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लिवर रोग (Liver disease)

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लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पेट के दाहिने तरफ पसलियों के ठीक नीचे होता है। यह शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है जैसे मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा जमा करना और शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करना। रक्त में से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करके बाहर निकालने में भी लिवर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, लिवर में किसी प्रकार की खराबी या बीमारी होने के कारण यह अंग कुशलतापूर्वक काम नहीं कर पाता और शरीर की कई सामान्य क्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं। लिवर रोग कई अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जो आमतौर पर उनके कारणों पर निर्भर करते हैं। ज्यादातर मामलों में लिवर संबंधी रोग अधिक शराब का सेवन करने, मोटापा या फिर संक्रमण के कारण होते हैं। वहीं कुछ अनुवांशिक रोग भी हैं, जो लिवर संबंधी कई रोगों का कारण बन सकते हैं। कुछ लिवर रोग धीरे-धीरे लिवर की परत पर स्थायी निशान बना देते हैं, जिससे गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। हालांकि, समय पर इलाज और देखभाल की मदद से लिवर को खराब होने से बचाया जा सकता है।

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लिवर रोग के प्रकार

लिवर रोग के कई अलग-अलग प्रकार हैं, जो अनुवांशिक, वातावरणीय और जीवनशैली समेत कई अन्य कारणों से विकसित होते हैं। बैंगलोर के सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कन्सल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एंड हेपटोलॉजिस्ट डॉक्टर आदर्श सी.के. के द्वारा लिवर रोग के मुख्य प्रकार निम्न हैं -

लिवर रोग के लक्षण

कुछ प्रकार के लिवर रोगों में किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं या फिर विकसित होने वाले लक्षण अन्य सामान्य बीमारियों का संकेत देते हैं। वहीं कुछ लिवर रोगों में गंभीर लक्षण भी देखे जा सकते है। हालांकि, अगर लिवर रोग के लक्षण विकसित हो रहे हैं, तो उनमें निम्न शामिल हो सकते हैं -

यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है या फिर किसी अन्य वजह से आपको लगता है कि आप किसी लिवर रोग से ग्रस्त हो सकते हैं, तो ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

लिवर रोगों के कारण

लंबे समय से शराब का सेवन करना लिवर रोग होने का प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि, इसके अलावा भी कई ऐसी चीजें हैं जो लिवर रोगों का कारण बन सकती हैं। लिवर रोग के कारणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है -

हालांकि हर व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के अनुसार उन्हें कुछ अन्य लक्षण भी महसूस हो सकते हैं।

लिवर रोग के जोखिम कारक

लिवर रोगों के प्रकार के अनुसार उनके जोखिम कारक भी अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, निम्न कुछ प्रमुख जोखिम कारक हैं, जो लिवर रोग होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं -

लिवर रोग का निदान

लिवर संबंधी बीमारियों का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज का शारीरिक परीक्षण करते हैं और साथ ही उसके स्वास्थ्य से जुड़ी पिछली जानकारियों (मेडिकल हिस्ट्री) के बारे में पूछा जाता है। इस दौरान यदि डॉक्टर को संदेह होता है, कि आप किसी लिवर रोग से ग्रस्त हो सकते हैं, तो उसकी पुष्टि करने के लिए आपको कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है -

लिवर रोग से बचाव

लिवर संबंधी कुछ रोग अनुवांशिक स्थितियों के कारण होते हैं, जिनकी पूरी तरह से रोकथाम करना संभव नहीं होता है। हालांकि, जीवनशैली व अन्य कारणों से होने वाले लिवर रोगों से बचाव किया जा सकता है। डॉक्टर आदर्श के अनुसार कुछ निम्न निर्देशों का पालन करके लिवर रोग होने से बचाव किया जा सकता है -

लिवर रोग का इलाज

लिवर रोग का इलाज इसके कारण, प्रकार और मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के आधार पर किया जाता है। यदि लिवर संबंधी रोग गंभीर नहीं है, तो ज्यादातर मामलों में जीवनशैली में अच्छे बदलाव लाकर और आहार में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करके इस स्थिति का इलाज किया जा सकता है। वहीं अल्कोहोलिक लिवर डिजीज का इलाज करने के लिए शराब व अन्य अल्कोहल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बंद किया जाता है और साथ ही मरीज की डाइट में कुछ जरूरी बदलाव कर दिए जाते हैं। शराब छुड़ाने के लिए मरीज को कई बार बिहेवियरल थेरेपी और काउंसलिंग आदि की आवश्यकता भी पड़ सकती है। लिवर की सूजन को कम करने के लिए कोर्टिकोस्टेरोइड दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। अगर लंबे समय से बीमारी या अन्य किसी कारण से लिवर में स्कार (लिवर सिरोसिस) तो ऐसी स्थिति का इलाज करने के लिए डाइयुरेटिक्स, विटामिन के और एंटीबायोटिक्स आदि दवाओं की मदद से इलाज किया जाता है। साथ ही रोग का इलाज करने के लिए इनका कारण बनने वाले अंदरूनी रोगों का इलाज भी करना जरूरी होता है, इसलिए लिवर रोग का इलाज करने के लिए डायबिटीज व अन्य रोगों के लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है। डॉक्टर आदर्श सीके. के अनुसार अगर लिवर रोग अंतिम चरणों में आ चुका है, तो स्थिति से निपटने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट करना पड़ सकता है।