टिशू जो ओवरी के ऊपर विकसित होते हैं, वे रक्त से भरी छोटी-छोटी सिस्ट बनाते हैं और एक निश्चित समय बाद सिस्ट से पानी आने लगता है।
ओवेरियन सिस्ट के लक्षण
कई बार ओवेरियन सिस्ट के कारण महिलाओं को किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, समय के साथ-साथ निम्न लक्षण व संकेत विकसित हो सकते हैं -
पेट में दर्द रहना - जब अंडाशय में कोई सिस्ट बन जाती है, तो महिलाओं को आमतौर पर पेट में दर्द की शिकायत रहती है। पेट में दर्द आमतौर पर सिस्ट के फटने के कारण होता है। सिस्ट के फटने, तेजी से बढ़ने, मुड़ने या ब्लीडिंग होने के कारण भी महिलाओं को पेट में दर्द की शिकायत हो सकती है।
मासिक धर्म संबंधी असामान्यताएं - मासिक धर्म में असामान्यताएं व अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण सिस्ट का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, सिस्ट के साथ आपको आमतौर पर मासिक धर्म में देरी होना और सिस्ट फटने के कारण मासिक धर्म के दौरान अधिक ब्लीडिंग होना जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।
जननांगों में दर्द - एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान गुदा (रेक्टम) व उसके आसपास के हिस्सों में दर्द हो सकता है। साथ ही यौन संबंध बनाते समय गुप्तागों में भी दर्द हो सकता है। अगर सिस्ट के दौरान मूत्राशय पर दबाव पड़ रहा है, तो इस कारण भी दर्द हो सकता है।
इसके अलावा ओवेरियन सिस्ट से कुछ अन्य लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं, जैसे पेट में सूजन व पेट भरा हुआ महसूस होना आदि। वहीं अगर सिस्ट के कारण हार्मोन में कुछ गड़बड़ी हो रही है, तो इससे महिलाओं के चेहरे पर बाल आने लग सकते हैं।
डॉक्टर को कब दिखाएं
कई बार ओवरी में सिस्ट होने के कारण भी किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं, इसलिए समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहना चाहिए। हालांकि, अगर किसी महिला को उपरोक्त में से किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
ओवेरियन सिस्ट के कारण
ओवेरियन सिस्ट के अलग-अलग प्रकार कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
फॉलिक्युलर सिस्ट - मासिक धर्म के अनुसार फॉलिक्युलर सिस्ट बनने लगती है, जब इसका आकार बढ़ जाता है तो अंडा निषेचित नहीं हो पाता है।
बिनाइन सिस्ट - जब ओवरी के ऊतक विकसित होकर शरीर के किसी अन्य हिस्सों में ऊतकों को विकसित करते हैं, तो उस स्थिति को बिनाइन सिस्ट कहा जाता है। बिनाइन सिस्ट का आकार अगर 5 सेंटीमीटर से बढ़ गया है, तो यह खतरनाक हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आकार बड़ा होने के बाद यह अपने आप मुड़ने लग जाता है, जिससे दर्द व अन्य तकलीफ होने लगती हैं।
मैलिग्नैंट सिस्ट - यह आमतौर पर एपिथेलियम या ओवरी की कोशिकाओं की सतह पर विकसित होता है। यह भी हो सकता है कि कुछ समय तक सिस्ट से किसी प्रकार का कोई गंभीर लक्षण न महसूस हो, हालांकि, जब स्थिति बढ़ जाती है तो परेशान कर देने वाले लक्षण पैदा हो सकते हैं।
एंडोमेट्रियोमा - यह एंडोमेट्रियोसिस नामक समस्या के कारण होता है, जिसमें कोशिकाएं गर्भाशय के अंदर असामान्य रूप से बढ़ने लग जाती हैं।
ओवेरियन सिस्ट का निदान
अगर महिला को ओवेरियन सिस्ट का कोई लक्षण महसूस नहीं हो रहा है, तो उसका लक्षण महसूस होना मुश्किल हो सकता है। ओवेरियन सिस्ट के निदान में आमतौर पर निम्न टेस्ट कराए जा सकते हैं -
शारीरिक परीक्षण - इसमें महिला से उसको महसूस हो रहे लक्षणों के बारे में पूछा जाता है और अन्य शारीरिक जांच की जाती हैं।
अल्ट्रासाउंड - अंडाशय में बनी सिस्ट के आकार, आकृति, स्थिति और गंभीरता का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।
सीटी स्कैन - हालांकि, प्रजनन उम्र में महिलाओं का सीटी स्कैन नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि सीटी स्कैन के दौरान निकलने वाली शक्तिशाली एक्स रे विकिरणें उसकी प्रजनन क्षमता को जीवनभर के लिए प्रभावित कर सकती है। हालांकि, दूसरी परिस्थितियों में सीटी स्कैन की मदद से सिस्ट के बिनाइन या मैलिग्नैंट होने का पता लगाया जा सकता है।
ब्लड टेस्ट - कैंसर आदि का पता लगाने के लिए सीए-125 नामक ब्लड टेस्ट किया जा सकता है। इस टेस्ट की मदद ये यह पता लगता है कि ओवेरियन सिस्ट कहीं किसी प्रकार के कैंसर से तो नहीं जुड़ी है।
ओवेरियन सिस्ट का इलाज
ओवेरियन सिस्ट का इलाज आमतौर पर तीन अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है, महिला की उम्र क्या है, सिस्ट का आकार क्या है और अल्ट्रासाउंड में सिस्ट कैसी दिख रही है। ओवेरियन सिस्ट के इलाज में निम्न शामिल हैं -
मेडिकल ऑब्जरवेशन - अगर महिला की उम्र 40 साल के आसपास है और उसके मासिक धर्म सही चल रहे हैं, तो उन्हें आमतौर पर फॉलिक्युलर सिस्ट होती है। आमतौर पर इस सिस्ट से किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। निदान के दौरान मिली समस्याओं के अनुसार 40 के आसपास की उम्र में हुई ओवेरियन सिस्ट में नियमित रूप से डॉक्टर से जांच जरूर होती है और मैलिग्नैंट ओवेरियन सिस्ट में तुरंत इलाज शुरू करने की आवश्यकता पड़ती है।
सर्जरी - अगर ओवेरियन सिस्ट के दौरान ट्यूमर विकसित हो गया है, तो बिनाइन या मैलिग्नैंट दोनों ही स्थितियों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। अगर बिनाइन ट्यूमर फट कर रक्तस्राव हो रहा है, तो यह एक इमरजेंसी स्थिति हो सकती है। अगर निदान के दौरान कैंसर या कैंसर युक्त ट्यूमर मिला है, तो उसे फैलने से रोकने के लिए तुरंत सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
दवाएं - ओवेरियन सिस्ट का इलाज करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, हालांकि, फंक्शनल सिस्ट का इलाज करने में ये प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाती हैं।