मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम या मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक प्रकार का श्वसन संबंधी रोग है। यह एक प्रकार का वायरल संक्रमण है जो कोरोना वायरस के एक प्रकार के कारण होता है। मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस को को मर्स-कोव (MERS-Cov) के नाम से भी जाना जाता है। मर्स-कोव कई बार गंभीर रूप धारण कर लेता है और ऐसे में 4 लोगों में से 3 लोगों की मृत्यु हो जाती है। मर्स का पहला मामलों 2012 में पाया गया था। 2013 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World health organization) ने मर्स-कोव संक्रमण को वैश्विक खतरा बता दिया था। मर्स संक्रमण किसी को भी हो सकता है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। सउदी अरब और अमेरिका जैसे देशों में मर्स कोव से काफी मृत्यु हो चुकी हैं, हालांकि, अभी तक इसके मामले भारत में नहीं पाए गए हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस रोग के बारे में सभी को जानकारी होनी चाहिए और समय से पहले ही उचित सावधानियां बरत लेनी चाहिए।
मर्स-कोव के प्रकार
मर्स-कोव खुद कोरोनावायरस का एक प्रकार है। कोरोनावायरस के अभी तक तीन प्रकार पाए जा चुके हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
कोविड -19 - कोरोना के इस प्रकार के बारे में हर कोई जानता है और इसे कोरोना वायरस डिजीज 2019 के नाम से भी जाना जाता है। 2020 में यह वायरस महामारी के रूप में पूरी दुनिया में फैल गया था।
मर्स-कोव - मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मर्स श्वसन तंत्र में होने वाली एक प्रकार की बीमारी है। यह वायरस पहली बार 2012 में सऊदी अरब में पाया गया था।
सार्स-कोव - इसका पूरा नाम सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह रोग पहली बार फरवरी 2003 में एशिया में पाया गया था। हालांकि, बाद में कुछ मामलों का संबंध नवंबर 2002 से जुड़ा पाया गया।
मर्स-कोव के लक्षण
मर्स कोव से होने वाले संक्रमण से कई बार किसी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं और कुछ मामलों में व्यक्ति लंबे समय तक बीमार पड़ जाता है और यहां तक कि उसकी मृत्यु भी हो जाती है। मर्स कोव के शुरुआती लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -
बुखार
खांसी
सांस लेने में दिक्कत
नाक बहना
निमोनिया (कुछ मामलों में)
जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है (आमतौर पर वृद्धावस्था के कारण) या फिर जिन लोगों को कोई अन्य क्रोनिक बीमारी है अक्सर इन लोगों में मर्स के मामले काफी गंभीर पाए जाते हैं और साथ ही ऐसे लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है। इसके अलावा मर्स कोव के अन्य लक्षणों में आमतौर पर गले में दर्द, सिरदर्द और ठंड लगना आदि शामिल है। मर्स-कोव से संक्रमित होकर कुछ लोगों को जठरांत्र पथ (Gastrointestinal) से संबंधित लक्षण भी हो सकते हैं जैसे दस्त, मतली और उल्टी आदि। वहीं कुछ लोगों को गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं जिनमें निमोनिया व किडनी खराब होना आदि शामिल है। इस रोग के कुछ लक्षण आमतौर पर सामान्य सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। मर्स कोव संक्रमण के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 14 दिन बाद विकसित होते हैं। जब मर्स कोव संक्रमण को काफी समय हो गया है, तो आमतौर पर निम्न लक्षण विकसित होते हैं -
सांस लेने में दिक्कत होना
मांसपेशियों में दर्द महसूस होना
किडनी क्षतिग्रस्त होना
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर किसी व्यक्ति को उपरोक्त में से कोई भी लक्षण हो रहा है, तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। इसके अलावा अगर आप हाल ही में किसी ऐसी जगह यात्रा करने गए थे जहां पर मर्स-कोव के मामले मिल रहे हैं, तो ऐसे में भी आपको डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
मर्स-कोव के कारण
एनआईएआईडी (National institute of allergy and infectious disease) के अनुसार मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस के कारण ही होता है। रिकॉर्ड किए गए अवलोकनों के अनुसार वायरस के संपर्क में आने के लगभग 2 से 14 दिन बाद इस वायरस के लक्षण पैदा होने लगते हैं। वहीं शरीर में संक्रमण शुरू होने के लगभग 5 दिन बाद व्यक्ति किसी अन्य लोगों में यह संक्रमण फैला सकता है। ऐसा माना जाता है कि सार्स-कोव और मर्स-कोव आमतौर चमगादड़ के शरीर से आए हैं।
मर्स-कोव के जोखिम कारक
एक्सपर्ट्स के अनुसार जिन लोगों को पहले से ही कोई दीर्घकाली स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें मर्स-कोव संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है और उन्हें इस दौरान अधिक जटिलताओं का सामना भी करना पड़ सकता है। निम्न स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित लोगों को मर्स कोव होने का खतरा अधिक रहता है -
कैंसर के रोगी
डायबिटीज के रोगी
फेफड़ों, हृदय या गुर्दे से संबंधित रोग
अन्य लोग जिनकी किसी अन्य कारण से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है
मर्स-कोव का निदान
मर्स कोव का निदान करने के लिए आमतौर पर डॉक्टर निम्न परीक्षण करते हैं -
पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) - मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस का पता लगाने के लिए पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। मार्केट में इसकी टेस्टिंग किट में मौजूद हैं, जो अलग-अलग प्रकारों में 45 से 60 प्रतिशत सेंसिटिविटी के साथ आती हैं। हालांकि, सेंसिटिविटी कम होने के कारण कई बार दो बार टेस्ट करना पड़ सकता है, ताकि सटीक परिणाम की पुष्टि की जा सके। वहीं अगर किट से दोनों बार अलग-अलग परिणाम आते हैं तो कई बार यह टेस्ट किया जा सकता है।
सीटी स्कैन - अध्ययनकर्ताओं के अनुसार सीटी स्कैन तकनीक की मदद से मिलने वाले परिणाम पीसीआर तकनीक से अच्छे नहीं होते हैं वहीं कुछ अध्ययनकर्ताओं का मानना इससे उल्टा है। जॉन्स हॉपकिन्स अरामको हेल्थकेयर के शोधकर्ताओं ने आरटी-पीसीआर और सीटी स्कैन की तुलना करते हुए बताया कि पीसीआर परीक्षणों की तुलना में सीटी स्कैन अधिक संवेदनशील हैं।
मर्स-कोव की रोकथाम
मर्स कोव एक प्रकार का वायरस संक्रमण है, जो पर्याप्त स्वच्छता न रख पाना और इसकी जानकारी की कमी होना इसके फैलने के खतरे को बढ़ाता है। मर्स-कोव संक्रमण को रोकने के लिए कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं जिनमें निम्न शामिल हैं -
फेस मास्क का उपयोग
हाथों को समय-समय पर धोएं
सभी सतहों को स्वच्छ रखें
खांसते या छींकते समय मुंह को टिश्यू या कपड़े से ढकें
संक्रमित लोगों के संपर्क में न आएं
संक्रमित व्यक्तियों के मल, मूत्र, बलगम और लार का सुरक्षित रूप से निपटान करें
अगर आप एख स्वास्थ्य कर्मी हैं, तो उचित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें
मर्स-कोव का इलाज
अभी तक मर्स कोव के इलाज के लिए कोई वैक्सीन या ट्रीटमेंट थेरेपी विकसित नहीं हो पाई है। हालांकि, फिलहाल कई प्रकार की वैक्सीन और दवाओं का पर काम किया जा रहा है, जो इसके इलाज में प्रभावी साबित हो सकती हैं। हालांकि, अभी तक मर्स कोव का इलाज उसके कारण मरीज को हो रहे लक्षणों के आधार पर किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम का समय रहते पता लगाना और उसकी देखभाल शुरू कर देना लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके इलाज के रूप में मरीज को सप्पोर्टिव थेरेपी और सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन दी जाती है। मर्स कोव एक प्रकार का वायरल संक्रमण है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई एंटी वायरल दवा नहीं बन पाई है जो मर्स कोव का इलाज करने में मदद कर सके। हालांकि, रिबाविरिन, लोपिनाविर और रिटोनाविर जैसी दवाओं से मर्स कोव के इलाज में कुछ हद तक मदद मिल सकती है। इसके अलावा लक्षणों के अनुसार कुछ अन्य दवाएं भी दी जा सकती हैं। इलाज के साथ-साथ डॉक्टर निर्देश देते हैं -
शरीर को पर्याप्त आराम दें
रोजाना अपने शारीरिक तापमान की जांच करें
पल्स ऑक्सीमीटर से रोजाना अपने ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल की जांच करें
अगर लक्षणों में किसी भी प्रकार का बदलाव महसूस होता है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें