प्रसव कोई बीमारी नहीं बल्कि गर्भवती महिलाओं को होने वाली एक सामान्य शारीरिक क्रिया है, जिस दौरान महिला नवजात को जन्म देती है। प्रसव के दौरान महिला के योनी द्वार से गर्भ में पल रहा नवजात शिशु बाहर आता है और इसलिए यह काफी जटिल और दर्दनाक प्रक्रिया होती है। इससे महिलाएं मानसिक व शारीरिक रूप से प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, इस दौरान हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है। प्रसव के दौरान महिलाओं को होने वाला दर्द आमतौर पर दर्द गर्भाशय की मांसपेशियों के संकुचन और गर्भाशय पर दबाव बढ़ने के कारण होता है। प्रसव के दौरान गर्भाशय की मांसपेशियों में समय-समय पर संकुचित और शिथिल होती रहती हैं। प्रसव के कारण होने वाला दर्द आमतौर पर इस बात पर निर्भर करता है कि मांसपेशियां कितनी शक्ति के साथ व कितनी देर में संकुचित हो रही हैं और ऐसे में दर्द शरीर के दोनों तरफ और जांघों तक भी महसूस हो सकता है। प्रसव की तारीख नजदीक आते-आते कई बार शरीर गलती से प्रसव का संकेत दे देती है, जिसे फल्स लेबर (False Labour) कहा जाता है। फाल्स लेबर में मांसपेशियां संकुचित होने लग जाती हैं, हालांकि इस दौरान होने वाले संकुचन इतना ज्यादा नहीं होता है और दर्द भी कम होता है।
जैसा कि हमने आपको बताया है कि प्रसव एक जटिल प्रक्रिया है और इसलिए अच्छे से समझने के लिए इसे तीन चरणों में बांटा गया है, जो इस प्रकार हैं -
प्रसव से होने वाले लक्षण आमतौर पर हर महिला और वह उसका कौन सा प्रसव है आदि पर निर्भर करता है। प्रसव के दौरान होने वाले लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -
प्रसव की शुरुआती अवस्था में डॉक्टर निम्न की जांच करके इसका निदान कर सकते हैं -
प्रसव एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है और बच्चे का जन्म होने के बाद यह अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिए इसका इलाज करने की जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि, कई बार प्रसव के दौरान महिला को गंभीर दर्द शुरू हो जाते हैं, तो उसके स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं। प्रसव के दर्द को नियंत्रित करने के लिए आमतौर पर निम्न उपचार विकल्पों का इस्तेमाल किया जाता है -
वैसे तो प्रसव एक प्राकृतिक और सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में इससे कुछ जटिलताएं विकसित हो सकती हैं जिनमें निम्न शामिल हैं -