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पारा विषाक्तता (Mercury poisoning)

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पारा (Mercury) मिट्टी, पानी और यहां तक कि हवा समेत लगभग हर जगह पर मौजूद होता है। शरीर में पारा की अधिक मात्रा होने शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और साथ ही शरीर के सामान्य रूप से कार्य करने की क्षमता को भी प्रभावित कर देता है। शरीर में पारा की अधिकता के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्या को पारा विषाक्तता कहा जाता है। पारा एक प्रकार की धातु है, तो मानव शरीर में आमतौर पर सास लेते समय हवा के माध्यम से, भोजन या पानी के साथ या त्वचा पारा के संपर्क में आने से जाता है। पारा अलग-अलग रूपों में मौजूद होता है, जिनमें तात्विक, वाष्प, कार्बनिक और अकार्बनिक रूप शामिल हैं। इनमें से कोई भी रूप शरीर के अंदर जाने से पारा विषाक्तता हो सकती है। शरीर में पारा जाने से मूड में बदलाव, नींद न आना, मांसपेशियों में ऐंठन और अंगों में कंपन जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।

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पारा विषाक्तता के लक्षण

पारा विषाक्तता से होने वाले लक्षण आमतौर पर पारा के प्रकार और व्यक्ति कितनी मात्रा में इसके संपर्क में आया है, आदि पर निर्भर करते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति में पारा विषाक्तता से होने वाले आम लक्षणों में निम्न शामिल हो सकती हैं -

डॉक्टर को कब दिखाएं?

अगर आपको लगता है कि आप पारा के संपर्क में आ गए हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। अगर आपको पारा के संपर्क में आने का बद लक्षण भी महसूस न हो तो भी आपको डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

पारा विषाक्तता के कारण

आप निम्न स्थितियों में पारा के संपर्क में आ सकते हैं -

  1. सांस के माध्यम से - यह आमतौर पर तब होता है जब कोई व्यक्ति काम के दौरान कोई दुर्घटना होने पर या अज्ञानता के कारण बड़ी मात्रा में पारा धातु की भाप या धुएं को सांस के माध्यम से शरीर के अंदर ले लेता है। ऐसी स्थितियां आमतौर पर तब होती है जब पारा से संबंधित कोई प्रोडक्ट (जैसे थर्मामीटर) टूटता है और उसमें मौजूद पारा हवा में मिल जाता है। जब कोई व्यक्ति इस हवा में सांस लेता है, तो ऐसे में पारा विषाक्तता हो सकती है।
  2. निगल कर - इस कारण से पारा विषाक्तता सबसे ज्यादा होती है। हवा में मौजूद तरल पारा आमतौर पर पानी की सतहों पर बैठता है जहां से वह मछलियों व अन्य जलीय जानवरों के शरीर में पहुंच जाता है। कई मछलियों और अन्य जलीय जानवरों के शरीर में जाकर पारा एक विषाक्त पदार्थ बन जाता है, जिसे मिथाइल मरकरी (Methyl Mercury) कहा जाता है। इन मछली व जलीय जानवरों का सेवन करने से पारा विषाक्तता हो सकती है। इस बात का पता होना भी जरूरी है कि मछलियों व अन्य जलीय जानवरों के शरीर से पारा को साफ नहीं किया जा सकता है। वहीं कई बार डेंटल फिलिंग में भी पारा का इस्तेमाल किया जाता है और इस कारण से भी कुछ लोगों को पारा विषाक्तता होने का खतरा बढ़ जाता है।
  3. त्वचा के संपर्क में आकर - अगर पारा तरल या अन्य किसी भी कंपाउंड (जैसे बैटरी या कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) के रूप में त्वचा के संपर्क में आता है, तो ऐसे में त्वचा के ऊतक इसे अवशोषित कर लेते हैं। अधिक मात्रा में इसके संपर्क में आने के कारण भी आपको पारा विषाक्तता होने का खतरा बढ़ सकता है।

पारा विषाक्तता का निदान

पारा विषाक्तता का निदान करना कई बार थोड़ा मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इसके दौरान महसूस होने वाले लक्षण आमतौर पर अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी विकसित हो जाते हैं। उदाहरण के लिए पारा विषाक्तता से विकसित होने वाले लक्षण कई बार पार्किंसंस डिजीज और मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षणों से मेल खाते हैं। हालांकि, अगर आपको पता है कि आप पारा के संपर्क में आए हैं या आपको शक है कि ऐसा हो सकता है, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। पारा विषाक्तता की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर निम्न टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं -

पारा विषाक्तता का इलाज

अगर मिथाइल मरकरी के कारण शरीर में किसी प्रकार की क्षति हुई है, तो आमतौर पर इस स्थिति को फिर से ठीक नहीं किया जा सकता है। हालांकि, पारा विषाक्तता के इलाज के लिए आमतौर पर निम्न उपचार विकल्प मौजूद हैं -

पारा विषाक्तता की जटिलताएं

अगर पारा रक्त तक पहुंच जाता है, तो यह काफी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। पारा विषाक्तता की कुछ गंभीर मामलों में निम्न जटिलताएं हो सकती हैं -