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ऑप्टिक नर्व एक महत्वपूर्ण तंत्रिका होती है, क्योंकि यह हमारी दृष्टि के लिए आवश्यक होती है। हम जो भी देख रहे होते हैं या जो भी हमारे रेटिना में बन रहा होता है, उसकी जानकारी मस्तिष्क तक पहुंचाना ऑप्टिक नर्व का कार्य होता है। ये तंत्रिका ही हमें अच्छे से देख पाने में मदद करती है। ऑप्टिक न्यूराइटिस में इन तंत्रिकाओं में सूजन आ जाती है और इस कारण से धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो जाती हैं। ऑप्टिक न्यूराइटिस को रेट्रोबल्बार न्यूराइटिस (Retrobulbar neuritis) भी कहा जाता है। ऑप्टिक नर्व में जितनी सूजन व लालिमा बढ़ती है, ऑप्टिक न्यूराइटिस के लक्षण उतने ही गंभीर हो जाते हैं। ऑप्टिक न्यूराइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन इसके ज्यादातर मामले 30 साल के बाद ही दिखाई देते हैं। इसके अधिकतर मामले अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में व्यक्ति की दृष्टि स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऑप्टिक न्यूराइटिस के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे रोग भी शामिल हैं।
ऑप्टिक न्यूराइटिस के मुख्य दो प्रकार हैं, जो निम्न हैं -
ऑप्टिक न्यूराइटिस एक या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है। ऑप्टिक न्यूराइटिस के लक्षण अचानक से या फिर कुछ दिनों या हफ्तों बाद विकसित हो सकते हैं। समय पर इलाज न किया जाए तो ऑप्टिक न्यूराइटिस के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। ऑप्टिक न्यूराइटिस के प्रमुख लक्षणों में निम्न शामिल हैं -
हालांकि, ऑप्टिक न्यूराइटिस के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, हालांकि, एक्सपर्ट्स के अनुसार निम्न कारणों से यह रोग हो सकता है -
ऑप्टिक न्यूराइटिस का निदान मरीज के स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारियों (मेडिकल हिस्ट्री) के आधार पर किया जाता है। निदान के दौरान नेत्र विशेषज्ञ आंख के पिछले हिस्से में मौजूद असामान्यताओं का पता लगाते हैं। परीक्षण के दौरान ऑप्टिक नर्व में किसी प्रकार की समस्या की जांच की जाती है, ताकि ऑप्टिक न्यूराइटिस का पता लगाया जा सके। अगर डॉक्टर को लगता है कि आपको ऑप्टिक न्यूराइटिस हो सकता है, तो पुष्टि के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं -
ऑप्टिक न्यूराइटिस के अंदरूनी कारणों का इलाज करके इसके फिर से लक्षण विकसित होने की स्थिति को रोका जा सकता है। अगर ट्यूबरकुलोसिस या सिफिलिस जैसे किसी संक्रमण के कारण ऑप्टिक न्यूराइटिस की समस्या हुई है, तो एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से इससे बचाव किया जा सकता है। वहीं अगर विषाक्त पदार्थों के कारण यह समस्या हुई है, तो विषाक्त पदार्थों को निकालकर और विटामिन सप्लीमेंट देकर फिर से ऑप्टिक न्यूराइटिस के लक्षणों को विकसित होने से रोका जा सकता है।
कुछ मामलों में ऑप्टिक न्यूराइटिस का इलाज करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है, क्योंकि यह समस्या लगभग 13 हफ्तों के समय के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। इसके लगभग 85 प्रतिशत मामलों के दौरान व्यक्ति की दृष्टि स्थायी रूप से प्रभावित हो जाती है। हालांकि, अगर ऑप्टिक न्यूराइटिस की स्थिति गंभीर है, तो इलाज के रूप में मरीज को इंट्रावेनस कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं दी जाती हैं, जिससे उसके स्वस्थ होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। हालांकि, स्टेरॉयड दवाओ का इस्तेमाल करना ऑप्टिक न्यूराइटिस के लक्षण फिर से विकसित होने के खतरे को भी बढ़ा सकते हैं। वहीं कुछ लोगों को स्टेरॉयड दवाओं के साइड इफेक्ट्स के रूप में पेट खराब होना, मुंह का स्वाद बिगड़ना, नींद संबंधी समस्याएं, चिंता विकार, चिड़चिड़ापन और फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। ऑप्टिक न्यूराइटिस से ग्रसित व्यक्ति को इंटरफेरॉन थेरेपी में इंजेक्शन की मदद से दवाएं दी जा सकती हैं, जो मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने के खतरे को कम करती हैं। इलाज के दौरान और उसके बाद डॉक्टर से सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।