Advertisement

मायोकार्डियल इंफार्क्शन (दिल का दौरा): लक्षण, कारण, जोखिम कारक और बचाव के तरीके

Dr Sudhir Bhatnagar
Internal Medicine

verified
Read in: English

मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एमआई) (Myocardial infarction), जिसे हिंदी की आम बोलचाल की भाषा में दिल का दौरा कहा जाता है, एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों में होने वाली रक्त की आपूर्ति गंभीर रूप से कम हो जाती है या फिर उसमें बाधा पैदा होती है। अगर आपकी नस या धमनी में रक्त का थक्का बन जाता है तो खून की आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिसके कारण हृदय की मांसपेशी ऑक्सीजन के लिए आतुर हो जाती है। इस स्थिति में थोड़े समय के भीतर ही हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाएं खत्म होने लग जाती हैं, जिससे दिल को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचता है। पुरुषों में 45 वर्ष से अधिक और महिलाओं में 55 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने की समस्या को आम माना जाता है हालांकि महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने के लक्षण पुरुषों से थोड़े अलग होते हैं। दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में अगर चिकित्सा देखभाल समय पर न मिले तो ये स्थिति घातक रूप ले लेती है और जानलेवा साबित हो सकती है। बता दें कि दिल के दौरे की स्थिति में प्राथमिक उपचार, सीने में दर्द से पीड़ित व्यक्ति के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है। सीने में दर्द, दिल के दौरे का एक प्रमुख लक्षण है। दरअसल सीने में दर्द तब होता है, जब ऑक्सीजन की कमी वाली मांसपेशी से रसायन निकलने लगता है। अगर हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली मांसपेशी को 8-12 घंटों के भीतर ठीक कर दिया जाता है, जो नुकसान को कम किया जा सकता है, इसलिए दिल के दौरे के उपचार में समय की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

मायोकार्डियल इंफार्क्शन के लक्षण

1. सीने में दर्द को एनजाइना या सीने के ठीक बीच में होने वाली बेचैनी के रूप में भी जाना जाता है। आपको सीने पर भारी-भारी जैसा महसूस होगा साथ ही आपको दबाव, दर्द, जलन, सुन्नपन जैसा भी महसूस हो सकता है, जो कुछ मिनटों से लेकर ज्यादा वक्त तक रह सकता है। लोग कभी-कभी इसे अपच या गैस भी समझ लेते हैं। 2. हाथ, कंधे, पीठ, जोड़ों या पेट सहित शरीर के ऊपरी अंगों में बेचैनी महसूस होना। 3. सांस लेने में तकलीफ 4. ठंड लगकर पसीना आना 5. सीने में जलन 6. जी मिचलाना 7. उल्टी 8. चक्कर आना, कमजोरी या चिंता महसूस होना 9. दिल की धड़कन का बढ़ना-घटना अगर आपको ऊपर लिखे लक्षणों में से कोई भी लक्षण 5 मिनट से अधिक समय तक महसूस होता है, तो तुरंत अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाकर दिखाएं।

मायोकार्डियल इंफार्क्शन के कारण और जोखिम कारक

कारण मायोकार्डियल इंफार्क्शन या दिल का दौरा पड़ने का पहला कारण है प्लाक बनने से धमनियों में ऑक्सीजन की रुकावट। बहुत कम मामले ऐसे होते है, जिसमें अन्य चिकित्सीय स्थितियों जैसे जन्मजात असामान्यताओं, रूमेटाइड अर्थराइटिस, ल्यूपस एरिथेमेटोसस के परिणामस्वरूप हो सकता है। यह कोकीन या अन्य नशीली दवाओं या फिर मादक पदार्थों के सेवन से भी हो सकता है। किसी व्यक्ति को दिल का दौरा तब पड़ता है जब रक्त के थक्के के कारण उसकी कोरोनरी धमनी में ऑक्सीजन की सप्लाई में रुकावट पैदा होती है। कोरोनरी धमनी के अंदर ये रक्त का थक्का रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमने के कारण होता है, जिससे रक्त का प्रवाह बहुत धीमा हो जाता है। अगर ऑक्सीजन कम मात्रा में पहुंचती है तो रक्त का थक्का बने बिना भी दिल का दौरा पड़ सकता है। दिल के दौरे के लक्षण और जीवित रहने की संभावना कोरोनरी धमनी में होने वाली रुकावट के आधार पर निर्भर करती है। दिल के दौरे के जोखिम कारकों में शामिल हैं: भारत में दिल के दौरे के लिए धूम्रपान और अनकंट्रोल्ड डायबिटीज को प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। अन्य जोखिम कारकों में शामिल हैं: 1. हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल 2. हाई ब्लड प्रेशर 3. कम उम्र में परिवार के अन्य सदस्यों को रहा कोरोनरी धमनी रोग 4. मोटापा 5. गतिहीन जीवनशैली महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। हालांकि मेनोपॉज वाली महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

मायोकार्डियल इंफार्क्शन की रोकथाम कैसे करें

दिल के दौरे को उसके जोखिम कारक का पता लगातर ही रोका जा सकता है। आपको ध्यान देना चाहिए कि आप कहीं किसी कोरोनरी धमनी की बीमारी से तो ग्रस्त नहीं हैं। इसके अलावा धूम्रपान से बचें, अपना वजन कंट्रोल करें, कोलेस्ट्रॉल लेवल को दुरुस्त बनाए रखें, एक्सरसाइज करें, नमक के सेवन का ख्याल रखें और अपनी दवाएं नियमित रूप से खाते रहें। वे महिलाएं, जो मेनोपॉज के करीब हैं उन्हें एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी के बारे में सोचना चाहिए।

मायोकार्डियल इंफार्क्शन का निदान

जब आप दिला का दौरा पड़ने पर किसी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाते हैं तो आपके शारीरिक लक्षणों को देखा जाता है और उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है। अगर डॉक्टर को पता चलता है कि आपको दिल का दौरा पड़ा है तो वे कई टेस्ट करने के बारे में कह सकता हैः 1. 12-लीड ईसीजी (12-lead ECG): दिल का दौरा पड़ा है या नहीं डॉक्टर इसका पता लगाने के लिए जो सबसे पहला टेस्ट करते हैं वो होता है 12-लीड ईसीजी। डॉक्टर इस टेस्ट को किसी भी जगह पर कर सकता है फिर चाहे वह रास्ते में ही क्यों न हो। ईसीजी की मदद से आपको ये जानने में मदद मिल सकती है कि आपको किस प्रकार का दिल का दौरा पड़ा है और किस हिस्से में हुआ है। इस दौरान आपके दिल की धड़कन और हार्ट रिदन को मॉनिटर किया जाता है। 2. ब्लड टेस्ट (Blood tests) : हमारे हृदय की गतिविधियों की जांच के लिए अलग-अलग तरह के बायोकेमिकल मार्कर को देखा जाता है। ये मार्कर आपके शरीर की कोशिकाओं में मौजूद होते हैं। जब आपके दिल के किसी एक हिस्से में चोट लगती है, तो ये बायोकेमिकल मार्कर रक्तप्रवाह में निकल जाते हैं। उनके स्तर को मापने से दिल के दौरे के आकार और उसके समय का पता चल सकता है। डॉक्टर दूसरी संभावना को देखते हुए अन्य प्रकार के ब्लड टेस्ट की भी सलाह दे सकता है। 3. इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): दिल के दौरे के दौरान और बाद में दिल की कार्यप्रणाली और असामान्यता के बारे में जानने के लिए एक इकोकार्डियोग्राम का उपयोग किया जा सकता है। इसका उपयोग दिल के दौरे के दौरान किसी प्रकार के नकसान का पता लगाने में मदद करता है। 4. कार्डिएक कैथीटेराइजेशन (Cardiac catheterisation): कार्डिएक कैथीटेराइजेशन दिल का दौरा पड़ने के शुरुआती घंटे में किया जाता है खासकर तब, जब दवाएं अपना काम नहीं करती हैं। कैथीटेराइजेशन रुकी हुई धमनी की पहचान कर यह तय करने में मदद कर सकता है कि कौन सी प्रक्रिया रोगियों की आवश्यकताओं के अनुरूप होगी।

मायोकार्डियल इंफार्क्शन का इलाज

दिल का दौरा पड़ने पर उपचार तुरंत शुरू हो जाता है क्योंकि डॉक्टर का लक्ष्य आपकी हृदय की मांसपेशियों को और अधिक नुकसान होने से बचाना होता है। उपचार प्रक्रिया में शामिल चीजें है: 1. दवाएं: ये दवाएं धमनी में बनने वाले रक्त के थक्कों को खोलने में मदद करती हैं और प्लेटलेट्स को प्लाक बनने वाली जगह पर जमा होने से बचाती हैं। इतना ही नहीं ये दवाएं प्लेटलेट्स को भी स्टेबल रखने के साथ-साथ आगे होने वाली क्षति को रोकती हैं। दिल का दौरा पड़ने के 30 मिनट भीतर ही ये दवाएं दी जाती हैं ताकि हृदय की मांसपेशियों के नुकसान को कम किया जा सके। इन दवाओं में शामिल हैं: एस्पिरिन स्टैटिन हेपरिन एंटीप्लेटलेट दवाएं थ्रोम्बोलाइटिक्स दिल का दौरा पड़ने के बाद दी जाने वाली अन्य दवाएं आपके दिल पर पड़ने वाले दबाव को कम करती हैं, रक्त वाहिकाओं को फैलाती हैं, दर्द को कम करने में मदद करती हैं। 2. इंटरवेंशनल प्रोसीजर : दिल का दौरा पड़ने के बाद आपके दिल की स्थिति, धमनियों और हुए नुकसान का पता लगाने के लिए कार्डियक कैथीटेराइजेशन का प्रयोग किया जा सकता है। कभी-कभी अवरुद्ध धमनियों को एंजियोप्लास्टी और स्टेंट के उपयोग से खोला जाता है। इन प्रक्रियाओं को अक्सर किसी भी बंद नस को खोलने या थक्के को हटाने के लिए थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी के साथ जोड़ा जाता है, जिसे इंटरवेंशनल प्रोसीजर कहते हैं। 3. कोरोनरी धमनी बाईपास सर्जरी: ये सर्जरी तब की जाती है जब हृदय की क्षति इस हद तक पहुंच गई हो कि उस क्षतिग्रस्त धमनी की जगह नई नस लगानी हो।

जीवन शैली में बदलाव कर कंट्रोल किया जा सकता है दिल के दौरे का खतरा

दिल का दौरा पड़ने के बाद डर या खुद को भ्रमित महसूस करना सामान्य है। भविष्य में इस स्थिति को रोकने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैंः 1. किसी अन्य हृदय संबंधी समस्या के जोखिम को कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को तय समय पर लें। आप फोन या वॉच में अलर्ट नोटिफिकेशन का उपयोग कर सकते हैं, जो आपको याद दिलाने में मदद करेगा। 2. समय-समय पर डॉक्टर से फॉलो-अप लेते रहें और अपने लक्षणों, दुष्प्रभावों आदि पर नजर रखें ताकि किसी भी परेशानी का पता चल सके। 3. कार्डिएक रिहैबिलिटेशन में भाग लें क्योंकि ये एक ऐसा प्रोग्राम है, जो दिल का दौरा पड़ने के बाद आपकी रिकवरी में मदद करने के लिए तैयार किया गया है। 4. दिल का दौरा पड़ने के बाद डर या भ्रमित महसूस करना सामान्य है इसके लिए आप अपने निकट प्रियजनों से मिलें क्योंकि इससे आपको अपना तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। 5. एक्सरसाइज करें, स्वस्थ भोजन करें, धूम्रपान छोड़ें, तरल पदार्थ का सेवन करें और ज्यादा से ज्यादा हरी पत्तेदार व रेशेदार सब्जियां खाएं, जो आपके ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को कंट्रोल करने में आपकी मदद करेंगी।

मायोकार्डियल इंफार्क्शन का निदान और जटिलताएं

निदान पिछले दो दशक में दिल के दौरे से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य में काफी सुधार देखा गया है। निरंतर प्रयास और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के बावजूद बहुत से लोगों की अस्पताल पहुंचते ही या फिर अस्पताल पहुंचने से ही मौत हो जाती है। अगर इस रोग का पता तुरंत लग जाए तो रोगी की जान बचाई जा सकती है। बहुत से लोग स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से बाहर निकलते समय बहुत अच्छा महसूस करते हैं। जटिलताएं दिल का दौरा पड़ने के बाद आपको कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें ठीक करने में आपको लंबा वक्त लग सकता है। इन जटिलताओं में शामिल हैं: 1. एर्रीथिमिया ( Arrhythmia) : दिल का दौरा पड़ने के बाद किसी भी व्यक्ति के दिल की प्राकृतिक लय में गड़बड़ी हो सकती है, जिसके लिए डॉक्टर एक अस्थायी पेसमेकर लगा सकते हैं। पेसमेकर एक प्रकार का इलेक्ट्रोड है जो हृदय को नियमित रूप से धड़कने में मदद करता है। यह इलेक्ट्रोड आपको हर जगह साथ ले जाना होता है, जो कि एक छोटे से बॉक्स में होता है। कभी-कभी इसे स्किन के नीचे भी लगया जाता है। 2. सीने में दर्द: सीने में दर्द की शिकायत को एनजाइना के रूप में भी जाना जाता है जो आमतौर पर हृदय की मांसपेशियों में रक्त आपूर्ति सही प्रकार से न हो पाने के कारण होती है और ये दिल का दौरा पड़ने से पहले या बाद में हो सकती है। 3. हार्ट फेल्योर: अगर आपका दिल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है तो हार्ट पंपिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप आपके शरीर में रक्त, अंगों को ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने में असमर्थ होत् है। आपको सांस फूलने, थकान और सूजन जैसे लगातार लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इन लक्षणों के इलाज के लिए निरंतर मेडिकल सहयोग की आवश्यकता होती है।